खबरें विशेष : संसद से जनता-जनार्दन तक



नई दिल्ली, 06 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) पिछले पांच वर्षों में होम्‍योपैथी चिकित्‍सा का लाभ लेने वाले मरीजों की संख्‍या में पचास प्रतिशत की वृद्धि : श्रीपद नाइक

होम्‍योपैथी कोई छद्म विज्ञान नहीं है। प्राचीन होम्‍योपैथी चिकित्‍सा पद्धति के विषद अध्‍ययनों की समीक्षाओं में पाया गया है कि इसका सकारात्‍मक प्रभाव मात्र प्रायोगिक स्‍तर पर ही नहीं बल्कि इससे से भी कहीं बहुत ज्‍यादा है। सभी तरह की स्थितियों में होम्‍योपैथी के प्रभाव का अध्‍ययन करने के लिए चार सुनियोजित समीक्षाएं अंतर्राष्‍ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हुई हैं। इनमें से सैकड़ों नैदानिक परीक्षणों पर आधारित तीन समीक्षाओं में यह साबित हुआ है कि होम्‍योपैथी नैदा‍निक रूप से बेहद प्रभावी है। अत्‍यधिक घुलनीय अवस्‍था वाली होम्‍योपैथी दवाओं के शोध की समीक्षाओं में इनकी 70 फीसदी प्रतिकृतियां सकारात्‍मक पायी गई हैं।

होम्‍यापैथी को इसलिए बढ़ावा दिया जा रहा है क्‍योंकि यह बेहद सुरक्षित और प्रभावी होने के साथ इसकी सर्वग्राह्यता भी बहुत ज्‍यादा है। भारत में केन्‍द्रीय होम्‍योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएच) के तहत 23 संस्‍थांए और इकाईयां हैं जहां होम्‍योपैथी चिकित्‍सा का लाभ उठाने वाले मरीजों की संख्‍या में पिछले पांच सालों मे पचास प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

इस बात के प्रमाण हैं कि होम्‍योपैथी केवल प्रायोगिक औषधि भर नहीं है बल्‍क‍ि अत्‍यंत लाभकारी भी है। ‘साइंटिफिक फ्रेमवर्क ऑफ होम्‍योपैथी – एवीडेंस बेस्‍ड होम्‍योपैथी’ में होम्‍योपै‍थी दवाओं पर दुनिया भर में किए गए शोध प्रकाशित किए गए है। इसी तरह ‘होम्‍योपैथी – साइंस ऑफ जेंटल हीलिंग’ में भारत में होम्‍योपैथी दवाओं पर किए गए सैकड़ों वैज्ञानिक परीक्षण और मूल शोधों ने इन दवाओं के लाभकारी होने के मजबूत प्रमाण पेश किए है। सीसीआरएएच के पास मौजूद प्रमाणिक आंकड़े भारत में होम्‍योपैथी को बढ़ावा देने और इसकी सर्वग्राह्यता बढ़ाने पर बल देते है।

यह जानकारी केंद्रीय आयुष राज्‍यमंत्री श्रीपद येसो नाइक ने आज राज्‍यसभा में एक लिखित प्रश्‍न के उत्‍तर में दी।


(●) राष्ट्रीय सड़क प्रकाश कार्यक्रम के तहत अभी तक 49 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई गईं

राष्ट्रीय सड़क प्रकाश कार्यक्रम (एसएलएनपी) के तहत अभी तक 28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 49 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई जा चुकी हैं। इस कार्यक्रम की शुरूआत 5 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी जिसका उद्देश्य मार्च 2019 तक 1.34 करोड़ पारंपरिक स्ट्रीट लाइट के स्थान पर ऊर्जा कुशल एलईडी लाइट लगाना है। एसएलएनपी को ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा लागू किया जा रहा है, जो ऊर्जा मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की एक संयुक्त उद्यम कंपनी है।

ईईएसएल ने हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में एलईडी स्ट्रीट लाइट परियोजनाओं को लागू करने संबधी मामलों का अध्ययन किया है। अभी तक एसएलएनपी के क्रियान्वयन में कोई विशेष समस्या उत्पन्न नहीं हुई है।

केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आर• के• सिंह ने आज एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी राज्यसभा में दी।


(●) 10 लाख सोलर स्टडी लैंप्स योजना को सफलतापूर्वक लागू किया गया

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा दिसंबर, 2016 में असम, बिहार, झारखंड, ओडिशा और उत्तर प्रदेशों में 70 लाख सोलर स्टडी लैंप्स के वितरण की नई योजना को मंजूरी दी गयी थी, जो अभी कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के वंचित समुदायों को सशक्त बनाने के लिए जनवरी 2014 में 10 लाख सोलर स्टडी लैंप्स योजना को मंजूरी दी गई थी जिसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इसके बाद मंत्रालय ने मई 2016 में विभिन्न राज्यों में 5 लाख सोलर स्टडी लैंप्स को मंजूरी दी थी।

