03 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) प्रमुख बंदरगाहों में पीपीपी परियोजनाओं के लिए संशोधित आदर्श रियायत समझौते को मंत्रिमंडल की मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रमुख बंदरगाहों में पीपीपी परियोजनाओं के लिए संशोधित आदर्श रियायत समझौते (एमसीए) को मंजूरी दी है, ताकि बंदरगाह परियोजनाओं को निवेशक-अनुकूल और बंदरगाह क्षेत्र के निवेश-माहौल को और आकर्षित बनाया जा सके।
प्रमुख विशेषताएं –
एमसीए में संशोधन के तहत सोसायटी फॉर एफर्डएबल रिड्रेसल ऑफ डिसप्यूट्स-पोर्ट्स (सरोद-पोर्ट्स) की स्थापना का विचार है। इसकी स्थापना के मद्देनजर हाइवे राजमार्ग क्षेत्र में उपलब्ध प्रावधानों के अनुरूप विवाद निपटान प्रणाली तैयार की जाएगी।
संशोधित एमसीए की अन्य विशेषताएं इस प्रकार हैं –
I. वाणिज्यिक संचालन तिथि (सीओडी) से दो वर्ष पूरे हो जाने के बाद डेवलपर अपनी 100 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी का विनिवेश करके बाहर निकल सकते हैं। यह राजमार्ग क्षेत्र के एमसीए प्रावधानों के अनुरूप हो जाएगा।
II. छूट पाने वाले व्यक्तियों के संबंध में अतिरिक्त जमीन के प्रावधान के तहत जमीन के किराये को 200 प्रतिशत से कम करके 120 प्रतिशत कर दिया गया है। यह प्रस्तावित अतिरिक्त जमीन के लिए दरों के आधार पर लागू होगा।
III. छूट धारकों को ‘प्रति मीट्रिक टन माल/टीईयू हैंडल्ड’ के आधार पर रॉयल्टी देनी होगी, जो वार्षिक डब्ल्यूपीआई में उतार-चढ़ाव के मद्देनजर तय होगी। यह रॉयल्टी, वसूल करने की वर्तमान प्रक्रिया के स्थान पर लागू होगी, जो कुल राजस्व के प्रतिशत के बराबर होगी। इसे बोली के दौरान निर्धारित किया जाएगा और जिसकी गणना महापत्तन प्रशुल्क प्राधिकरण (टीएएमपी) द्वारा निर्धारित अग्रिम मानक प्रशुल्क सीमा के आधार पर की जाएगी। इससे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत संचालकों की लंबित शिकायतों को दूर करने में मदद मिलेगी। इसके तहत प्रशुल्क सीमा के आधार पर राजस्व में हिस्सेदारी होती थी और कीमतों की छूट उपेक्षित रह जाती थीं। यह समस्याएं टीएएमपी द्वारा वसूले जाने वाले भंडारण शुल्कों तथा भंडारण शुल्कों पर राजस्व संकलन से जुड़ी हैं। इनके कारण कई परियोजनाओं में कठिनाइयां उत्पन्न होती थीं, जो अब दूर हो जाएंगीं।
IV. छूट धारकों को अब बड़ी क्षमता वाले उपकरण, सुविधाएं, प्रौद्योगिकी लगाने में आजादी होगी और वे उच्च उत्पादकता तथा बेहतर इस्तेमाल के लिए अभियांत्रिकी का उपयोग कर सकेंगे। इसके अलावा परियोजना की लागत में भी बचत होगी।
V. ‘वास्तविक परियोजना लागत’ का स्थान ‘कुल परियोजना लागत’ ले लेगी।
VI. ‘नियम में परिवर्तन’ की नई परिभाषा में निम्नलिखित बिन्दु भी शामिल हैं –
क. टीएएमपी दिशा-निर्देश/आदेश, पर्यावरण कानून एवं श्रम कानूनों के तहत मानकों और शर्तों का लागू होना।
ख. छूट धारकों की क्षतिपूर्ति के लिए नये करों, शुल्कों इत्यादि को बढ़ाना और लागू करना। चूंकि परियोजना की उपयोगिता प्रभावित होती थी, जिसे ध्यान में रखकर छूट धारकों को नये करों, शुल्कों इत्यादि के लागू होने तथा बढ़ने के संबंध में क्षतिपूर्ति दी जाएगी। यह क्षतिपूर्ति केन्द्र और राज्य सरकारों के प्रत्यक्ष कर के क्रियान्वयन/बढ़ोतरी के संबंध में लागू नहीं होगी।
VII. सीओडी के पहले संचालन शुरू होने के संबंध में प्रावधान। औपचारिक पूर्णत: प्रमाण पत्र के प्राप्त होने के पहले कई परियोजनाओं में बंदरगाह द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाली परिसंपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल की संभावना बढ़ेगी।
VIII. दोबारा वित्तपोषण के प्रावधानों के संबंध में उद्देश्य यह तय किया गया है कि छूट धारकों को सस्ती दर पर दीर्घकालिक निधियों की उपलब्धता हो, ताकि परियोजनाओं की वित्तीय उपादेयता में सुधार हो।
IX. मौजूदा छूट धारकों की शिकायतों को दूर करने के लिए सरोद-पोर्ट्स के प्रावधानों के विस्तार के तहत छूट धारकों और रियायत देने वाले प्राधिकरण के बीच परिशिष्ट समझौते पर हस्ताक्षर का प्रावधान शुरू किया जाएगा।
