छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंज रही बघेल सरकार के भ्रष्टाचारों की आवाज़ें



--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
रायपुर - छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज।

● भूपेश बघेल शासन में हुए भ्रष्टाचार पर आखिर कब होगी कार्यवाही?

● आखिर भाजपा विधायकों द्वारा भूपेश राज में हुए भ्रष्टाचारों को विधानसभा में उठाने के बाद भी सरकार क्यों है मौन?

● क्या जनता की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भूपेश बघेल को पहुंचाएंगे सलाखों के पीछे?

छत्तीसगढ़ में नवगठित विष्णुदेव साय सरकार से प्रदेश की जनता की एक नहीं बल्कि कई उम्मीदें हैं। उम्मीद केवल प्रदेश को विकास की राह पर वापस लाने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने मात्र की नहीं है। बल्कि प्रदेश की जनता को सबसे अधिक उम्मीद पिछली भूपेश बघेल सरकार के भ्रष्टाचारियों और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजने की भी हैं। हम सभी जानते हैं कि भूपेश बघेल व उनकी चांडाल चौकड़ी ने पिछले पांच सालों में राज्य को अर्श से फर्श पर लाकर खड़ा कर दिया और जिस राज्य को वर्षों से भाजपा नेताओं ने अपने पैरों पर खड़ा करने की कड़ी मेहनत की उस मेहनत पर पानी फेरते हुए प्रदेश को पांच साल पीछे लाकर खड़ा कर दिया। भूपेश बघेल सरकार के भ्रष्टाचारों का अंत करने के लिए विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार ने सख्त कदम उठाना आरंभ कर दिये हैं। पर अभी तक सरकार के द्वारा सभी प्रमुख शराब घोटाला, कोयला घोटाला, महादेव सट्टा घोटाला पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। भाजपा के कद्दावर नेता जैसे मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक राजेश मूणत और रिकेश सेन सहित अन्य भाजपा विधायकों ने इन घोटालों को विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया पर उसके बाद भी सरकार मौन क्यों हैं? भूपेश राज में सत्ता का बेजा इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार किया गया। आईपीएस अफसर जैसे आनंद छाबरा, आरिफ शेख़, संजय ध्रुव, दीपांशु काबरा, अभिषेक पल्लव, अभिषेक माहेश्वरी जैसे अधिकारी शामिल रहे थे। विष्णुदेव सरकार ने इन अधिकारियों को लूपलाइन में डाल तो दिया हैं, पर इन पर कोई ठोस कार्यवाही, विभागीय जांच शुरू नहीं की है। ऐसा प्रतीत हो रहा है शायद भाजपा सरकार का कोई खास ब्यूरोक्रेट ही इन लोगों को बचा रहा है वरना अभी तक इन सब का निलंबन हो जाना चाहिए था। वैसे ही भूपेश समेत विनोद वर्मा, विजय भाटिया को किस कारण अभयदान दिया जा रहा है वो समझ से परे है।

• भ्रष्टाचारी बघेल व दोषियों को जेल भेजे सरकार!

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य को जिस तरह से भ्रष्ट्राचार के जाल में उलझाया है उसे अब सुलझाने की जिम्मेदारी साय सरकार की है। यही कारण है कि साय सरकार जनता की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए सभी आरोपी सौम्या चौरसिया, विनोद वर्मा, आनंद छाबरा सहित अन्य दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने की योजना पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार जल्द ही ईडी की मदद लेकर भूपेश बघेल व उनसे जुड़े व्यक्तियों पर फिर कार्रवाही कर सकती है।

• क्या भ्रष्ट अफसरों को जेल पहुंचाएगी भाजपा सरकार

राज्य में भाजपा सरकार के गठन के बाद बघेल और उनके आसपास के अफसरों पर एक्शन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हर कोई इस बात पर ही चर्चा कर रहा है कि आईपीएस आरिफ शेख़, आनंद छाबरा सहित अनिल टुटेजा, जनसंपर्क आयुक्त दीपांशु काबरा जैसे अफसरों पर कार्यवाही होगी या इन्हें अभयदान दिया जायेगा। गौरतलब है कि भूपेश बघेल की सरकार में इन अफसरों ने चौतरफा भ्रष्टाचार किया और राज्य को जबरदस्त ढंग से लूटा है। बघेल सरकार में कुछ खास काम तो इन्हीं अफसरों को दिये जाते थे। जैसे भाजपा नेता, पत्रकार के हर मूवमेंट की खबर रखना आदि। क्या साजिशें रची जा सकती हैं, उसका खाका खींचने में भी इनका ही हस्तक्षेप होता था। पत्रकारिता के माध्यम से मैंने उनके बारे में काफी उल्लेखित किया। फिर भाजपा ने भी इन दोनों अधिकारियों से तंग आकर मुख्य चुनाव आयुक्त से 120 पन्नों की आरिफ शेख़ की और आनंद छाबड़ा की 48 पन्नों की शिकायत की थी। बड़ा सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार अब जीरो करप्शन टॉलरेंस जो प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य है उस पर चलकर तंत्र का दुरुपयोग करने वाले ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्यवाही करेगी या फिर इन्हें अभयदान दिया जायेगा।

• पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महादेव सट्टेबाजी घोटाला में संलिप्तता

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सीधे तौर पर इस घोटाले में शामिल हैं। इस कथित घोटाले के मास्टरमाइंड और ऐप के मालिक ने अपना एक वीडियो जारी कर कहा कि उसने भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपए नकद पहुँचाए हैं। ये पैसे चुनाव में इस्तेमाल किए गए हैं। उसने बताया कि एक-एक पैसों का हिसाब उसके पास है। अभी तक ज्ञात जानकारी के अनुसार महादेव सट्टेबाजी ऐप मामला 15 हजार करोड़ का है और इसमें अभी जाँच जारी है। इतने पैसों की तो मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है, जिस पर ईडी ने केस दर्ज किया है। अभी ये कितना बड़ा घोटाला है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इस मामले में भूपेश बघेल के करीबी लोग जेल में बंद हैं। और तो और इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाकायदा चुनावी सभा में भूपेश बघेल से सवाल पूछा था कि बघेल सरकार बताए कि इन पैसों को उन्होंने कहाँ इस्तेमाल किया।

• बघेल सरकार का शराब घोटाला

भूपेश बघेल ने वादा किया था कि कांग्रेस सत्ता में आएगी तो छत्तीसगढ़ में शराबबंदी करेगी। उल्टा भूपेश बघेल और उनके बेटे पर आरोप है कि उन्होंने कमीशनखोरी करके 2161 करोड़ रुपए का घोटाला किया जबकि अभी इसकी पूरी डिटेल भी सामने नहीं आई है। जो पकड़ा गया और जिसकी रिकवरी हुई है, यह उसकी जानकारी है। सच्चाई यह है कि छत्तीसगढ़ में हजारों करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ है। इस मामले में ईडी चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है और बताया है कि एजाज़ ढेबर के भाई अनवर ढेबर के आपराधिक सिंडिकेट के जरिए आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ। इसमें एक महत्वपूर्ण बात यह भी निकल कर आ रही है, कि जो 40% शराब जिसपर स्ट्रिप लगाकर टैक्स चुराकर लूटा गया उन शराब डिस्टलिरी मालिकों पर अब तक सरकार कोई कार्यवाही नहीं कर रही। आखिर उनकी फैक्ट्री से दुकानों तक यह अवैध 40% शराब बॉटल कैसे निकली। छत्तीसगढ़ में शराब के प्रमुख व्यापारी बिलासपुर, राजनांदगांव के भाटिया समूह है। अब सरकार इस पर जांच कर कार्यवाही कब करेगी या फिर से न्याय लेने के लिए अदालत में कोई जायेगा यह तो वक्त ही बताएगा।

• कोयला अवैध लेवी टैक्स घोटाला

भूपेश बघेल सरकार ने खदानों से निकलने वाले कोयला पर भी घोटाला किया है। माल ढुलाई से जुड़ा 2000 करोड़ से अधिक के घोटाले का आरोप भी उस पर है। बताया जा रहा है कि 25 रुपए प्रति टन की वसूली की गई है। पिछले साल ईडी ने इस मामले में जाँच शुरू की थी और कई लोग इस मामले में भी गिरफ्तार हुए हैं। ईडी ने एक बयान में कहा कि यह मामला एक बड़े घोटाले से संबंधित है, जिसमें छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नौकरशाहों, व्यापारियों, राजनेताओं और बिचौलियों से जुड़ा एक समूह ढुलाई किये जाने वाले प्रति टन कोयले पर अवैध रूप से 25 रुपये का कर वसूल रहा है। अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग 2-3 करोड़ रुपये अर्जित किए जाते हैं।

ऐसे तमाम मामले हैं जिन पर प्रदेश की मौजूदा बीजेपी सरकार को कार्यवाही करनी है। क्योंकि इस समय सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह पिछली सरकार में हुए भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करे। जनता भी यही चाहती है।

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