नई दिल्ली, 20 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) कर्मचारी राज्य बीमा निगम की 173वीं बैठक सम्पन्न ईएसआइसी विजन 2022 सैद्धांतिक रूप से अनुमोदित 2022 तक 10 करोड़ कामगारों तक पहुँचने का लक्ष्य भुवनेश्वर और रायगढ़ में नए अस्पताल स्वीकृत
क.रा.बी.नि. (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) ने संतोष कुमार गंगवार, श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की अध्यक्षता में आयोजित अपनी 173वीं बैठक में सेवा वितरण तंत्र मे सुधार करने के संबंध में कुछेक बहुत महत्वपुर्ण निर्णय लिए हैं।
बैठक के दौरान, ईएसआइसी विजन 2022 को सैद्धांतिक रूप से अनुमोदन प्रदान किया गया। ईएसआइसी विजन 2022 में वर्ष 2022 तक 10 करोड़ कामगारों की व्याप्ति के लक्ष्य के साथ देश के प्रत्येक जिले में क.रा.बी. योजना का विस्तार शामिल है। बैठक में लक्ष्य प्राप्ति के साधनों तथा कार्यप्रणाली पर विचार किया गया। इस संदर्भ में अन्य हितधारकों के सक्रिय भागीदारी एवं बेहतर सामंजस्य हेतु एक उप-समिति बनाने का निर्णय भी लिया गया।
उत्तर प्रदेश में चिकित्सा देख-रेख सेवाओं को मजबूत करने के लिए, क.रा.बी.नि. (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) द्वारा क.रा.बी. योजना अस्पताल, बरेली को नियंत्रण में लेने का निर्णय लिया गया। इस अस्पताल का नियंत्रण पूर्व में राज्य सरकार के पास था। इसके अतिरिक्त भुवनेश्वर में क.रा.बी.नि. अतिविशिष्ट अस्पताल की स्थापना और रायगढ़, छतीसगढ़ में सौ बिस्तर के क.रा.बी. अस्पताल की मंजूरी संबंधी रिपोर्ट भी बैठक में दी गई। बैठक में क.रा.बी.निगम ने फुलवारीशरीफ, पटना में 50 बिस्तर के आदर्श अस्पताल, जिसका 100 बिस्तरों के अस्पताल में उन्नयन किया जा सकता है, को जारी रखने का निर्णय लिया। अपनी पिछली बैठक में क.रा.बी.निगम ने पहले ही बिहटा, पटना, बिहार में 100 बिस्तर के चिकित्सा सुविधाएं/अस्पताल को आरंभ करने का अनुमोदन किया था।
निगम द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं में हितधारकों के भागीदारी को सुदृढ करने हेतु बैठक में पायलट आधार पर मोडिफाइड एम्प्लोयर्स यूटिलाइजेशन डिस्पेंसरी (मोडिफाइड ईयूडी) की स्थापना के लिए भी निर्णय लिया गया।
चिकित्सा सेवाओं में सुधार तथा क.रा.बी.नि. अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का यथोचित प्रयोग करने के लिए, अस्पतालों में सतर्कता निरीक्षण एकक की स्थापना करने का निर्णय लिया गया। आगे, बीमित व्यक्तियों एवं उनके परिवार के सदस्यों का नियोक्ता द्वारा पंजीकरण के समय आधार नंबर केप्चर करने के लिए एक तंत्र की स्थापना हेतु क.रा.बी.नि. विनियमों में नया उप-विनियम जोड़ा गया।
एम• सथियावती, सचिव, श्रम एवं रोजगार, महानिदेशक, ईएसआईसी, राजकुमार तथा कमर्चारी राज्य बीमा निगम कर्मचारियों और नियोजको के प्रतिनिधि, निगम के माननीय सदस्य, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि और श्रम और रोजगार मंत्रालय तथा निगम के अधिकारीगण ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
(●) मुजफ्फरपुर-सगौली और सगौली-वाल्मिकीनगर लाइनों का विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण
• आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 100.6 कि.मी. लंबी मुजफ्फरपुर-सगौली और 109.7 कि.मी. लंबी सगौली-वाल्मिकीनगर लाइनों के विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण परियोजनाओं को क्रमश: 1347.61 करोड़ रुपये और 1381.49 करोड़ रुपये की संपूर्ण लागत पर अनुमोदित कर दिया है। ये परियोजनाएं बिहार में मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण (मोतीहारी) और पश्चिमी चंपारण (बेतिया) को कवर करेंगी। इस समय मुजफ्फरपुर से वाल्मिकीनगर तक यात्री गाड़ियां संकुलन और ठहरावों के कारण प्रभावित हो रही हैं क्योंकि इस लाइन की क्षमता उपयोगिता 213 प्रतिशत तक है। अतिरिक्त क्षमता होने से संकुलन कम होगा और न्यूनतम विलंब होने से तीव्रतर और विश्वसनीय संचलन होगा मुजफ्फरपुर-सगौली और सगौली-वाल्मिकीनगर परियोजनाओं से क्रमश: 24.14 लाख कार्य दिवसों और 26.33 लाख कार्य दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 100.6 कि.मी. लंबी मुजफ्फरपुर-सगौली और 109.7 कि.मी. लंबी सगौली-वाल्मिकीनगर विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण परियोजनाओं को क्रमश: 1347.61 करोड़ रुपये और 1381.49 करोड़ रुपये की संपूर्ण लागत पर अनुमोदित कर दिया है। ये परियोजनाएं बिहार में मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण (मोतीहारी) और पश्चिमी चंपारण (बेतिया) को कवर करेंगी।