राजस्थान में कुल 3.06 लाख सोलर स्टडी लैंप्स वितरित किए गए हैं और 360 महिलाओं सहित 927 व्यक्तियों को स्थानीय क्षेत्रों में सोलर स्टडी लैंप्स की मरम्मत के लिए प्रशिक्षित किया गया है। सौर ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना और मरम्मत तथा रखरखाव के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा एक अलग कौशल विकास कार्यक्रम "सूर्य मित्र" का भी संचालन किया जा रहा है।

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आर• के• सिंह ने आज एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी राज्यसभा में दी।


(●) सामाजिक न्‍याय परिदृश्‍य

सामाजिक न्‍याय के उद्देश्‍यों की प्राप्ति के लिए संसद द्वारा पारित दो अधिनियम अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है। पहला अधिनियम है- नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम (पीसीआर), 1955 । इसके माध्‍यम से किसी भी रूप में अस्‍पृश्‍यता का आचरण करने वाले को दंड देने का प्रावधान है। दूसरा अधिनियम है- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्‍याचार का निषेध, पीओए) अधिनियम 1989 । इसका उद्देश्‍य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों पर होने वाली क्रूरता से उन्‍हें सुरक्षित करना है। दोनों अधिनियमों के प्रावधानों को समुचित ढंग से लागू करने के लिए राज्‍य सरकारों तथा केन्‍द्र शासित प्रदेशों को केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के लिए केन्‍द्रीय सहायता उपलब्‍ध कराई जाती है। 2016-17 तथा 2017-18 के दौरान उक्‍त योजना में आवंटित धनराशि और इसका उपयोग निम्‍न हैं:-

(रुपये करोड़ों में)

वर्ष
आवंटन बजट अनुमान
आवंटन संशोधित अनुमान
आवंटन का उपयोग (राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों को जारी की गई केन्‍द्रीय सहायता )

2016-17
150.00
228.49
222.56

2017-18
300.00
305.17
294.38 (01.03.2018 तक)

पीओए अधिनियम तथा नियमों में 2016 में संशोधन किया गया था। इससे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को बेहतर सामाजिक न्‍याय मिला है। अत्‍याचार और क्रूरता से पीडि़त लोगों को मिलने वाली सहायता राशि में भी वृद्धि हुई है।

उक्‍त जानकारी केन्‍द्रीय सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता राज्‍य मंत्री रामदास अठावले ने आज लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्तर में दी।


(●) उर्वरक सब्सिडी के लिए देश भर में डीबीटी प्रणाली लागू किए जाने के दौरान आयोजित 4630 प्रशिक्षण सत्रों में लगभग 1.8 लाख खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को संवेदी बनाया गया

• डीबीटी प्रणाली की प्रक्रिया औपचारिकताओं के कारण सब्सिडी लागत पर उर्वरकों के वितरण में बाधा नही : राव इंद्रजीत सिंह

• आधार कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड या मतदाता पहचान पत्र प्रस्तुत करने पर लाभार्थी को सब्सिडी दर पर उर्वरक बिक्री की जा रही है

नियोजन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और रसायन तथा उर्वरक राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने आज लोकसभा में देश में उर्वरक वितरण में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली लागू करने की प्रगति के बारे में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सरकार ने सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से उर्वरक सब्सिडी देने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली लागू की है। उर्वरक डीबीटी प्रणाली के अंतर्गत खुदरा विक्रेताओं द्वारा लाभार्थियों को की गई वास्तविक बिक्री के आधार पर विभिन्न श्रेणियों के उर्वरकों पर उर्वरक कंपनियों को 100 प्रतिशत सब्सिडी जारी की जाएगी/जारी की जा रही है।

राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि किसानों/खरीदारों को सब्सिडी दर पर सभी उर्वरक खुदरा दुकानों पर लगे प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) उपकरण के माध्यम से दिए जा रहे हैं और लाभार्थियों की पहचान आधार कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, मतदाता पहचान पत्र आदि से की जा रही है। उन्होंने कहा कि डीबीटी योजना लागू करने में प्रत्येक खुदरा विक्रेता के यहां पीओएस उपकरण होना तथा पीओएस उपकरण संचालन के लिए खुदरा और थोक विक्रेताओं का प्रशिक्षण आवश्यक है।

