● मंत्रिमंडल ने महिलाओं के लिए सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिशन अम्ब्रेला स्कीम का विस्तार और प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र नामक नई स्कीम प्रस्तुत करने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने अम्ब्रेला स्कीम महिलाओं के लिए सुरक्षा और सशक्तिकरण मिशन का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की योजनाओं के विस्तार के लिए वर्ष 2017-18 से लेकर 2019-20 की अवधि के लिए अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। सीसीईए ने ‘प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र (पीएमएमएसके)’ नामक नई स्कीम को भी मंजूरी प्रदान की है, जो सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त करेगी, जिससे कि एक ऐसा परिवेश बनाया जा सके, जिसमें वह अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग कर सके। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत विस्तार को भी 161 जिलों में सफल कार्यान्वयन के आधार पर मंजूरी प्रदान की गई है।
2017-18 से लेकर 2019-20 के दौरान वित्तीय परिव्यय 3636.85 करोड़ रुपये होगा, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा लगभग 3084.96 करोड़ रुपये होगा।
स्कीम के फायदे:
मंजूर की गई उप-योजनाएं सामाजिक कल्याण क्षेत्र, विशेषकर महिलाओं की देखभाल, सुरक्षा और विकास की योजनाएं हैं। इसका लक्ष्य घटते हुए लिंगानुपात में सुधार करना, नवजात कन्या की उत्तरजीविता और सुरक्षा को सुनिश्चित करना, उसकी शिक्षा को सुनिश्चित करना और उसकी क्षमता को पूर्ण करने के लिए उसे सशक्त बनाना है। यह ग्रामीण महिलाओं को उनके अधिकारों को प्राप्त करने हेतु सरकार से संपर्क करने के लिए इंटरफेस प्रदान करेगा और यह प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाएगी। स्वेच्छाकर्मी विद्यार्थी स्वैच्छिक सामुदायिक सेवा और लैंगिक समानता की भावना को प्रोत्साहित करेंगे। यह विद्यार्थी ‘बदलाव के एजेंटों’ के रूप में कार्य करेंगे और इनका समुदायों और देश पर अभूतपूर्व प्रभाव पड़ेगा।
अम्ब्रेला स्कीम के मुख्य कार्यकलाप:
प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र (पीएमएमएसके) नई स्कीम की परिकल्पना विभिन्न स्तरों पर कार्य करने के लिए की गई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर (क्षेत्र आधारित ज्ञान सहायता) और राज्य स्तर (महिलाओं के लिए राज्य संसाधन केंद्र) संरचनाएं महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर संबंधित सरकार को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी, जिला और ब्लॉक-स्तरीय केंद्र एम.एस.के को सहायता प्रदान करेंगे और यह चरणबद्ध तरीके से कवर किए जाने वाले 640 जिलों में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) को आधार प्रदान करेंगे। स्वेच्छाकर्मी विद्यार्थियों के माध्यम से सामुदायिक सेवा की परिकल्पना एम.एस.के खंड-स्तरीय पहलों के भार के रूप में 115 अत्यधिक पिछड़े जिलों में परिकल्पित की गई है। स्वेच्छाकर्मी विद्यार्थी विभिन्न महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूकता सृजन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस प्रक्रिया में स्थानीय कॉलेजों से लगभग तीन लाख से भी अधिक स्वेच्छाकर्मी विद्यार्थियों को लगाया जाएगा, जबकि एनएसएस/एनसीसी कैडर के साथ विद्यार्थियों का सहयोग एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का एक अवसर भी होगा। यह स्वेच्छाकर्मी विद्यार्थियों को उनके अपने समुदायों में बदलाव लाकर विकास प्रक्रिया में भागीदारी करने का अवसर प्रदान करेगा और इससे वे सुनिश्चित कर सकेंगे कि भारत की प्रगति में कोई भी महिला पीछे न रह जाए और महिलाएं भी समान रूप से भागीदारी है।
