● स्किल इंडिया ने एयरबीएनबी के साथ अतिथि सत्कार क्षेत्र में उद्यमियों की क्षमता विकास के लिये समझौता किया
● यह साझेदारी एयरबीएनबी की स्किल इंडिया अभियान की प्रति उस प्रतिबद्धता को आगे ले जाती है जिसके तहत वह अतिथि सत्कार के क्षेत्र में भारत में 50,000 उद्मियों को तैयार करने और उन्हें सशक्त बनाने में सहयोग करेगी
28 नवम्बर। नई दिल्ली में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी), पर्यटन एवं अतिथि सत्कार क्षेत्र कौशल परिषद (टीएचएससी) एवं एयरबीएनबी, अतिथि सत्कार के क्षेत्र में विश्व की एक अग्रणी कंपनी, के बीच एक तीन भागीदारों वाले सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये गये। सहमति पत्र के तहत अतिथि सत्कार के क्षेत्र में भारत के सूक्ष्म उद्यमियों को कौशल प्रदान किया जायेगा। इस अवसर पर केंद्रीय कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “हमें विश्वास है कि इस साझेदारी से अतिथि सत्कार के क्षेत्र में लघु उद्यमियों को विश्व स्तरीय प्रक्रियाओं से परिचित करवाने के स्किल इंडिया अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारत में घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनायें हैं और इस साझेदारी से महिलाओं और युवाओं के लिये अवसरों का सृजन करके पारिस्थितिकी तंत्र की मदद करेगी। हम भारत को एक पसंदीदा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने में हर संभव मदद करेंगे।”
भारत, दक्षिणपूर्व एशिया और एनएनजेड के लिये नीति निर्देशक ब्रेंट थॉमस ने कहा, “इस साझेदारी के जरिये ज्यादा संख्या में डिजिटल साक्षर अतिथि सत्कार उद्यमियों को विकसित किया जा सकेगा विशेषकर के महिलाओं और पिछड़े क्षेत्रों में जहां पर वह प्रत्येक घर में अतिथि के ठहरने की व्यवस्था कर सकें और भारत के प्रत्येक स्थानीय क्षेत्र में भारतीयता का भरोसेमंद अनुभव कराया जा सके और पर्यटन के लाभों का विस्तार किया जा सके।”
सहमति पर हस्ताक्षर भारत सरकार के उस कौशल विकास कार्यक्रम के अनुरूप है जिसके तहत सरकार उद्यमिता को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। एनएसडीसी भारत सरकार के कौशल एवं उद्यमिता विकास मंत्रालय की क्रियान्वयन करने वाली संस्था है।
एयरबीएनबी की स्किल इंडिया अभियान की प्रति उस प्रतिबद्धता को आगे ले जाते हुये जिसके तहत वह अतिथि सत्कार के क्षेत्र में भारत में 50,000 उद्मियों को तैयार करने में सहयोग करेगी, इस सहमति पत्र का उद्देश्य ज्यादा नागरिकों को सशक्त बनाना है ताकि विशेष कर के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों को वैकल्पिक ठहरने की व्यवस्था के क्षेत्र को मजबूत बनाकर घर का साझा करते हुये आजीविका का नया विकल्प दिया जा सके।