20 दिसम्बर 2017।
(●) स्वदेशी जीपीएस
भारत ने एनएवीआईसी नामक अपनी क्षेत्रीय नौपरिवहन प्रणाली तैनात की है, जिसमें 7 नौपरिवहन उपग्रह का तारामंडल तथा भारतीय क्षेत्र को स्थिति, नौवहन तथा समय सेवाएं प्रदान करने के लिए संबद्ध सतही वृत्तखंड की व्यवस्था है।
आईआरएनएसएस (एनएवीसी) ने स्थिति, नौपरिवहन और समय की जानकारी प्रदान करने में सक्षम बनाया है जिसका बड़े पैमाने पर सिविल और कुटनीतिक अनुप्रयोगों के लिए उपयोग किया जा सकता है जिसमें स्थलीय, हवाई और समुद्री नौपरिवहन, सटीक समय, आपदा प्रबंधन और चेतावनी संदेश, मैपिंग और जिओडेटिक आंकडे ग्रहण करना, वाहन ट्रैकिंग और बेड़े प्रबंधन, चालकों के लिए दृश्य और श्रव्य नौपरिवहन आदि शामिल हैं।
इस समय एनएवीआईसी तारामंडल के सात उपग्रह कक्षा में हैं, डीओएस/इसरो द्वारा आईआरएनएसएस-1 आई की प्रस्तुति प्रगति पर है, जिसमें इस उपग्रह की सज्जा, एकीकरण और परीक्षण करने के लिए निजी कंपनियों के समूह के साथ अनुबंध के उपयोग की व्यवस्था है। 2018 की पहली तिमाही के दौरान उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना है।
एनएवीआईसी भारत और इसके परिवेश सहित अंतरिक्ष में संकेत प्रदान करता है, यह स्थिति और समय को सही ढंग से निर्धारित करने के लिए जमीन पर रिसीवर का उपयोग करके उपयोग में लाया जा सकता है। विश्व में अंतरिक्ष में संकेत अमेरिका के जीपीएस, रूस के ग्लोनास, यूरोप के गैलीलियो और चीन के बेइडेन द्वारा मुहैया कराये जाते हैं। मौजूदा वैश्विक प्रवृत्ति, भू-आदाता का उपयोग करने के लिए है जो समय और स्थिति संबंधी समाधान प्रदान करने के लिए उपलब्ध कई संकेतों का उपयोग करते हैं।
यह सूचना केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राज्य मंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जनशिकायत एवं पेंशन, आणविक ऊर्जा तथा अंतरिक्ष डॉ• जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
(●) इसरो और नासा सहयोग
इसरो और जेट प्रणोदन प्रयोगशाला (जेपीएल)/नासा संयुक्त रूप से दोहरी फ़्रिक्वेंसी (एल एंड एस बैंड) सिंथेटिक एपर्चर राडार इमेजिंग उपग्रह नासा इसरो सिंथेटिक एपर्चर राडार (एनआईएसएआर) के नाम से विकसित करने में लगी है। एल बैंड एसएआर जेपीएल/नासा द्वारा विकसित किया जा रहा है, जबकि इसरो एस-बैंड एसएआर विकसित कर रहा है। इस उपग्रह से प्राप्त एलएंडएस बैंड माइक्रोवेव डेटा विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोगों के लिए उपयोगी होगा, जिसमें प्राकृतिक संसाधन मानचित्रण और निगरानी, फसल क्रम की पूर्ण अवधि में कृषि बायोमास का आकलन, मिट्टी की नमी का आकलन करना, बाढ़ और तेल चिकनाई की निगरानी, तटीय क्षरण, तटवर्ती जल में तटीय परिवर्तन और हवाओं की भिन्नता, मैंग्रोव का आकलन, सतह विरूपण अध्ययन, बर्फ की परत गिरने और गतिशीलता आदि शामिल हैं।
एनआईएसएआर मिशन से प्राप्त आंकड़ें जलवायु का पलटाव करने के लिए नहीं हैं। हालांकि, इस मिशन से प्राप्त आंकड़े कुछ अनुप्रयोगों को विकसित करने में उपयोगी होंगे, जिनमें (i) ऐसे स्थानों पर जहां मनुष्यों का आना जाना लगा रहता है, ताजा बर्फ से छिपे हुए ग्लेशियर में दरारों का पता लगाना (ii) हिमस्खलनों का अनुमान लगाने में इनपुट के रूप में बर्फ पैक पैरामीटर का पता लगाना (iii) ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) खतरों का अध्ययन, और (iv) बाढ़/चक्रवातों के कारण बाढ़ से जलमग्न क्षेत्र का पता लगाना शामिल हैं। ये अनुप्रयोग ऐसे उपाय करने में मददगार हो सकते हैं जिनसे मानव जीवन की क्षति को कम से कम रखा जा सके।