स्वेच्छाकर्मी विद्यार्थियों के कार्यकलापों पर आधारित प्रमाण को वैब आधारित प्रणाली के माध्यम से मॉनीटर किया जाएगा। कार्य समाप्ति पर सामुदायिक सेवा के प्रमाण-पत्रों को सत्यापन के लिए राष्ट्रीय पोर्टल पर दर्शाया जाएगा और प्रतिभागी विद्यार्थी भविष्य में इन्हें अपने संसाधन के रूप में उपयोग कर सकते हैं। निरंतर राष्ट्रव्यापी पक्ष समर्थन और 640 जिलों में मीडिया अभियान और चयनित 405 जिलों में बहुक्षेत्रीय कार्यवाही के माध्यम से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) के लिए विस्तार और प्रयासों में तीव्रता के लिए भी मंजूरी दी गई है। उन सभी जिलों को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के तहत पहले वर्ष शामिल किया जाएगा, जिन जिलों में सीएआर काफी कम है। कामकाजी महिलाओं को सहायता प्रदान करने के लिए लगभग 190 से अधिक कामकाजी महिला हॉस्टलों की स्थापना की जाएगी, जिनमें लगभग 19 हजार महिलाएं रह सकेंगी। लगभग 26,000 लाभार्थियों को राहत और पुनर्वास प्रदान करने के लिए अतिरिक्त स्वाधार गृहों को भी मंजूरी दी गई है।
हिंसा से पीड़ित महिलाओं को समावेशी सहायता प्रदान करने के लिए इस अवधि के दौरान 150 अतिरिक्त जिलों में वन स्टॉप सेंटरों (ओएससी) की स्थापना की जाएगी। इन वन स्टॉप सेंटरों को महिला हेल्पलाइन के साथ जोड़ा जाएगा और देशभर में सार्वजनिक और निजी दोनों स्थानों पर हिंसा से पीडि़त महिलाओं को 24 घंटे का आपातकालीन एवं गैर आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली प्रदान की जाएगी। राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में स्वैच्छिक आधार पर महिला पुलिस स्वेच्छाकर्मियों (एमपीवी) को संलग्न करके एक अद्वितीय पहल शुरू की जाएगी, जिससे कि जनता-पुलिस संपर्क स्थापित किया जा सके। सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को कवर करते हुए 65 जिलों में इसका विस्तार दिया जाएगा।
योजना की मॉनिटरिंग और मूल्यांकन:
इस योजना के तहत सभी उप-योजनाओं की योजना, समीक्षा और मॉनिटरिंग के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिलास्तर पर एक सामान्य कार्यबल गठित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य कार्यवाही के कनवर्जन्स और लागत प्रभाविकता को सुनिश्चित करना है। प्रत्येक योजना का एसडीजी के अनुरूप दिशा-निर्देशों में स्पष्ट एवं केंद्रित लक्ष्य निर्धारित होगा। नीति आयोग द्वारा दिए गए सुझाव के अनुसार सभी उप-योजनाओं के लिए सूचकों पर आधारित परिणाम की मॉनिटरिंग के लिए तंत्र की स्थापना भी की जाएगी। इन योजनाओं को राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों और कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा। सभी उप-योजनाओं का केंद्रीय स्तर, राज्य, जिला और खंड स्तर पर एक अंतरनिर्हित मॉनिटरिंग ढांचा होगा।
● मंत्रिमंडल ने आतंकवाद और संगठित अपराध से निपटने में सहयोग के लिए भारत-रूस करार पर हस्ताक्षर करने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आतंकवाद के सभी रूपों और संगठित अपराध से निपटने के क्षेत्र में भारत और रूस के बीच सहयोग के लिए एक करार पर हस्ताक्षर करने के लिए अपनी मंजूरी दी है।
इस करार पर गृहमंत्री के नेतृत्व में दिनांक 27 से 29 नवंबर, 2017 को रूस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की आगामी यात्रा के दौरान हस्ताक्षर होना प्रस्तावित है।
पृष्ठभूमि:
भारत और रूस का आपसी हितों के मामलों संबंधी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर निकट सहयोग का सुदीर्घ इतिहास है। विश्वभर में बढ़ते आतंकवाद और संगठित अपराध को ध्यान में रखते हुए सभी देशों के लिए आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने के लिए एक साथ मिलकर काम करना अनिवार्य है। प्रस्तावित करार, जो अक्तूबर, 1993 के करार का स्थान लेगा, वह सुरक्षा के क्षेत्र में उपार्जित किए गए लाभों को एकत्र करने की दिशा में एक कदम है और यह नए एवं उभरते हुए जोखिमों और खतरों से संयुक्त रूप से निपटने का प्रस्ताव रखता है। इस करार के माध्यम से सूचना, विशेषज्ञता, बेहतर प्रथाओं के आदान-प्रदान और साझाकरण से भारत और रूस के बीच आपसी संबंधों को मजबूती मिलेगी।