इस मार्ग पर कवर होने वाले क्षेत्र उत्तरी बिहार के घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं। इस समय मुजफ्फरपुर से वाल्मिकीनगर तक यात्री गाड़ियां संकुलन और ठहरावों के कारण प्रभावित हो रही हैं क्योंकि इस लाइन की क्षमता उपयोगिता 213 प्रतिशत तक है। इस खंड में 38 मेल/एक्सप्रेस गाड़ियां प्रतिदिन हजारों यात्रियों को लेकर चलती हैं। अतिरिक्त क्षमता होने से संकुलन कम होगा और न्यूनतम विलंब होने से तीव्रतर एवं विश्वसनीय संचलन होगा। इसके अलावा, इससे अनुरक्षण ब्लॉकों की अधिक उपलब्धता से संरक्षा में संवर्धन होगा।
मुजफ्फरपुर से वाल्मिकीनगर तक समूचे मार्ग को विसंकुलित करने के अलावा दोहरीकरण से क्षमता और कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इसके परिणामस्वरूप आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा और क्षेत्र का समग्र विकास होगा। वर्ष 2022 तक देश के पूर्वी क्षेत्रों का विकास प्रधानमंत्री के ‘न्यू इंडिया’ विज़न को साकार करने की दृष्टि से आवश्यक है। चम्पारण जिला नेपाल सीमा से जुड़ा हुआ है, जिससे इस लाइन का दोहरीकरण होने के परिणामस्वरूप पड़ोसी देशों के साथ भी बेहतर कनेक्टिविटी होगी।
विद्युतीकरण के परिणामस्वरूप गाड़ियां तीव्र गति से चलेंगी, कार्बन उत्सर्जन में कटौती होगी और टिकाऊ पर्यावरण को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, इससे ईंधन आयात पर निर्भरता कम होगी, जिसके परिणामस्वरूप रेलों के लिए ऊर्जा लागत में बचत होगी और देश के लिए विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
इसके अलावा, मुजफ्फरपुर-सगौली और सगौली-वाल्मिकीनगर परियोजनाओं से क्रमश: 24.14 लाख कार्य दिवसों और 26.33 लाख कार्य दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।
(●) झांसी-माणिकपुर और भीमसेन-खैरार लाइनों का विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण
• आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 4955.72 करोड़ रुपये की सम्पूर्ण लागत पर 425 कि.मी. लम्बी झांसी-माणिकपुर और भीमसेन-खैरार लाइनों के विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण परियोजनाओं को अनुमोदित कर दिया है। इस परियोजना के वर्ष 2022-23 तक पूरा होने की संभावना है। अनुरक्षण ब्लॉकों के लिए बेहतर उपलब्धता के जरिए समय-पालन में सुधार होगा और बेहतर संरक्षा मुहैया होगी। यह मार्ग डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर के लिए महत्वपूर्ण फीडर मार्ग होगा। इस परियोजना से खजुराहो, जो एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल है, तक कनेक्टिविटी में सुधार होगा इस परियोजना से निर्माण के दौरान लगभग 102 लाख कार्य दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा
माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने 4955.72 करोड़ रुपये की सम्पूर्ण लागत पर 425 कि.मी. लम्बी झांसी-माणिकपुर और भीमसेन-खैरार लाइनों की दोहरीकरण और विद्युतीकरण परियोजनाओं को अनुमोदित कर दिया है। इस परियोजना के वर्ष 2022-23 तक पूरा होने की संभावना है। इन परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश के झांसी, महोबा, बांदा, चित्रकूट धाम और मध्य प्रदेश का छतरपुर जिला कवर होगा।
झांसी-खैरार, खैरार-माणिकपुर और खैरार-भीमसेन की मौजूदा लाइन क्षमता उपयोगिता क्रमशः 126, 160 और 107 प्रतिशत है, जिससे इस खंड में संकुलन होता है और गाड़ियों की गति धीमी होती है।
