मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी/स्वीकृति



नई दिल्ली, 07 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) मंत्रिमंडल ने पंजाब, हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली में फसल अवशेषों के यथास्‍थान प्रबंधन के लिए कृषि मशीनरी प्रोत्‍साहन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने पंजाब, हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली में फसल अवशेषों के यथास्‍थान प्रबंधन के लिए कृषि मशीनरी प्रोत्‍साहन को अपनी स्‍वीकृति दे दी है।

केंद्रीय निधियों के लिए कुल खर्च 1151.80 करोड़ रुपये होगा। (591.65 करोड़ रूपये 2018-19 में और 560.15 करोड़ रुपये 2019-20 में)।

योजना के घटक

1. यथास्‍थान अवशेष प्रबंधन मशीनरी के कस्‍टम हायरिंग के लिए कृषि मशीनरी बैंक की स्‍थापना। किसानों की सहकारी समितियों, एफपीओ, स्‍वसहायता समूहों, पंजीकृत किसान समितियों/किसान समूहों, निजी उद्यमियों, महिला किसान समूहों को फार्म मशीनरी बैंक अथवा कस्‍टम हायरिंग केंद्र स्‍थापित करने के लिए परियोजना लागत के 80% की दर पर वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

2. यथास्‍थान अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को कृषि मशीनरी तथा उपकरण खरीद के वित्‍तीय सहायता। व्‍यक्तिगत किसान को कृषि अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनरी/उपकरणों की 50% लागत की दर से वित्‍तीय सहायता प्रदान की जायेगी।

• यथास्‍थान फसल अवशेष प्रबंधन पर जागरूकता के लिए सूचना, शिक्षा तथा संचार प्रसार। राज्‍य सरकारों, केवीके, आईसाीएआर संस्‍थानों, केंद्र सरकार के संस्‍थानों, सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों इत्‍यादि को सूचना, शिक्षा तथा प्रचार-प्रसार के कार्यकलापों के लिए वित्‍तीय सहायता प्रदान की जायेगी। इन गतिविधियों में लघु तथा दीर्घावधि फिल्‍मों, वृतचित्रों, रेडियों और टीवी कार्यक्रमों, विभिन्‍न स्‍तरों पर प्रदर्शन शिविरों, प्रतिभा विकास कार्यक्रमों, प्रिंट मीडिया में विज्ञापन, स्‍टार अभियान, कोई भी अवशेष न जलाने के लिए ग्राम/ग्राम पंचायत के लिए पुरस्‍कार, दूरदर्शन, डीडी किसान तथा अन्‍य निजी चैनलों पर पैनल चर्चा के माध्‍यम से जन जागरूकता अभियान शामिल हैं।

लाभार्थी

1. संबंधित राज्‍य सरकारें जिला स्तरीय कार्यकारी समितियों (डीएलईसी) के माध्यम से विभिन्न लाभार्थियों और स्थान- कृषि प्रणाली पर निर्भर विशेष कृषि उपकरण की पहचान करेगी और कस्टम हायरिंग और व्यक्तिगत मालिक स्वामित्व के आधार पर मशीनों की खरीद के लिए कृषि मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए लाभार्थियों की पहचान और चयन करेगी ताकि पारदर्शी रूप से समय पर लाभ प्राप्त किए जा सकें।

2. राज्‍य नोडल विभाग/ डीएलइसी लाभार्थी की ऋण आवश्‍यकता के लिए बैंकों के साथ गठबंधन करेंगे। चयनित लाभार्थियों के नाम एवं विवरण जिला स्‍तर पर दस्‍तावेजों में शामिल किए जायेगें जिसमें उनके आधार/यूआईडी नम्‍बर तथा प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण के माध्‍यम से दी गई वित्‍तीय सहायता दिखाई जाएगी।

कार्यान्‍वयन एजेंसियां

1. केंद्रीय स्‍तर पर यह योजना कृषि, सहयोग और किसान कल्‍याण विभाग द्वारा प्रशासित होगी।