श्री सिंह ने बताया कि पूरे देश में प्रमुख उर्वरक आपूर्तिकर्ता (एलएफएस) ने देश भर में डीबीटी लागू करने के पहले पीओएस तैनाती के हिस्से के रूप में 4630 प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए। एलएफसी द्वारा आयोजित प्रारंभिक प्रशिक्षण सत्र के दौरान लगभग 1.8 लाख खुदरा विक्रेताओं को संवेदी बनाया गया। डीबीटी को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का विवरण इस प्रकार हैः

क्रम संख्या
राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के नाम
प्रारंभ होने का समय

1
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली
1 सितंबर, 2017

2
मिजोरम, दमन और दीव, दादरा-नगर हवेली, मणिपुर, नगालैंड, गोवा, पुद्दुचेरी
1 अक्टूबर, 2017

3
राजस्थान, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, अंडमान और निकोबार दीप समूह, असम, त्रिपुरा
1 नंवबर, 2017

4
आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश
1 दिसंबर, 2017

5
केरल, बिहार, कर्नाटक, झारखंड, तेलंगाना तथा तमिलनाडु
1 जनवरी, 2018

6
उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा हिमाचल प्रदेश
1 फरवरी, 2018

7
जम्मू तथा कश्मीर
1 मार्च, 2018

डीबीटी प्रणाली में प्रक्रिया संबंधी (आधार) औपचारिकताओं के कारण कुछ राज्यों में उर्वरकों के समय से वितरण न होने की धारणाओं को गलत बताते हुए श्री सिंह ने कहा कि प्रत्येक खुदरा दुकान में लगे पीओएस उपकरण के माध्यम से किसानों और खरीदारों को सब्सिडी दर पर उर्वरकों की बिक्री की जा रही है और लाभार्थियों की पहचान आधार कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, मतदाता पहचान पत्र आदि के माध्यम से की जा रही है। यदि किसी लाभार्थी के पास आधार कार्ड नहीं है तो आधार नामांकन संख्या के साथ किसान क्रेडिट कार्ड या मतदाता पहचान पत्र प्रस्तुत करने पर उसे सब्सिडी लागत पर उर्वरक की बिक्री की जा रही है।

उर्वरक सब्सिडी किसानों को सीधे देने के लिए डीबीटी प्रणाली लागू करने की संभावना के बारे में श्री सिंह ने कहा कि डीबीटी योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को खुदरा विक्रेता द्वारा की गई बिक्री के बाद सब्सिडी लाभार्थियों के स्थान पर उर्वरक कंपनियों को जारी की जाएगी।

अभी एलपीजी की तरह लाभार्थियों को सब्सिडी का प्रत्यक्ष अंतरण उर्वरक क्षेत्र में नहीं किया जा सकता, क्योंकि लाभार्थियों और उनके हक स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं। सब्सिडी वाले विभिन्न उत्पाद, यूरिया तथा फास्फेटिक तथा पोटाश वाले 21 प्रकार के उर्वरकों की सब्सिडी दरें अलग-अलग हैं। विभिन्न उत्पादन प्रक्रिया, संयंत्रों की ऊर्जा सक्षमता, सफलता आदि के कारण यूरिया के मामले में सब्सिडी एक कंपनी से दूसरी कंपनी में अलग होती है। कुछ उर्वरकों विशेषकर यूरिया में न्यूनतम खुदरा मूल्य से दोगुनी सब्सिडी होती है।

श्री सिंह ने बताया कि इस विषय पर गहराई से विश्लेषण के लिए नीति आयोग ने हाल में एक समिति बनाई है, जो एक मॉडल की सिफारिश करेगी, जिसका इस्तेमाल किसानों को सब्सिडी के प्रत्यक्ष अंतरण में किया जाएगा।


(●) यूरिया बनाने वाली सभी केन्द्रीय सार्वजनिक कंपनियों ने वित्त वर्ष 2016-17 में लाभ दर्ज किया : राव इंद्रजीत सिंह

नियोजन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और रसायन तथा उर्वरक राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने आज लोकसभा में वर्तमान यूरिया नीति के कारण संचालन वित्तीय नुकसान का सामना कर रही यूरिया उत्पादन इकाईयों के ब्यौरे के बारे में बताया कि यूरिया बनाने वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठानों ने वित्त वर्ष 2016-17 में संचालन लाभ (यानी ब्याज भुगतान और अवमूल्यन से पहले) दर्ज किए हैं। उन्होंने बताया कि निजी तथा सहकारी यूरिया उत्पादकों के लिए उर्वरक विभाग ऐसा कोई डाटा नहीं रखता।

केन्द्र की सभी यूरिया उत्पादक इकाईयों के लाभ नीचे तालिका में हैं:

क्रम संख्या
यूरिया बनाने वाले सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के नाम
2016-17 के दौरान संचालन लाभ (करोड़ रुपये में)