● मंत्रिमंडल ने भारत और फिलिपींस के बीच सीमा शुल्क मामलों में सहयोग और परस्पर सहायता के लिए करार को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और फिलिपींस के बीच सीमा शुल्क मामलों में सहयोग और परस्पर सहायता के लिए करार को मंजूरी दी।
इस करार से सीमा शुल्क संबंधी अपराधों को रोकने में और उनकी जाँच करने के लिए उनके बारे में प्रासंगिक सूचना की उपलब्धता में मदद मिलेगी। इस प्रस्तावित करार से दोनों देशों के बीच व्यापार सुगम होगा और व्यापार की वस्तुओं की कुशल क्लियरेंस भी सुनिश्चित होने की आशा है।
दोनों देशों द्वारा इस करार में प्रवेश करने के लिए अपेक्षित राष्ट्रीय कानूनी जरूरतों को पूरा किए जाने के पश्चात ये करार लागू होगा।
पृष्ठभूमि:
इस प्रस्तावित करार से दोनों देशों के सीमा शुल्क प्राधिकारियों के बीच सूचना और आसूचना के आदान-प्रदान के लिए एक विधिक ढांचा उपलब्ध हो सकेगा और इससे सीमा शुल्क संबंधी कानूनों के समुचित प्रयोग, सीमा शुल्क से संबंधित अपराधों को रोकने, उनकी जांच करने में मदद मिल सकती है और वैध व्यापार में सुविधा प्राप्त हो सकती है। प्रस्तावित करार के प्रारूप पाठ को दोनों देशों के सीमा शुल्क प्रशासनों की सहमति से अंतिम रूप दिया गया है। इस प्रस्तावित करार में भारतीय सीमा शुल्क के सरोकारों और अपेक्षाओं, जो कि विशेष रूप से घोषित सीमा शुल्क, मूल्य की सत्यता से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान के क्षेत्र और दोनों देशों के बीच व्यापार की जाने वाली वस्तुओं की उत्पत्ति की प्रामाणिकता की देखभाल की व्यवस्था है।
● मंत्रिमंडल ने केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कामगारों के लिए मजदूरी समझौते के आठवें चरण के लिए मजदूरी नीति को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमडल ने केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) के कामगारों के लिए मजदूरी समझौते के आठवें चरण के लिए मजदूरी नीति को मंजूरी दी है।
मुख्य विशेषताएं –
I. संबंधित सीपीएसई के लिए मजदूरी संशोधन की किफायतता और वित्तीय धारणीयता को ध्यान में रखते हुए ऐसे सीपीएसई का प्रबंधन ऐसे कामगारों के मजदूरी में संशोधन करने के लिए स्वतंत्र होगा, जहां पाँच वर्षों या दस वर्षों की मजदूरी अदायगी की अवधि दिनांक 31.12.2016 को समाप्त हो गई है।
II. सरकार द्वारा मजदूरी में बढ़ोतरी के लिए कोई भी बजटीय सहायता नहीं दी जाएगी। सम्पूर्ण वित्तीय भार संबंधित सीपीएसई द्वारा उसके आंतरिक संसाधनों से वहन किया जाएगा।
III. जिन सीपीएसई के लिए सरकार ने पुनर्सरंचना/पुनर्उत्थान योजना के लिए मंजूरी दे दी है, उनमें मजदूरी में संशोधन मंजूर की गई पुनर्सरंचना/पुनर्उत्थान योजना के प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।
IV. संबंधित सीपीएसई के प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वेतन के पराक्रमित स्केल उसके एक्जेक्यूटिव/अधिकारियों और गैर-यूनियनकृत अधीक्षकों के वर्तमान वेतनमान से अधिक नहीं होंगे।
V. जिन सीपीएसई के प्रबंधन में 5 वर्षों की आवधिकता को अपनाया गया है, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि दो उत्तरवर्ती मजदूरी समझौतों के पराक्रमित वेतन स्केल संबंधित सीपीएसई के एक्जेक्यूटिव/अधिकारियों और गैर-यूनियनकृत अधीक्षकों के वर्तमान वेतनमान से अधिक नहीं होंगे, जिनके लिए 10 वर्षों की आवधिकता का अनुपालन किया जा रहा है।
VI. एक्जेक्यूटिव/अधिकारियों और गैर-यूनियनकृत अधीक्षकों के वर्तमान वेतनमान के साथ अपने कामगारों के वेतनमान टकराव से बचने के लिए, सीपीएसई मजदूरी समझौते के दौरान वर्गीकृत महंगाई भत्ता तटस्थता और/या वर्गीकृत निर्धारण को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