X. बंदरगाह का इस्तेमाल करने वालों के लिए शिकायती पोर्टल की शुरूआत।
XI. परियोजना की समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट जानने के लिए एक निगरानी व्यवस्था की शुरूआत की गई है।
पिछले 20 वर्षों के दौरान बंदरगाह क्षेत्र में पीपीपी परियोजनाओं के प्रबंधन से प्राप्त होने वाले अनुभवों के मद्देनजर इन संशोधनों का प्रस्ताव किया गया है। इसके अलावा मौजूदा एमसीए के कुछ प्रावधानों के कारण होने वाली समस्याओं को समाप्त करने की दृष्टि से भी संशोधनों का प्रस्ताव किया गया है। हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद एमसीए के संशोधनों को अंतिम रूप दिया गया है।
(●) मंत्रिमंडल ने बिलासपुर में नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) में नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना को मंजूरी दी है। संस्थान की स्थापना प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत की जाएगी। परियोजना की लागत 1351 करोड़ रुपये है।
मुख्य विशेषताएं –
नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान का निर्माण 48 महीने में पूरा कर लिया जाएगा। इसका पूर्व निर्माण-चरण 12 महीनों का, निर्माण-चरण 30 महीने का और शुरू होने का चरण 6 महीने का रखा गया है।
संस्थान में 750 बिस्तरों की क्षमता वाला एक अस्पताल बनाया जाएगा। इसके अलावा ट्रॉमा सेंटर सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
संस्थान के तहत एक मेडिकल कॉलेज भी होगा, जिसमें प्रति वर्ष 100 एमबीबीएस छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा।
संस्थान में नर्सिंग कॉलेज भी होगा, जिसमें प्रति वर्ष बीएससी (नर्सिंग) पाठ्यक्रम में 60 लोगों को प्रवेश दिया जाएगा। नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के अनुरूप आवासीय परिसर तथा संबंधित सुविधाओं/सेवाओं को उपलब्ध कराया जाएगा।
अस्पताल में 20 स्पेशलिटी/सुपर स्पेशलिटी विभाग होंगे, जिनमें 15 ऑपरेशन थियेटर भी शामिल हैं।
पारम्परिक औषधि प्रणाली के तहत उपचार सुविधाएं प्रदान करने के लिए 30 बिस्तरों वाला एक आयुष विभाग भी निर्मित किया जाएगा।
प्रभाव :
नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना से दोहरे उद्देश्य को पूरा किया जाएगा, जिसमें आबादी को सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जाएगी। इसके अलावा क्षेत्र में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य सेवियों का समूह सृजित किया जाएगा, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्राथमिक तथा द्वितीयक स्तर के संस्थानों/सुविधाओं के लिए सेवाएं देंगे।
पृष्ठभूमि
इस योजना के तहत भुवनेश्वर, भोपाल, रायपुर, जोधपुर, ऋषिकेश और पटना में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों की स्थापना की जा चुकी है तथा रायबरेली में संस्थान का निर्माण प्रगति पर है। इसके अलावा 2015 में नागपुर (महाराष्ट्र), कल्याणी (पश्चिम बंगाल) तथा गुंटूर (आंध्र प्रदेश) के मंगलागिरि में तीन संस्थानों को और 2016 में भठिंडा तथा गोरखपुर में एक-एक संस्थानों को मंजूरी दी गई है। कामरूप (असम) में भी एक संस्थान को स्वीकृति दी गई है।
(●) जम्मू कश्मीर में समानांतर बचाव सुरंग के साथ दो लेन की दो द्विदिशी जोजिला सुरंग के निर्माण, परिचालन एवं अनुरक्षण को मंत्रिमंडल की स्वीकृति
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में जम्मू कश्मीर में समानांतर बचाव (निकास) सुरंग के साथ दो लेन की दो द्विदिशी जोजिला सुरंग के निर्माण, परिचालन एवं अनुरक्षण हेतु, जिसमें श्रीनगर-लेह खंड पर राष्ट्रीय राजमार्ग-1ए को 95.00 किलोमीटर तथा जम्मू कश्मीर में 118.00 किलोमीटर पर जोड़ने वाले पहुंच मार्ग शामिल नहीं है, इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण के ईपीसी मोड, की स्वीकृति दी है। इस सुरंग के निर्माण से श्रीनगर-करगिल तथा लेह के बीच सभी मौसमों के दौरान संपर्क उपलब्ध रहेगा तथा इन क्षेत्रों में समग्र आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक एकीकरण की भी सुविधा रहेगी। इस परियोजना का कूटनीतिक तथा सामाजिक-आर्थिक महत्व है और यह जम्मू कश्मीर में आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों के विकास का एक माध्यम होगी।