इस दोहरीकरण परियोजना से विपरीत दिशा में गाड़ियों की क्रॉसिंग के लिए ठहराव दिए बिना झांसी/कानपुर से आने-जाने वाली गाड़ियों और इलाहाबाद से आने-जाने वाली गाड़ियों का आवागमन सुगम होगा। इससे झांसी-सतना और कानपुर-सतना के मार्ग पर यात्री गाड़ियों के समय-पालन और सुगम चालन में सुधार होगा। इस परियोजना से अनुरक्षण ब्लॉकों के लिए बेहतर उपलब्धता में सुधार के माध्यम से बेहतर संरक्षा व्यवस्था मुहैया होगी।
यह नोट किया जाए कि डीएफसी (समर्पित माल गलियारा) की कनेक्टिविटी भीमसेन स्टेशन के समीप है। इस प्रकार यह मार्ग डीएफसी के लिए फीडर मार्ग के रूप में कार्य करेगा और वस्तुओं, विशेष रूप से कृषि उत्पादों के उपभोक्ता क्षेत्रों तथा निर्यात के लिए बंदरगाहों तक सुगम संचलन के जरिए आर्थिक और औद्योगिक विकास में सहायक होगा। सीमेंट के सुगम संचलन के जरिए इस विकास से सतना में सीमेंट क्लस्टर और अवसंरचना सेक्टर को भी मुख्य रूप से लाभ होगा।
इस परियोजना से खजुराहो, जो एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल है, तक कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इससे क्षेत्र में पर्यटन के माध्यम से आर्थिक सम्पन्नता आएगी और रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
विद्युतीकरण के परिणामस्वरूप गाड़ियां तीव्र गति से चलेंगी, कार्बन उत्सर्जन में कटौती होगी और टिकाऊ पर्यावरण को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, इससे ईंधन आयात पर निर्भरता में कमी होगी, जिसके परिणामस्वरूप रेलों के लिए ऊर्जा लागत में बचत होगी और देश के लिए विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
इसके अलावा, इन परियोजनाओं से निर्माण के दौरान लगभग 102 लाख कार्य दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।
(●) जेपोर-मलकानगिरी नई लाइन परियोजना
• आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 130 किलोमीटर लंबी जेपोर-मलकानगिरी नई लाइन परियोजना को 2676.11 करोड़ रुपये की संपूर्ण लागत पर अनुमोदित कर दिया है। इस परियोजना के 2021-22 तक पूरा होने की संभावना है। मलकानगिरी और कोरापुट जिले भी देश के चिन्हित वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों में शामिल हैं, इसके परिणामस्वरूप ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के कई अन्य स्थानों तक छोटी गमन दूरी सुनिश्चित होगी। यह विशाल सामाजिक-आर्थिक असर वाले क्षेत्र के औद्योगिक विकास सहित समग्र विकास के लिए आधारभूत संरचना प्रदान करती है जिससे विकास के जरिए वामपंथी उग्रवाद का मुकाबला करने में भी सहायता मिलेगी इससे निर्माण के दौरान लगभग 31.2 लाख कार्य दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 130 किलोमीटर लंबी जेपोर-मलकानगिरी नई लाइन परियोजना को 2676.11 करोड़ की संपूर्ण लागत पर अनुमोदित कर दिया है और इस परियोजना के वर्ष 2021-22 तक पूरा होने की संभावना है। यह परियोजना ओडिशा राज्य के कोरापुट और मलकानगिरी जिलों को कवर करेगी।
मलकानगिरी और कोरापुट जिले भी देश के चिन्हित वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों में शामिल हैं। ये क्षेत्र 115 आकांक्षापूर्ण जिलों में भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक ‘न्यू इंडिया’ विजन को साकार करने में इन जिलों का विकास करने का आह्वान किया है।
प्रस्तावित नई लाइन मलकानगिरी, बोईपरिगुडा, तंजिनीगुडा, मैथिली, पौंडरीपनी रोड और अन्य प्रमुख शहरों को मौजूदा कोट्टावलासा-किरंदूललाइन पर जेपोर स्टेशन से जोड़ेगी। इसके अलावा, महत्वपूर्ण शहरों यथा कोरापुट, जेपोर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा तक कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इसके परिणामस्वरूप ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के कई अन्य स्थानों तक छोटी गमन दूरी सुनिश्चित होगी।