2. कृषि सहकारिता और किसान कल्‍याण विभाग के सचिव की अध्‍यक्षता में एक राष्‍ट्रीय संचालन समिति नीति तैयार करेगी और राज्‍य सरकार द्वारा योजना लागू करने के बारे में समग्र निर्देश और दिशा-निर्देश देगी तथा योजना की निगरानी तथा प्रगति और प्रदर्शन की समीक्षा करेगी।

• अपर सचिव की अध्‍यक्षता में योजना की गतिविधियों की देखरेख कार्यकारी समिति करेगी।

1. राज्‍य स्‍तर पर संबंधित राज्‍य सरकार अर्थात पंजाब, हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश तथा राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली के राज्‍य कृषि विभाग नोडल कार्यान्‍वयन एजेंसी होंगे। संबंधित राज्‍य सरकारों के प्रमुख सचिव कृषि/कृषि उत्‍पादन आयुक्‍त की अध्‍यक्षता में राज्‍य स्‍तरीय कार्यान्‍वयन समितियां (एसएलइसी) नोडल एजेंसियों तथ अन्‍य संबंधित विभागों के साथ नियमित बैठकें करके अपने-अपने राज्‍यों में योजना क्रियान्‍वयन की निगरानी करेंगे और उचित नीति बनाने के लिए कार्यकारी समिति को इनपुट प्रदान करेंगे।

2. जिला स्‍तरीय कार्यकारी समिति परियोजना तैयार करने, लागू करने और जिलों में निगरानी के उद्देश्‍य को आगे बढ़ाने के लिए उत्‍तरदायी होगी और किसान समूहों/फसल अवशेष नहीं जलाने के लिए किसानों को सक्रिय बनाने वाले प्रगतिशील किसानों को शामिल करते हुए निगरानी समितियां बनाएगी।

3. कृषि सहकारिता और किसान कल्‍याण विभाग फसल अवशेष के यथास्‍थान प्रबंधन के लिए मशीन और उपकरण निर्माताओं का मूल्‍य सहित एक पैनल तैयार करेगा।

पृष्‍ठभूमि

2018-19 की बजट घोषणा के अनुसार पंजाब, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश की सरकारों तथा राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली की वायु प्रदुषण की समस्‍या का समाधान करने तथा फसलों के अवशेषों के यथास्‍थान प्रबंधन के लिए आवश्‍यक मशीनरी पर सब्सिडी के लिए वर्ष 2018-19 से 2019-20 के लिए विशेष नई केंद्रीय क्षेत्र की योजना (100 प्रतिशत केंद्रीय हिस्‍सेदारी) प्रस्‍तावित है।


(●) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नशीले पदार्थों, मादक द्रव्‍यों, उनके रासायनिक यौगिकों की तस्‍करी और सं‍बंधित अपराधों में कमी लाने और अवैधानिक उपयोग को रोकने के लिए भारत तथा फ्रांस के बीच एक समझौते को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नशीले पदार्थों, मादक द्रव्‍यों, उनके रासायनिक यौगिकों की तस्‍करी और सं‍बंधित अपराधों में कमी लाने और अवैधानिक उपयोग को रोकने के लिए भारत तथा फ्रांस के बीच एक समझौते को मंजूरी दी है।

इस समझौते का उद्देश्‍य नशीले पदार्थों, मादक द्रव्‍यों, उनके रासायनिक यौगिकों की तस्‍करी और सं‍बंधित अपराधों में कमी लाने और अवैधानिक उपयोग को रोकने के लिए दोनों देशों के आपसी सहयोग को बढ़ाना है। इस उद्देश्‍य को सूचना, विशेषज्ञता और क्षमता निर्माण के आदान-प्रदान के जरिए पूरा किया जाएगा। समझौते के जरिए आतंकवादी वित्‍त पोषण ढांचे को समाप्‍त करने के कदमों सहित राष्‍ट्रों के बीच नशीले पदार्थों की तस्‍करी को रोकने त‍था प्रभावशाली संस्‍थागत आदान-प्रदान की स्‍थापना भी की जाएगी।


