'चार सौ वर्षों की प्रतीक्षा' पर आधारित कविता ने जीता दिल: वंदना शर्मा ने बिखेरा राष्ट्रभक्ति का ओज



--प्रदीप फुटेला
अयोध्या - उत्तर प्रदेश
इंडिया इनसाइड न्यूज।

भव्यकुंड के समीप स्थित होटल परमेश्वर पैलेस में आयोजित 'दिव्योत्सव' अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में उत्तराखंड के हल्द्वानी की सुप्रसिद्ध कवयित्री वंदना शर्मा ने अपनी ओजस्वी एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविता के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीराम और भारतीय आस्था पर आधारित उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति को श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।

वंदना शर्मा ने अपनी कविता में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण को सदियों की आस्था और चार सौ वर्षों के संघर्ष का प्रतीक बताते हुए कहा—

"सदियों से सहेजा सपना, जला आस्था का दीप, चार सौ वर्षों की प्रतीक्षा, तब हुआ ये नसीब।
हर ईंट में बसी है, आस्था की वो पुकार, रामलला का वास जिसमें, सज गया वो द्वार।
टूटे मन, बिखरे सपने, आज साकार हो गए, भारत की आत्मा में नए अध्याय जोड़ गए।"

उनकी इन पंक्तियों ने सभागार में उपस्थित श्रोताओं के मन में राष्ट्र और धर्म के प्रति गहरी श्रद्धा का संचार किया। कविता में व्यक्त आस्था, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभावना ने उपस्थित साहित्यकारों एवं श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया।

दिव्योत्सव साहित्यिक मंच, बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) के तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूज्यपाद डॉ. विजय भास्कर पाण्डेय 'पवन जी महाराज' ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की संयोजिका सुधा सिंह ने सभी अतिथियों एवं साहित्यकारों का स्वागत करते हुए साहित्य को समाज और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बताया।

देश के विभिन्न राज्यों से आए अनेक कवियों एवं साहित्यकारों ने वीर रस, राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा मानवीय मूल्यों पर आधारित रचनाओं का पाठ किया। वीर रस की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं में जोश भर दिया, जबकि हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने वातावरण को आनंदमय बना दिया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, हिंदी भाषा तथा नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी साधन है। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, कवियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया तथा राष्ट्रगान और सामूहिक छायाचित्र के साथ समारोह का समापन हुआ।

हल्द्वानी की वंदना शर्मा की प्रभावशाली प्रस्तुति इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण रही। उनकी राष्ट्रवादी कविता ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और धर्म के प्रति अटूट आस्था ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है।

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