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के तहत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान (आईआईटीएम) संस्थान राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए, यूएसए) के साथ मिलकर उच्च संकल्प के सामयिक और दीर्घकालिक जलवायु पूर्वानुमान के विकास के लिए मानसून मिशन और जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र (सीसीसीआर) के कार्यक्रमों के माध्यम से काम कर रहा है। 2010-2015 के दौरान, आईआईटीएम और एनओएए ने मिलकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून और दीर्घकालिक जलवायु पूर्वानुमानों की सामयिक भविष्यवाणियों के लिए उच्च संकल्प मॉडल विकसित किए हैं। यह समझौता ज्ञापन, "डायनेमिकल शॉर्ट रेंज, विस्तारित रेंज और भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा का मौसमी पूर्वानुमान" के अध्ययन के विषय में, 2020 तक बढ़ाया गया है, जो एमओईएस-एनओएए साझेदारी के दायरे के भीतर है।
यह सूचना केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राज्य मंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जनशिकायत एवं पेंशन, आणविक ऊर्जा तथा अंतरिक्ष डॉ• जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
(●) सौर अभियान
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रथम सौर अभियान, आदित्य-एल-1 शुरू करने की योजना बना रहा है।
आदित्य-एल-1 अभियान का उद्देश्य सूर्य-पृथ्वी के इर्द-गिर्द कक्षा से लेंग्रेगियन प्वाइंट (एल-1) जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर है, सूर्य का अध्ययन करना है। यह फोटो स्फियर, क्रोमोस्पियर तथा सूर्य की बाहरी परत, विभिन्न वेवबैंडस में प्रभामंडल के अध्ययन के लिए सात अंतरिक्ष उपकरण ले जाएगा।
आदित्य एल-1 राष्ट्रीय संस्थानों के योगदान वाला एक पूर्णत: स्वदेशी प्रयास है। इण्डियन इस्टींट्यूट आफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए), बैंगलुरू, विजिबल इमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) के विकास के लिए एक अग्रणी संस्थान है तथा इन्टर यूनिवर्सिटी सेंटर फार एस्टोनोमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए), पुणे सोलर अल्ट्रा वायलेट इमेजर (एसयूआईटी) आदित्य एल-1 अभियान के लिए अंतरिक्ष उपकरण विकसित कर रहा है।
आदित्य एल-1 प्रभामंडल पर निष्कर्ष दे सकता है तथा इसके अलावा यू वी अंतरिक्ष उपकरण का उगयोग कर सौर क्रोमोस्पियर पर विचार दे सकता है, एक्सरे उपकरणों के प्रयोग द्वारा धधक (फ्लेयर) पर प्रेषण प्रस्तुत कर सकता है। अणु ससूंचक तथा मेगनोमीटर अंतरिक्ष उपकरण आवेशित अणुओं तथा एल-1 के इर्द-गिर्द हालो कक्षा में पहुंचने वाले चुंबकीय क्षेत्र के संबंध में सूचना प्रदान कर सकता है।
यह सूचना केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राज्य मंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जनशिकायत एवं पेंशन, आणविक ऊर्जा तथा अंतरिक्ष डॉ• जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
(●) डिजिटल रोजगार कार्यालय