(●) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संघ लोक सेवा आयोग और मॉरिशस के लोक सेवा आयोग के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संघ लोक सेवा आयोग और मॉरिशस के लोक सेवा आयोग के बीच समझौता-ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर करने को मंजूरी दी है।

समझौता-ज्ञापन से संघ लोक सेवा आयोग और मॉरिशस के लोक सेवा आयोग के बीच मौजूदा रिश्‍ते को मजबूती मिलेगी। इससे भर्ती क्षेत्र में दोनों पक्षों के अनुभवों और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान में सुविधा होगी।

समझौता-ज्ञापन से दोनों देशों के लोक सेवा आयोगों के बीच संस्‍थागत संपर्क विकसित होगा। इससे मॉरिशस के लोकसेवा आयोग और संघ लोक सेवा आयोग के बीच सहयोग के दायरे को परिभाषित किया जाएगा। इसके तहत दोनों पक्षों के सहयोग के क्षेत्रों और दायित्‍वों को तय करने में मदद मिलेगी। सहयोग के क्षेत्र निम्‍नलिखित हैं:

लोक सेवा भर्ती और चयन के आधुनिक तरीकों वाले अनुभवों का आदान-प्रदान, खासतौर से संघ लोक सेवा आयोग और लोक सेवा आयोग के कामकाज के संदर्भ में।

पुस्‍तक, मैनुअल और अन्‍य दस्‍तावेज, जो गोपनीय प्रकृति के नहीं है, उनके सहित सूचना और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान।

लिखित परीक्षा की तैयारी में सूचना प्रोद्योगिकी के इस्‍तेमाल, कम्‍प्‍यूटर आधारित भर्ती जांच और ऑनलाइन परीक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञता का आदान-प्रदान।

आवेदनों की शीघ्र जांच और निपटारे के लिए एकल खिड़की प्रणाली के अनुभवों का आदान-प्रदान।

सामान्‍य प्रकृति की परीक्षा प्रणाली के संबंध में विभिन्‍न प्रक्रियाओं के अनुभव और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान।

अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन। इसमें वे अधिकारी भी शामिल होंगे जो दोनों पक्षों के सचिवालय/मुख्‍यालयों से अल्‍पकाल के लिए जुड़े होंगे। यह दोनों पक्षों के अधिकारों के तहत आने वाले विषयों से संबंधित होगा।

प्रदत्‍तअधिकारों के तहत विभिन्‍न सरकारी एजेंसियां जिन पदों पर भर्ती करती हैं, उसके मद्देनजर प्रक्रियों के संबंध में अपनाई जाने वाले प्रणालियों के अनुभवों का आदान-प्रदान।

पृष्ठभूमि:

पूर्व में संघ लोक सेवा आयोग ने कनाडा और भूटान के लोक सेवा आयोगों के साथ समझौता-ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए थे। कनाडा के साथ समझौता 15.03.2011 से 14.03.2014 के दौरान अस्तित्‍व में रहा। भूटान के शाही लोक सेवा आयोग (आरसीएससी) के साथ 10 नवंबर, 2005 को तीन वर्ष की अवधि के लिए संघ लोक सेवा आयोग ने समझौता-ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए थे। इसका 09 सितंबर, 2011 को अगले तीन वर्षों के लिए नवीनीकरण किया गया था, जो 08 सितंबर, 2014 को समाप्‍त हो गया। इस समझौता-ज्ञापन के तहत आरसीएससी, भूटान के अधिकारियों के अटैचमेन्‍ट और उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया था। हाल में संघ लोक सेवा आयोग और आरसीएससी, भूटान के बीच तीसरी बार तीन वर्षों के लिए 29.05.2017 को समझौता-ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए गए।