1.
राष्ट्रीय रसायन और उर्वरक लिमिटेड
234.94

2.
राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड
190.97

3.
मद्रास उर्वरक लिमिटेड
69.22

4.
ब्रह्मपुत्र वैली उर्वरक निगम लिमिटेड
7.49

(2016-17 के दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ)


(●) प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से 2019-20 तक 20 लाख किसानों के लाभान्वित होने तथा 5,30,500 रोजगार सृजित होने की संभावना

सरकार की ओर से 2016-20 की अवधि के लिए 6,000 करोड़ रूपये के आंबटन के साथ क्रियान्वित की जा रही प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना चौदहवें वित्‍त आयोग की अवधि समाप्‍त होने तक चलेगी। इस योजना से 2019-20 तक 20 लाख किसानों के लाभान्वित होने तथा प्रत्‍यक्ष और परोक्ष रूप से 5,30,500 रोजगार सृजित होने की संभावना है। यह जानकारी केंद्रीय खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग राज्‍यमंत्री साध्‍वी निरंजन ज्‍योति ने आज लोकसभा में एक लिखित प्रश्‍न के उत्‍तर में दी। मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत उनका मंत्रालय खाद्य प्रसंस्‍करण के क्षेत्र में कई केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं क्रियान्वित कर रहा है। यह योजनाएं इस प्रकार है :

I. मेगा फूड पार्क (जारी)

II. एकीकृत प्रशीतन श्रृंखला और मूल्‍य संवर्धन अवसंरचना (जारी)

III. खाद्य प्रसंस्‍करण और संरक्षण क्षमताओं का निर्माण और विस्‍तार (नया)

IV. कृषि उत्‍पाद प्रसंस्‍करण क्‍लस्‍टरों के लिए बुनियादी ढांचा (नया)

V. खाद्य सुरक्षा और गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के लिए अवसंरचना विकास (जारी)

VI. मानव संसाधन और संस्‍थाएं (जारी)

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत खाद्य प्रसंस्‍करण क्षेत्र में चलाई गई प्रमुख योजनाओं की उपलब्धियों का ब्‍यौरा :-

योजना का नाम
योजनाओं की संख्‍या कुल
योजनाओं की संख्‍यापूरी हो चुकी/संचालित
योजनाओं की संख्‍या जारी

मेगा फूड पार्क
42
10
32

एकीकृत प्रशीतन श्रृंखला और मूल्‍य संवर्धन अवसंरचना
238
114
124

खाद्य पदार्थों की जांच के लिए प्रयोगशालाएं खोलने/उन्‍नयन
109
72
37


(●) सीमा निगरानी के प्रति समर्पित सैटेलाइट बैंडविड्थ

विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के लिए 5 अलग-अलग वायु तंरगों पर समर्पित बैंडविड्थ का प्रस्ताव है। इस संबंध में, सैन्य इलेक्ट्रानिक्स अनुप्रयोग प्रयोगशाला (डीईएएल), देहरादून और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा उक्त आवश्यकताओं के अनुरूप सेट तैयार किए जा रहे हैं।

गृह मंत्रालय (एमएचए) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सदस्यों के साथ संयुक्त सचिव (सीमा प्रबंधन) की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया। इसका उद्देश्य प्रभावी सीमा प्रबंधन और निगरानी के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से संबंधित उपकरणों के आवेदन के लिए क्षेत्रों की पहचान करना है। टास्क फोर्स की रिपोर्ट 8.9.2017 को सचिव (अंतरिक्ष) और इसरो के अध्यक्ष को प्रस्तुत की गई।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेण रिजीजू ने आज एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी लोकसभा में दी।


(●) पीएचएफआई को विदेश से धनराशि

पब्लिक हेल्‍थ फाउंडेशन (पीएचएफआई) को प्रत्‍येक विदेशी फंड की स्‍वीकृति से पहले विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, 2010 के तहत पूर्व अनुमति लेनी होगी।

विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, 2010 के प्रावधानों के कथित उल्‍लंघन के बारे में जानकारी प्राप्‍त होने के बाद पीएचएफआई के पंजीकरण के नवीनीकरण को प्रारंभ से ही अस्‍थायी घोषित कर दिया गया।

पीएचएफआई को प्रत्‍येक तिमाही के अंत में विदेश से प्राप्‍त होने वाले योगदान के संबंध में स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय को विस्‍तृत जानकारी देनी होगी। स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा एक समिति का गठन किया गया है जो पीएचएफआई द्वारा त्रैमासिक आधार पर प्राप्‍त व खर्च किए गए विदेशी योगदान की समीक्षा करेगा।

यह जानकारी केन्‍द्रीय गृह मंत्री किरेन रिजिजू ने आज एक प्रश्‍न के उत्तर में लोकसभा में दी।

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