राष्ट्रीय कैरियर सेवा (एनसीएस), श्रम व रोजगार मंत्रालय का एक मिशन है जो राष्ट्रीय रोजगार सेवा में बदलाव करना चाहता है ताकि यह कैरियर सलाह, तकनीकी सलाह, कौशल विकास पाठयक्रमों की जानकारी आदि के संदर्भ में वेब आधारित पोर्टल के माध्यम से विभिन्न रोजगार संबंधी सेवाएं प्रदान कर सके। राष्ट्रीय कैरियर सेवा के पोर्टल (www.ncs.gov.in) पर एनसीएस की सेवाएं उपलब्ध हैं। इसमें बहुभाषी कॉल सेंटर और हेल्पडेस्क की सुविधाएं भी शामिल हैं। कोई भी व्यक्ति इस सुविधा का लाभ उठा सकता है। एनसीएस की सेवाएं रोजगार कार्यालयों, कैरियर सेवा केन्द्रों, सामान्य सेवा केन्द्रों आदि में भी उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त यह व्यवस्था भी की गई है कि रोजगार से संबंधित विज्ञप्तियां एनसीएस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों। इस पोर्टल को विकसित करने का लक्ष्य युवाओं की अभिलाषाओं और उपलब्ध रोजगार के अवसरों के मध्य सामंजस्य स्थापित करना है।
कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड आदि केंद्रीय भर्ती एजेंसियां विभिन्न परीक्षाओं का संचालन इस प्रकार करती हैं कि इनकी तिथियां एक दूसरे से भिन्न हों।
उक्त जानकारी लोकसभा में डॉ• वूरा नरसैया गौड द्वारा उठाए गए प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत व पेंशन राज्य मंत्री तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह द्वारा दी गई।
(●) भारतीय रेल की स्वर्ण परियोजना
रेल मंत्रालय ने यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से स्वर्ण परियोजना लॉच करने का निर्णय लिया है। डिब्बों की आंतरिक सजावट, शौचालय, डिब्बों की साफ – सफाई, कर्मचारियों का व्यवहार, खान – पान व्यवस्था, कम्बल व चादरें, समय की पाबंदी, सुरक्षा, यात्रा के दौरान मनोरंजन की सुविधा, त्वरित जानकारी सुविधा जैसे यात्री सुविधा के 9 आयाम इस स्वर्ण परियोजना में शामिल हैं। कुल 14 राजधानी तथा 15 शताब्दी रेलों में ये सुविधाएं दी जाएगीं। स्वर्ण मानक के आधार पर डिब्बों के उन्नयन के लिए भारतीय रेल ने प्रति रैक 50 लाख रूपये खर्च करने की स्वीकृती दी है।
1. राजधानी और शताब्दी रेलों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से स्वर्ण परियोजना लॉंच की गई है।
2. भोपाल वर्कशॉप में कुछ डिब्बों को महामना रेलों के लिए मॉडल रैक के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्तमान समय में तीन ऐसी रेलें चल रही हैं – नई दिल्ली से वाराणसी, भोपाल से खजुराहो और वडोदरा से वाराणसी।
यह सूचना रेल राज्य मंत्री राजेन गोहेन द्वारा लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई जानकारी पर आधारित है।
(●) एमएसएमई के लिए जीएसटी के सहज कार्यान्वयन हेतु सरकार द्वारा किए गए ठोस उपाय
एमएसएमई के लिए जीएसटी के सहज कार्यान्वयन हेतु सरकार द्वारा निम्नलिखित ठोस उपाय किए गए हैं :
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) और केवीआईसी प्रमाणित संस्थाओं/केंद्रों के माध्यम से ब्रिकी गए खादी के कपड़ों के लिए छूट;एमएसएमई द्वारा 28 प्रतिशत कर श्रेणी में उत्पादित अधिकतर मदों को निचले श्रेणियों में लाया गया है; कम्पोजिशन शुल्क को बढ़ाकर रू• 150 लाख प्रति लाख टर्नओवर किया गया है; ऐसी जीएसटी पंजीकृत इकाइयों को ही तिमाही रिटर्न भरनी है जिनकी टर्नओवर 150 लाख रूपयों से अधिक है। रिवाइज चार्ज कार्यप्रणाली को मार्च 2018 तक स्थगित किया गया है।
यह सूचना राज्य मंत्री, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, गिरीराज सिंह द्वारा 20 दिसम्बर (बुधवार) को राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई सूचना के आधार पर है।