(●) मंत्रिमंडल ने मध्‍यस्‍थताऔर सुलह (संशोधन) विधयेक, 2018 को स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मध्‍यस्‍थता और सुलह (संशोधन) विधयेक, 2018 को लोकसभा में पेश करने की स्‍वीकृति दे दी है। यह विवादों के समाधान के लिए संस्‍थागत मध्‍यस्‍थता को प्रोत्‍साहित करने के सरकार के प्रयास का हिस्‍सा है और यह भारत को मजबूत वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) व्‍यवस्‍था का केंद्र बनाता है।

लाभ:

1996 के अधिनियम में संशोधन से मानक तय करने, मध्‍यस्‍थता प्रक्रिया को पक्षकार सहज बनाने और मामले को समय से निष्‍पादित करने के लिए एक स्‍वतंत्र संस्‍था स्‍थापित करके संस्‍थागत मध्‍यस्‍थता में सुधार का लक्ष्‍य प्राप्‍त करने में सहायता मिलेगी।

प्रमुख विशेषताएं:

यह उच्‍चतम न्‍यायालय और उच्‍च न्‍यायालय द्वारा निर्दिष्‍ट मध्‍यस्‍थता संस्‍थानों के माध्‍यम से मध्‍यस्‍थों की तेजी से नियुक्ति में सहायक है, इस संबंध में न्‍यायालय से संपर्क की आवश्‍यकता के बिना। विधेयक में यह व्‍यवस्‍था है कि संबंधित पक्ष अंतरराष्‍ट्रीय वाणिज्यिक मध्‍यस्‍थताके लिए और संबंधित उच्‍च न्‍यायालयों के अन्‍य मामलों में उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा निर्दिष्‍ट मध्‍यस्‍थता संस्‍थानों से सीधा संपर्क कर सकते है।
इस संशोधन में एक स्‍वतंत्र संस्‍था भारत की मध्‍यस्‍थता परिषद (एसीआई) बनाने का प्रावधान है। यह संस्‍था मध्‍यस्‍थता करने वालों संस्‍थानों को ग्रेड देगी और नियम तय करके मध्‍यस्‍थता करने वालों को मान्‍यता प्रदान करेगी और वैसे सभी कदम उठाएगी जो मध्‍यस्‍थता, सुलह तथा अन्‍य वैकिल्‍पक समाधान व्‍यवस्‍था को बढ़ावा देंगे और संस्‍था इस उद्देश्‍य के लिए मध्‍यस्‍थतातथा वैकल्पिक विवाद समाधान व्‍यवस्‍था से जुड़े सभी मामलों में पेशेवर मानकों को बनाने के लिए नीति और दिशा निर्देश तय करेगी। यह परिषद सभी मध्‍यस्‍थता वाले निर्णयों का इलेक्‍ट्रोनिक डिपोजिटरी रखेगी।
एसीआई निकाय निगम होगी। एसीआई के अध्‍यक्ष वह व्‍यक्ति होगा जो उच्‍चतम न्‍यायालय का न्‍यायाधीश रहा हो या किसी उच्‍च न्‍यायालय का मुख्‍य न्‍यायाधीश और न्‍यायाधीश रहा हो। अन्‍य सदस्‍यों में सरकारी नामित लोगों के अतिरिक्‍त जाने-माने शिक्षाविद आदि शामिल किए जाएंगे।
विधेयक समय-सीमा से अंतरराष्‍ट्रीय मध्‍यस्‍थताको अलग करके तथा अन्‍य मध्‍यस्‍थताओं में निर्णय के लिए समय-सीमा विभिन्‍न पक्षों की दलीलें पूरी होने के 12 महीनों के अंदर करके सेक्‍शन 29ए के उप-सेक्‍शन (1) में संशोधन का प्रस्‍ताव है।
इसमें नया सेक्‍शन 42ए जोड़ने का प्रस्‍ताव है ताकि मध्‍यस्‍थता करने वाला व्‍यक्ति या मध्‍यस्‍थता संस्‍थान निर्णय के सिवाय मध्‍यस्‍थतासे जुड़ी कार्यवाहियों की गोपनीयता बनाए रखेंगें। नया सेक्‍शन 42बी मध्‍यस्‍थता करने वाले को मध्‍यस्‍थता सुनवाई के दौरान उसके किसी कदम या भूल को लेकर मुकदमा या कानूनी कार्यवाही से सुरक्षा प्रदान करता है।
एक नया सेक्‍शन 87 जोड़ने का प्रस्‍ताव है जो स्‍पष्‍ट करेगा कि जब तक विभिन्‍न पक्ष सहमत नहीं होते संशोधन अधिनियम 2015 में - (ए) 2015 के संशोधन अधिनियम प्रारंभ होने से पहले शुरू हुई मध्‍यस्‍थता की कार्यवाही के मामले में (बी) संशोधन अधिनियम 2015 के प्रारंभ होने के पहले या ऐसी अदालती कार्यवाही शुरू होने के बावजूद मध्‍यस्‍थता प्रक्रिया के संबंध में चालू होने वाली अदालती कार्यवाहियों में लागू नहीं होगा तथा यह सेक्‍शन संशोधन अधिनियम 2015 के प्रारंभ होने या बाद की मध्‍यस्‍थता कार्यवाहियों में लागू होगा और ऐसी मध्‍यस्‍थता कार्यवाहियों से उपजी अदालती कार्यवाहियों के मामले में लागू होगा।

