राष्ट्रीय गर्भाशय कैंसर कांग्रेस का उद्घाटन



नई दिल्ली, 18 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) अश्विनी कुमार चौबे द्वारा राष्ट्रीय गर्भाशय कैंसर कांग्रेस का उद्घाटन

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने एसोचैम द्वारा आयोजित राष्ट्रीय गर्भाशय कैंसर कांग्रेस का उद्घाटन नई दिल्ली में किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि एसोचैम ने एक अति महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समस्या, गर्भाशय के कैंसर पर सम्मेलन आयोजित किया है और सर्विकल कैंसर के निदान के लिए राष्ट्रीय जागृति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा की महिलाएं राष्ट्र की धुरी है और उनके स्वास्थ्य का सीधा प्रभाव राष्ट्र के विकास पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि खराब स्वास्थ्य होने के कारण महिलाओं द्वारा कम वजन वाले अस्वस्थ शिशुओं को जन्म देने की संभावना रहती है और न ही उनकी समुचित देखभाल एवं पोषण हो सकता है।

अस्वस्थ महिलाओं का परिवार की मनोदशा और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि गर्भाशय कैंसर के कई कारण हो सकते है। जैसे एचआईवी संक्रमण, असुरक्षित यौन संबंध, अस्वस्थ जीवन शैली इत्यादि। उन्होंने कहा कि आंकलन के अनुसार भारत में 3.8 मिलियन अर्थात् 38 लाख लोग कैंसर से ग्रस्त पाए गए तथा इनमें से दो-तिहाई लोग कैंसर के अंतिम चरण तथा नाइलाज स्तर पर पाए गए।

हर वर्ष भारत में कैंसर के कारण लगभग 7 लाख मौतें होती है। कैंसर से पीड़ित इन रोगियों में से 60 प्रतिशत से अधिक रोगी अपने जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव 35 से 65 वर्ष की आयु में होते है। उन्होने कहा कि यदि गर्भाशय कैंसर का समय पर जांच करके पता लगाया जाए तो इसका उपचार संभव है और महिलाएं लंबे समय तक जीवित रह सकती है और अच्छा जीवन जी सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि समय पर जांच करके उपयुक्त उपचार से गर्भाशय कैंसर के मामलों में कमी आई है।

भारत सरकार राष्ट्रीय आरोग्य निधि के माध्यम से 27 क्षेत्रीय कैन्सर सेन्टर्स को वित्तीय सहायता दे रही है ताकि गरीब लोगों के कैंसर का निःशुल्क इलाज हो सके। इसके अतिरिक्त, 65 मेडिकल कालेजों में कैन्सर के उपचार की व्यवस्था है। राज्य सरकारों को कैंसर उन्मूलन के लिए हर वर्ष समुचित आर्थिक सहायता दी जाती है।

इस अवसर पर उन्होंने कारपोरेट सेक्टर से आग्रह किया कि उनका यह सामाजिक दायित्व है कि वे अपने लाभ का कुछ अंश कैंसर जैसे गंभीर बीमारी को रोकने के लिए राष्ट्रीय आरोग्य निधि में अपना बहुमूल्य योगदान दे तथा पीपीपी माडल में केंसर के उपचार के लिए अस्पताल एवं मोबाइल बैंक चलाने में देश के गरीब लोगों की चिकित्सा में अपना योगदान दे सके। विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल व देश के वह क्षेत्र जहां कैंसर के सबसे ज्यादा रोगी है।

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