परियोजना विवरण
परियोजना के निर्माण की अवधि 7 वर्ष है जो निर्माण के शुरूआत की तारीख से ही आंकी जाएगी।
परियोजना के निर्माण की लागत 4899.42 करोड़ रुपये है।
परियोजना की कुल पूंजीगत लागत 6808.69 करोड़ रुपये है, जिसमें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनरूद्धार एवं अन्य निर्माण-पूर्व कार्यकलाप तथा 4 वर्ष तक सुरंग के अनुरक्षण तथा परिचालन की लागत शामिल है।
परियोजना का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर राज्य में बालताल तथा मीनामार्ग के बीच पहुंचमार्गों को छोड़कर 14.200 किलोमीटर लम्बी समानांतर निकास सुरंग के साथ एकल ट्यूब वाली दो लेन की द्विदिशी 14.150 किलोमीटर लम्बी सुरंग का निर्माण करना है।
इस सुरंग के पहुंचमार्गों का निर्माण अलग से शुरू किया जा रहा है।
परियोजना का कार्यान्वयन राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के माध्यम से सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएंडएच) द्वारा किया जाएगा।
प्रभाव
परियोजना का मुख्य उद्देश्य जम्मू तथा कश्मीर में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लेह क्षेत्र को पूरे साल संपर्क प्रदान करना है, जो कि इस समय रास्तों पर बर्फ तथा हिमस्खलन के डर के कारण अधिक से अधिक 6 महीने तक ही सीमित है।
इस परियोजना से अन्य चालू परियोजनाओं यथा गगनगिर में 6.5 किलोमीटर लंबी जेड-एमओआरएच सुरंग के साथ-साथ कश्मीर और लद्दाख के दो क्षेत्रों के बीच सुरक्षित, तीव्र तथा किफायती संपर्क सुनिश्चित होगा।
इससे परियोजना कार्य-कलापों में स्थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार की संभावना में और अधिक वृद्धि होगी।
परियोजना पूर्ण होने पर रोजगार में भारी इजाफा होगा, क्योंकि स्थानीय व्यापार राष्ट्रीय बाजार से जुड़ जाएंगे और इस सुंदर क्षेत्र में पूरे साल पर्यटक यातायात उपलब्ध रहेगा।
इन क्षेत्रों में बहु-स्तरीय रोजगार सृजित होगा।
(●) कैबिनेट ने भूमि सीमा पार करने के संबंध में भारत और म्यांमार के बीच समझौते को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भूमि सीमा पार करने के संबंध में भारत और म्यांमार के बीच समझौते को मंजूरी दे दी है।
इस समझौते से दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में आमतौर पर रह रहे लोगों की मुक्त आवाजाही से संबंधित मौजूदा अधिकारों के नियमन एवं उनमें सामंजस्य बैठाने में सहूलियत होगी। इससे वैध पासपोर्टों और वीजा के आधार पर लोगों की आवाजाही में भी सहूलियत होगी जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं सामाजिक जुड़ाव बढ़ेगा।
इस समझौते के तहत भारत–म्यांमार सीमा के पार लोगों की आवाजाही के लिए समुचित व्यवस्था की गई है। इससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों और म्यांमार की आम जनता के बीच संपर्क या कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने और आपसी मेलजोल बढ़ाने में मदद मिलने की आशा है।
इस समझौते से पूर्वोत्तर भारत की अर्थव्यवस्था के विकास को नई गति मिलेगी और इसके साथ ही भारत को म्यांमार के साथ अपने भौगोलिक संपर्कों का लाभ उठाने में भी मदद मिलेगी जिससे आपसी व्यापार बढ़ेगा तथा दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी रिश्ते मजबूत होंगे।
इस समझौते से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले मुख्यत: उन जनजातीय समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा होगी जो भूमि सीमा के पार मुक्त आवाजाही के अभ्यस्त हैं।
(●) मंत्रिमंडल ने अर्जेटीना के ब्यूनस आयर्स में 10-13 दिसंबर, 2017 को आयोजित डब्ल्यूटीओ के 11वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत द्वारा अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण को स्वीकृति दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अर्जेटीना के ब्यूनस आयर्स में 10-13 दिसंबर, 2017 को आयोजित डब्ल्यूटीओ के 11वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत द्वारा अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण को पूर्व प्रभाव से स्वीकृति दी गई।