पृष्‍ठभूमि:

मध्‍यस्‍थता प्रक्रिया को सहज बनाने, लागत सक्षम बनाने और मामले के शीघ्र निष्‍पादन और मध्‍यस्‍थता करने वाले की तटस्‍थता सुनिश्चित करने के लिए मध्‍यस्‍थताऔर सुलह अधिनियम, 1996 में मध्‍यस्‍थताऔर सुलह (संशोधन) अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधन किया गया। लेकिन तदर्थ मध्‍यस्‍थता के स्‍थान पर संस्‍थागत मध्‍यस्‍थता को प्रोत्‍साहित करने और मध्‍यस्‍थता तथा सुलह (संशोधन) अधिनियम, 2015 को लागू करने में आ रही कुछ व्‍यावहारिक कठिनाईयों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारत के उच्‍चतम न्‍यायालय के सेवानिवृत्‍त न्‍यायाधीश, न्‍यायमूर्ति बी.एच. श्रीकृष्‍ण की अध्‍यक्षता में एक उच्‍च स्‍तरीय समिति (एचएलसी) बनाई गई। एचएलसी को निम्‍नलिखित कार्य दिए गए:-

भारत में मध्‍यस्‍थ संस्‍थानों के कामकाज और उनके कार्य प्रदर्शन का अध्‍ययन करके वर्तमान मध्‍यस्‍थता व्‍यवस्‍था केप्रभाव की जांच करना।
भारत में संस्‍थागतमध्‍यस्‍थताव्‍यवस्‍था को प्रोत्‍साहित करने के लिए रौडमैप तैयार करना।
वाणिज्यिक विवाद समाधान के लिए कारगर और सक्षम मध्‍यस्‍थताप्रणाली विकसित करना और कानून में सुझाए गए सुधारों पर रिपोर्ट प्रस्‍तुत करना।

उच्‍चस्‍तरीय समिति ने 30 जुलाई, 2017 को अपनी रिपोर्ट पेश की। समिति नेमध्‍यस्‍थता और सुलह अधिनियम, 1996 में संशोधन की सिफारिश की है। प्रस्‍तावित संशोधन उच्‍चस्‍तरीय समिति की सिफारिशों के अनुसार है।