VII. सीपीएसई को यह सुनिश्चित करना जरूरी है समझौते के बाद मजदूरी में कोई भी बढ़ोतरी से उनकी वस्तुओं और सेवाओं की प्रशासित कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
VIII. मजदूरी संशोधन इस शर्त के अधीन किया जाएगा कि उत्पादन की प्रति भौतिक इकाई की मजदूरी लागत में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। कुछ विशेष मामलों को छोड़कर जहां सीपीएसई पहले से ही ईष्टतम क्षमता पर काम कर रही हो, वहां प्रशासनिक मंत्रालय/विभाग उद्योग के मानदंडों पर विचार करते हुए डीपीई पर सुझाव दे सकता है।
IX. मजदूरी समझौते की वैधता अवधि ऐसे लोगों के लिए कम से कम पाँच साल होगी, जिन्होंने पाँच वर्ष की आवधिकता का चयन किया है और जिन व्यक्तियों ने मजदूरी समझौते की आवधिकता के लिए 10 वर्ष की अवधि का चयन किया है उनके लिए अधिकतम अवधि 10 वर्ष होगी। यह दिनांक 1.1.2017 से लागू होगी।
X. सीपीएसई समझौता की गई मजदूरियों को अपने प्रशासनिक मंत्रालय/विभाग के साथ यह सुनिश्चित करने के पश्चात ही लागू करेगी कि मजदूरी समझौता मंजूर किए गए मानदंडों के अनुरूप है।
पृष्ठभूमि
देश में 320 सीपीएसई में लगभग 12.34 लाख कर्मचारी है। इनमें से लगभग 2.99 लाख कर्मचारी बोर्ड स्तर और बोर्ड स्तर से नीचे के एक्जेक्यूटिव और गैर-यूनियनकृत पर्यवेक्षक हैं। शेष लगभग 9.35 लाख कर्मचारी यूनियनकृत कामगारों की श्रेणी में आते हैं। यूनियनकृत कामगारों के संबंध में मजदूरी संशोधन को मजदूरी समझौते के लिए सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की शर्तों के अनुसार सीपीएसई के व्यापार संघों और प्रबंधनों द्वारा निर्धारित किया जाता है।
● मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के लिए संशोधित वेतन, ग्रेच्यूटी, भत्तों और पेंशन की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों और सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए संशोधित वेतन, ग्रेच्यूटी, भत्तों और पेंशन की मंजूरी दी। यह कदम केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए गठित सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन के अनुपालन में हुआ है।
इस मंजूरी से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई), भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और सभी न्यायाधीशों के वेतन को प्रशासित करने वाले दो कानूनों नामत: सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्त) अधिनियम, 1958 और उच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्त) अधिनियम 1954 में आवश्यक संशोधन करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
वेतन एवं भत्तों आदि में बढ़ोत्तरी से भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 31 न्यायाधीशों (सीजेआई सहित) और उच्च न्यायालयों 1079 न्यायाधीशों को फायदा मिलेगा। इसके साथ-साथ लगभग 2500 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को भी पेंशन/ग्रेच्यूटी में संशोधन के कारण फायदा मिलेगा।
संशोधित वेतन, गेच्यूटी, पेंशन और परिवार पेंशन में संशोधन 01.01.2016 से लागू होगा और बकाया राशि एकमुश्त भुगतान के रूप में प्रदान की जाएगी।
पृष्ठभूमि:
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के संबंध में वेतन, गेच्यूटी, पेंशन और भत्ते आदि सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्त) अधिनियम, 1958 द्वारा प्रशासित होते हैं। उच्च न्यायालयों के वेतन, गेच्यूटी, पेंशन और भत्ते आदि उच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्त) अधिनियम 1954 द्वारा प्रशासित होती हैं। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के संबंध में वेतन, गेच्यूटी, पेंशन और भत्ते आदि संशोधन करने के लिए जब कभी भी कोई प्रस्ताव होता है तो उपर्युक्त अधिनियमों में संशोधन करने की आवश्यकता होती है। इसलिए, सरकार वेतन एवं भत्तों के संशोधन को लागू करने के लिए संबंधित अधिनियमों में संशोधन हेतु संसद के आगामी सत्र में एक विधेयक पेश करने का प्रस्ताव करती है।