सम्मेलन में उपयोग किए गए अधिकार और अपनाए गए दृष्टिकोण का उद्देश्य भारत के हितों और प्राथमिकताओँ की रक्षा करना था।
पृष्ठभूमिः
सम्मेलन से पहले बाली/नैरोबी आदेश के अनुसार खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक प्रतिभूति विषय तथा अन्य कृषि विषयों पर स्थायी समाधान की आशा की जा रही थी। विश्व व्यापार संगठन के कुछ सदस्य देश सेवाओं में घरेलू नियमन, मछलीपालन सब्सिडी, ई-कॉमर्स, निवेश सहायता तथा सूक्ष्म मझौले और लघु उद्यमों (एमएसएमई) पर परिणाम चाहते थे।
लेकिन सहमति के अभाव में खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक प्रतिभूति और अन्य कृषि विषयों पर कोई परिणाम प्राप्त नहीं किया जा सका।
नवंबर, 2014 के आम परिषद के निर्णय के साथ बाली मंत्रिस्तरीय निर्णय जिसकी पुष्टि 2015 में विश्व व्यापार संगठन के 10वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में की गई थी, वह सार्वजनिक प्रतिभूति के संबंध में भारत की रक्षा करता है। यह विश्व व्यापार संगठन द्वारा स्वीकृत स्थायी हल तक मौजूद रहेगा। इस तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भारत में आनाज खरीद सुरक्षित रहेगी।
सम्मेलन के दौरान मंत्रिस्तरीय निर्णयों में मछलीपालन संबंधी विषयों पर कार्यक्रम शामिल है ताकि 2019 में विश्व व्यापार संगठन के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन द्वारा कोई निर्णय लिया जा सके। भारत द्वारा प्रस्तावित ई-कॉमर्स पर वर्तमान कार्यक्रम के गैर-वार्ता अधिकार जारी रखने का भी फैसला किया गया। जैसाकि पूर्ववर्ती मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में किया गया, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क लगाने की वर्तमान अवधि दो वर्षों के लिए बढ़ा दी गई। टीआरआईपीएस गैर-उल्लंघन कंपनियों पर रोक बरकरार रखी गई। यह फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में पेटेंटों के सदाबहार होने से रोकेगा और जेनेरिक दवाईयों तक पहुंच और वहन योग्य दवाएं सुनिश्चित होगा।
निवेश सुविधा, एमएसएमई, लिंग तथा व्यापार जैसे विषयों पर सहमति के अभाव में कोई मंत्रिस्तरीय निर्णय नहीं लिया गया।
सदस्यों में व्यापक मतभेद थे। कुछ सदस्य विश्व व्यापार संगठन को निर्देशित करने वाले प्रमुख सिद्धांतों को मानने से और उनके प्रति आग्रह से इंकार कर रहे थे। मंत्री सहमत मंत्रिस्तरीय घोषणा पर नहीं पहुंच सके। भारत ने प्रारूप मंत्रिस्तरीय घोषणा का समर्थन नहीं किया क्योंकि इसमें बहु-पक्षवाद, दोहा विकास एजेंडा तथा विकासशील देशो के साथ विशेष और लीक से हटकर व्यवहार जैसे विषयों को पर्याप्त रूप से कवर नहीं किया गया था।
लेकिन बहु-पक्षीय व्यापार प्रणाली और डब्ल्यूटीओ में विभिन्न कार्य क्षेत्रों को आगे बढ़ाने में व्यापक समर्थन मिला। यह महत्वपूर्ण है कि मंत्रिस्तरीय घोषणा के अभाव में भी वर्तमान आदेश तथा निर्णयों से यह सुनिश्चित हुआ कि कार्य आगे जारी रहेगा और सदस्य खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक प्रतिभूतियों, कृषि, विशेष रक्षा व्यवस्था, कृषि सब्सिडी तथा अन्य विषयों पर कार्य जारी रखेंगे।
(●) कैबिनेट ने तेल एवं गैस क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और इजरायल के बीच एमओयू को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तेल एवं गैस क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और इजरायल के बीच सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये जाने को मंजूरी दे दी है।
इस एमओयू से ऊर्जा क्षेत्र में भारत एवं इजरायल के आपसी संबंधों को और मजबूती मिलने की आशा है। इस समझौते में उल्लिखित सहयोग से एक-दूसरे के देशों में निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), संयुक्त अध्ययन करने, मानव संसाधनों के क्षमता निर्माण और स्टार्ट-अप्स के क्षेत्र में गठबंधन करने में सहूलियत होगी।