(●) मंत्रिमंडल ने व्‍यावसायिक अदालतों, व्‍यावसायिक डिवीजन और उच्‍च न्‍यायालयों के व्‍यावसायिक डिवीजन (संशोधन) विधेयक 2018 को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में पेश करने के लिए व्‍यावसायिक अदालतों, व्‍यावसायिक डिवीजन और उच्‍च न्‍यायालयों की व्‍यावसायिक डिवीजन (संशोधन) विधेयक 2018 को मंजूरी दे दी है।

विधेयक में निम्‍नलिखिल लक्ष्‍यों को हासिल करने की व्‍यवस्‍था की गई है:

विधेयक में व्‍यावसायिक विवाद के निर्दिष्‍ट मूल्‍य को वर्तमान एक करोड़ रूपये से कम करके तीन लाख रूपये कर दिया गया है : अत: तर्कसंगत मूल्‍य के व्‍यावसायिक विवादों का निपटारा व्‍यावसायिक अदालतों द्वारा किया जा सकता है। इससे कम मूल्‍य के व्‍यावसायिक विवादों के समाधान में लगने वाले समय (वर्तमान में 1445 दिन) को कम किया जा सकेगा और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत की रैंकिंग को सुधारा जा सकेगा।
संशोधन में उन क्षेत्रों के लिए जिला न्‍यायाधीश के स्‍तर पर व्‍यावसायिक अदालतों की स्‍थापना की व्‍यवस्‍था की गई है, जिन पर सम्‍बद्ध उच्‍च न्‍यायालयों में मूलरूप से सामान्‍य दीवानी न्‍याय का अधिकार है जैसे चेन्‍नई, दिल्‍ली, कोलकाता, मुंबई और हिमाचल प्रदेश राज्‍य में। ऐसे क्षेत्रों में राज्‍य सरकारें अधिसूचना के जरिये जिला स्‍तर पर निर्णय दिये जाने वाले व्‍यावसायिक विवादों के आर्थिक मूल्‍य निर्दिष्‍ट कर सकती हैं, जो तीन लाख रुपये से कम और जिला अदालत के धन संबंधी मूल्‍य से अधिक नहीं हो। मूल रूप से सामान्‍य अधिकार क्षेत्र का इस्‍तेमाल करने के अलावा उच्‍च न्‍यायालयों के अधिकार क्षेत्र में जिला न्‍यायाधीश के स्‍तर से कम व्‍यावसायिक अदालतों द्वारा निपटाए गए व्‍यावसायिक विवादों में अपील का एक मंच जिला न्‍यायाधीश स्‍तर पर व्‍यावसायिक अपीलीय अदालतों के रूप में प्रदान किया जाएगा।
ऐसे मामलों में जहां तुरंत, अंतरिम राहत राहत पर विचार नहीं किया गया है, वहां संस्‍थान पूर्व मध्‍यस्‍थता प्रक्रिया की शुरूआत करके सम्‍बद्ध पक्षों को विधि सेवा प्राधिकार कानून 1987 के अंतर्गत गठित प्राधिकारों के जरिये अदालतों के दायरे से बाहर व्‍यावसायिक विवादों का निपटारा करने का अवसर मिलेगा। इससे व्‍यावसायिक विवादों के निपटारे में निवेशकों का विश्‍वास बहाल करने में भी मदद मिलेगी।
नये अनुच्‍छेद 21-ए को शामिल करने से केंद्र सरकार पीआईएम के लिए नियम और प्रक्रियाएं तैयार कर सकेगी।
संशोधन को भावी प्रभाव देने के लिए ताकि न्‍यायिक कानून के प्रावधानों के अनुसार मौजूदा प्रावधान के अनुसार वर्तमान में व्‍यावसायिक विवादों के निर्णय देने वाले न्‍यायिक मंचों के अधिकार क्षेत्र में कोई बाधा न पड़े।