● मंत्रिमंडल ने 12वीं योजना अवधि के अतिरिक्त भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान संबंधी योजना को जारी रखने के लिए मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अन्य तीन वित्तीय वर्षों (वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर 2019-20 तक) के लिए भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) योजना को जारी रखने और संस्थान को 18 करोड़ रुपए का सहायता अनुदान प्रदान करने के लिए अपनी मंजूरी प्रदान की है। इससे वित्त वर्ष 2019-20 के अंत तक यह संस्थान आत्मनिर्भर बन सकेगा।
प्रभाव:
कॉरपोरेट गवर्नेंस के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सार्वजनिक औऱ निजी क्षेत्र की भागीदारी से संस्थान द्वारा संचालित किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम, अनुसंधान गतिविधियाँ और परियोजनाएं कौशल का विकास करेगी और इसके परिणामस्वरुप विद्यार्थियों की नियोजनीयता और पेशेवरता में भी बढ़ोतरी होगी।
संस्थान का मुख्य उद्देश्य अपने संसाधन और राजस्व में बढ़ोतरी करते हुए कॉरपोरेट कानून के क्षेत्र में प्रतिष्ठित संस्थान बनाना है।
यह परिकल्पना की गई है कि आईआईसीए एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बनेगा जिसके परिणामस्वरुप यह विकास का इंजन बनेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों में भी विस्तार होगा।
पेशवर क्षमता में सुधार होने से विदेशों सहित उभरते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को प्राप्त करने में पेशेवरों की भी मदद होने की प्रत्याशा है।
पृष्ठभूमि:
आईआईसीए में राष्ट्रीय कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व फाउंडेशन (एनएफसीएसआर) कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के लिए जिम्मेदार है। इस फाउंडेशन को कंपनी अधिनियम, 2013 के नए प्रावधानों के अनुरुप डिजाइन किया गया था। एनएफसीएसआर सामाजिक समावेशन की दिशा में उन्मुखी, सीएसआर के क्षेत्र में कॉरपोरेटों के साथ भागीदारी में विभिन्न गतिविधियों का संचालन करता है।
आईआईसीए विभिन्न नीति निर्माताओं, नियामकों सहित कॉरपोरेट क्षेत्र से संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाले विभिन्न हितधारकों के लिए तर्कसंगत निर्णय लेने में सहायता करने के लिए थिंक टैंक और ज्ञान एवं आंकड़ों का भंडार है। यह कॉरपोरेट कानून, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, सीएसआर, लेखांकन मानक, निवेशक शिक्षा आदि क्षेत्रों में हितधारकों को सेवाएं प्रदान करता है। आईआईसीए की विभिन्न गतिविधियों ने प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों और लघु व्यापारों को बहु-अनुशासनीय कौशल प्रदान करने के लिए भी मदद की है क्योंकि उनके पास प्रबंधन, कानून, लेखांकन आदि क्षेत्र में अलग से विशेषज्ञों को नियुक्त करने के वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं है।
● मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग का गठन करने के लिए मंजूरी प्रदान की
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग का गठन करने के लिए मंजूरी प्रदान की है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 280 (1) के अंतर्गत यह संवैधानिक बाध्यता है। 15वें वित्त आयोग की शर्तों को आने वाले समय में अधिसूचित किया जाएगा।
पृष्ठभूमि:
संविधान के अनुच्छेद 280 (1) के अंतर्गत यह प्रावधान है कि संविधान के प्रारंभ से दो वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर या पहले इस समय पर, जिसे राष्ट्रपति आवश्यक समझते हैं, एक वित्त आयोग का गठन किया जाएगा। इस जरूरत को ध्यान में रखते हुए, परम्परा यह है कि पिछले वित्त आयोग के गठन की तारीख के पाँच वर्षों के भीतर अगले वित्त आयोग का गठन हो जाता है।