वर्तमान में मलकानगिरी का रेलवे के साथ कोई संपर्क नहीं है। नई लाइन विशाल सामाजिक-आर्थिक असर वाले क्षेत्र के औद्योगिक विकास सहित समग्र विकास के लिए आधारभूत संरचना प्रदान करेगी। यह परियोजना इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और इससे इन क्षेत्रों के लोगों को आर्थिक अवसर प्रदान करने में सहायता मिलेगी। इससे विकास के जरिए वामपंथी उग्रवाद का मुकाबला करने में भी सहायता मिलेगी।
इसके अलावा, इस परियोजना से निर्माण के दौरान लगभग 31.2 लाख कार्य दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।
(●) भटनी-औंडिहार लाइन का विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण
• आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 116.95 कि.मी. लंबी भटनी-औंडिहार लाइन के विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण परियोजना को 1300.9 करोड़ रुपये की संपूर्ण लागत पर अनुमोदित कर दिया है। इस परियोजना के 2021-22 तक पूरा होने की संभावना है। दोहरीकरण परियोजना से उच्चतर गति सुनिश्चित होगी, गाड़ियों के विलंब में कमी आएगी, रेलपथ/ब्लॉक अनुरक्षण के लिए अधिक समय मिलने से संरक्षा में संवर्धन होगा और यातायात में भावी बढ़ोतरी के लिए अतिरिक्त क्षमता मिलेगी मुगलसराय-नैनी-इलाहाबाद मार्ग के विसंकुलन से पूर्वी भारत विशेष रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र के यात्रियों को लाभ मिलेगा जिला वाराणसी, जिसे प्राय: भारत की आध्यात्मिक राजधानी कहा जाता है, से कनेक्टिविटी में सुगमता होने से तीर्थस्थान, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी विद्युतीकरण के परिणामस्वरूप गाड़ियां तीव्र गति से चलेंगी, कार्बन उत्सर्जन में कटौती होगी और स्थायी पर्यावरण को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, इससे ईंधन आयात पर निर्भरता कम होगी, जिसके परिणामस्वरूप रेलों के लिए ऊर्जा लागत में बचत होगी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 116.95 कि.मी. लंबी भटनी-औंडिहार लाइन के विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण परियोजना को 1300.9 करोड़ रुपये की संपूर्ण लागत पर अनुमोदित कर दिया है और इसके 2021-22 तक पूरा होने की संभावना है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश में देवरिया, बलिया, मऊ और गाज़ीपुर जिलों को कवर करेगी।
औंडिहार स्टेशन वाराणसी मंडल का जंक्शन स्टेशन है, जो औंडिहार-छपरा, औंडिहार-भटनी, औंडिहार-जौनपुर और औंडिहार-वाराणसी से चारों दिशाओं से जुड़ा हुआ है। इस लाइन की मौजूदा क्षमता उपयोगिता 118 प्रतिशत है, जिसके परिणामस्वरूप संकुलन होता है और गाड़ी संचलन धीमी गति से होता है। दोहरीकरण परियोजना से उच्चतर गति सुनिश्चित होगी, गाड़ियों के विलंब में कमी आएगी, रेलपथ/ब्लॉक अनुरक्षण के लिए अधिक समय मिलने से संरक्षा में संवर्धन होगा और यातायात में भावी बढ़ोतरी के लिए अतिरिक्त क्षमता मिलेगी।
उत्तर मध्य रेलवे का इलाहाबाद-नैनी-मुग़लसराय मार्ग अति संतृप्त मार्ग है और इससे मुग़लसराय पर भारी संकुलन होता है। इस मार्ग का दोहरीकरण होने से यातायात मुगलसराय-नैनी-इलाहाबाद मार्ग पर शिफ्ट हो जाएगा जिससे इस मार्ग का संकुलन कम हो जाएगा। इससे पूर्वी भारत विशेष रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र के यात्रियों को लाभ मिलेगा।
जिला वाराणसी, जिसे प्राय: भारत की आध्यात्मिक राजधानी कहा जाता है, से कनेक्टिविटी में सुगमता होने से तीर्थस्थान, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी।
विद्युतीकरण के परिणामस्वरूप गाड़ियां तीव्र गति से चलेंगी, कार्बन उत्सर्जन में कटौती होगी और स्थायी पर्यावरण को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, इससे ईंधन आयात पर निर्भरता कम होगी, जिसके परिणामस्वरूप रेलों के लिए ऊर्जा लागत में बचत होगी और देश के लिए विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
इसके अतिरिक्त, इस परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान लगभग 28.07 लाख कार्य दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।