पृष्‍ठभूमि

तेजी से हो रहे आर्थिक विकास के साथ व्‍यावसायिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ी हैं और साथ ही घरेलू और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर व्‍यावसायिक विवादों में तेजी से वृद्धि हुई है। प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और विदेशों से व्‍यावसायिक लेन-देन में वृद्धि से व्‍यावसायिक विवादों की संख्‍या में पर्याप्‍त वृद्धि हुई है।

व्‍यावसायिक विवादों से जुड़े मामलों के तेजी से निपटारे को ध्‍यान में रखते हुए और खासतौर से विदेशी निवेशकों के बीच भारतीय विधि प्रणाली की स्‍वतंत्र और उत्‍तरदायी सकारात्‍मक छवि बनाने के लिए, व्‍यावसायिक अदालतों, व्‍यावसायिक डिविजन और उच्‍च न्‍यायालयों के व्‍यावसायिक अपीलीय डिविजन कानून 2015 अमल में लाया गया था और सभी न्‍यायिक क्षेत्रों में जिला स्‍तरों पर व्‍यावसायिक अदालतें स्‍थापित की गई। केवल उन क्षेत्रों को छोड़ दिया गया, जहां उच्‍च न्‍यायालयों के पास मूल रूप से सामान्‍य दीवानी निर्णय देने का अधिकार था। ये पांच उच्‍च न्‍यायालय हैं बम्‍बई, दिल्‍ली, कलकत्‍ता, मद्रासऔर हिमाचल प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय क्रमश: मुंबई, दिल्‍ली, कोलकाता, चेन्‍नई शहरों और हिमाचल प्रदेश राज्‍य के क्षेत्रों के संबंध में मूल रूप से सामान्‍य दीवानी न्‍यायिक अधिकार क्षेत्र का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। इन उच्‍च न्‍यायालयों के ऐसे क्षेत्रों में खंड-3 के उपखंड (1) के प्रावधान के अनुसार इन उच्‍च न्‍यायालयों में जिला स्‍तर पर कोई व्‍यावसायिक अदालतें नहीं हैं और इसके स्‍थान पर प्रत्‍येक उच्‍च न्‍यायालय में व्‍यावसायिक डिवीजन का गठन किया गया है। ऐसे व्‍यावसायिक विवादों के निर्दिष्‍ट मूल्‍य का निपटारा व्‍यावसायिक अदालतों अथवा उच्‍च न्‍यायालय की व्‍यावसायिक डिविजन द्वारा किया जाएगा, जैसा भी हो जिनका मूल्‍य इस समय एक करोड़ रुपये है।

ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस विश्‍व बैंक का एक सूचकांक है, जिसका सम्‍बन्‍ध अन्‍य बातों के अलावा किसी देश में विवाद निपटारे का माहौल बनाने से है, जो किसी व्‍यवसाय को स्‍थापित करने और उसको चलाने के लिए निवेशक तय करने के कार्य को सरल बनाता है। यह सूचकांक विश्‍व बैंक के समूह द्वारा तैयार किया गया है और 2002 से इसने दुनिया के लगभग सभी देशों का मूल्‍यांकन किया है। ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस की उच्‍च रैंकिंग का अर्थ है कि व्‍यवसाय को शुरू करने और उसे चलाने के लिए नियंत्रण माहौल अधिक अनुकूल है। 31 अक्‍तूबर, 2017 को विश्‍व बैंक ने अपनी नवीनतम वार्षिक इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट वर्ष 2018 के लिए जारी की, जिसमें भारत शीर्ष के उन 10 उन्‍नतिशील देशों में से एक के रूप में उभरकर सामने आया है और पहली बार भारत 30 स्‍थानों को पार करके 190 देशों में से इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में 100वें रैंक के देश के रूप में पहुंचा है। इससे यह साबित होता है कि सभी मोर्चों पर इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए नियमित ढांचे में भारत सर्वश्रेष्‍ठ प्रक्रियाओं को तेजी से अपना रहा है।