अभी तक 14 वित्त आयोगों का गठन किया जा चुका है। 14वें वित्त आयोग का गठन 01 अप्रैल, 2015 से शुरू होने वाले पाँच वर्षों की अवधि को कवर करने वाली सिफारिशें देने के लिए 02.01.2013 को गठित किया गया था। 14वें वित्त आयोग ने 15 दिसंबर, 2014 को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था। 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें वित्तीय वर्ष 2019-20 तक के लिए वैध है। संवैधानिक प्रावधानों के नियमों के अनुसार, 15वें वित्त आयोग का गठन करना अब शेष है। 15वां वित्त आयोग दिनांक 01 अप्रैल, 2020 से लेकर अगले पाँच वर्षों की अवधि के लिए सिफारिशों को कवर करेगा।
● मंत्रिमंडल यूरोपीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक में भारत की सदस्यता के संबंध में मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने यूरोपीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (ईबीआरडी) में भारत की सदस्यता के संबंध में मंजूरी दी है।
ईबीआरडी की सदस्यता प्राप्त करने के लिए आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय द्वारा आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
प्रभाव:
ईबीआरडी की सदस्यता से भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि में और अधिक निखार आएगा तथा इसके आर्थिक हितों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ईबीआरडी के संचालन वाले देशों तथा उसके क्षेत्र ज्ञान तक भारत की पहुंच निवेश तथा अवसरों को बढ़ाएगी।भारत के निवेश अवसरों में बढ़ोत्तरी होगी।इस सदस्यता से विनिर्माण, सेवा, सूचना प्रौद्योगिकी और ऊर्जा में सह-वित्तपोषण अवसरों के जरिए भारत और ईबीआरडी के बीच सहयोग के अवसर बढेंगे।ईबीआरडी के महत्वपूर्ण कार्यों में अपने संचालन के देशों में निजी क्षेत्र का विकास करना शामिल है। इस सदस्यता से भारत को निजी क्षेत्र के विकास को लाभान्वित करने के लिए बैंक की तकनीकी सहायता तथा क्षेत्रीय ज्ञान से मदद मिलेगी।इससे देश में निवेश का माहौल बनाने में योगदान मिलेगा।ईबीआरडी की सदस्यता से भारतीय फर्मों की प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति बढ़ेगी और व्यापार के अवसरों, खरीद कार्यकलापों, परामर्श कार्यों आदि में अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुँच बढ़ेगी।इससे एक ओर तो भारतीय पेशेवरों के लिए नए क्षेत्र खुलेंगे और दूसरी ओर भारतीय निर्यातकों को भी लाभ मिलेगा।बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों से रोजगार सृजन क्षमता में विस्तार होगा।इससे भारतीय नागरिक भी इस बैंक में रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकेंगे।
वित्तीय व्यय:
ईबीआरडी की सदस्यता के लिए न्यूनतम आरंभिक निवेश लगभग €1 (एक) मिलियन है। तथापि, यह अनुमान इस अनुमान पर आधारित है कि भारत सदस्यता प्राप्त करने के लिए अपेक्षित न्यूनतम शेयर संख्या (100) की खरीद करने का निर्णय लेगा। यदि भारत अधिक संख्या में बैंक शेयर खरीदता है तो वित्तीय व्यय इससे अधिक हो सकता है। इस स्तर पर बैंक की सदस्यता के लिए मंत्रिमंडल से सैद्धांतिक अनुमोदन लिया जा रहा है।
पृष्ठभूमि:
यूरोपीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (ईबीआरडी) में भारत की सदस्यता प्राप्त करने से संबंधित मामला लंबे समय से भारत सरकार के पास विचाराधीन था। पिछले कुछ वर्षों में देश की प्रभावी आर्थिक वृद्धि और बढ़ी हुई अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक छवि को देखते हुए यह उपयुक्त समझा गया कि भारत को विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक एवं अफ्रीका विकास बैंक जैसे बहुपक्षीय विकास बैंक (एमडीबी) से सबंधों के आग वैश्विक विकासात्मक परिदृश्य पर अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहिए। इसी पृष्ठभूमि में पहले एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (एआईआईबी) तथा न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) में शामिल होने का निर्णय लिया गया था।