(●) मंत्रिमंडल ने ‘‘अकादमिक योग्‍यता की पारस्‍परिक मान्‍यता’ के संदर्भ में भारत और फ्रांस के बीच एक समझौते पर हस्‍ताक्षर को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘‘अकादमिक योग्‍यता की पारस्‍परिक मान्‍यता’’ के संदर्भ में और दोनों देशों में स्‍वीकृत, मान्‍यता प्राप्‍त शैक्षणिक संस्‍थानों में छात्रों के अध्‍ययन की अवधि के लिए भारत और फ्रांस के बीच एक समझौते पर हस्‍ताक्षर को मंजूरी दे दी है। समझौते पर फ्रांस के राष्‍ट्रपति की आगामी भारत यात्रा के दौरान हस्‍ताक्षर होने की उम्‍मीद है।

समझौते पर हस्‍ताक्षर से भारत और फ्रांस के बीच शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और लंबे समय तक दोनों देशों के बीच शैक्षिक सम्‍बन्‍धों को बढ़ावा मिलेगा। समझौता दोनों देशों के छात्रों को एक दूसरे के यहां आने-जाने के लिए प्रोत्‍साहित करने में सहायक सिद्ध होगा और छात्र दूसरे देश में अध्‍ययन जारी रखने की संभावनाएं तलाश सकेंगे। इससे नई साझेदारी/सहयोगों तथा अनुसंधान गतिविधियों के जरिए उच्‍च शिक्षा के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍टता को बढ़ावा मिलेगा जिससे भारत में शिक्षा की गुणवत्‍ता में सुधार होगा।


(●) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पर्यावरण के क्षेत्र में भारत और फ्रांस के बीच सहयोग-समझौता को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पर्यावरण के क्षेत्र में भारत और फ्रांस के बीच सहयोग-समझौता को मंजूरी दी है।

इस सहयोग-समझौते से दोनों देशों के बीच पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए नजदीकी और दीर्घकालीन सहयोग को प्रोत्‍साहन देने में मदद मिलेगी। इसके तहत बराबरी, पारस्‍परिक सहयोग और आपसी लाभ के मद्देनजर दोनों देशों के वैधानिक कानूनों के आधार पर सहयोग होगा।

उम्‍मीद की जाती है कि सहयोग-समझौते से बेहतर पर्यावरण सुरक्षा, बे‍हतर संरक्षण, जलवायु परिवर्तन का बेहतर प्रबंधन और वन्‍यजीव सुरक्षा/संरक्षण के लिए आधुनिक प्रोद्योगिकियों और उत्‍कृष्‍ट व्‍यवहारों के क्षेत्र में सहायता मिलेगी।


(●) मंत्रिमंडल ने भारत और फ्रांस के बीच प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते पर हस्‍ताक्षर को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और फ्रांस के बीच प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते पर हस्‍ताक्षर को मंजूरी दे दी है। समझौते पर फ्रांस के राष्‍ट्रपति की आगामी भारत यात्रा के दौरान हस्‍ताक्षर होने की उम्‍मीद है।

समझौता दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने, छात्रों, शिक्षाविदों, अनुसंधानकर्ताओं और कौशल प्राप्‍त व्‍यावसायियों की आवाजाही बढ़ाने तथा दोनों पक्षों के बीच अवैध प्रवासन तथा मानव तस्‍करी से जुड़े मुद्दों पर सहयोग मजबूत करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण मील का पत्‍थर साबित होगा। यह समझौता फ्रांस के साथ भारत के तेजी से बढ़ते संबंधों का गवाह है और दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विश्‍वास और आत्‍मविश्‍वास का प्रतीक है।

समझौता आरंभ में सात वर्ष की अवधि के लिए वैध होगा। समझौते में इसके स्‍वत: नवीकरण और एक संयुक्‍त कार्य दल के जरिये निगरानी तंत्र के प्रावधान को शमिल किया गया है।

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