बेंगलुरु में विपक्षी दलों की साझा बैठक में सोनया गांधी की मौजूदगी का असर देखा जा सकता है..



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।

लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ साझा रणनीति बनाने के लिए 17 और 18 जुलाई को बेंगलुरु में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में 24 पार्टियां शामिल हो सकती हैं। बेंगलुरु की बैठक में एक और अहमियत यह है कि इसमें सोनिया गांधी भी मौजूद रहेंगी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोनिया गांधी से इस बैठक में भाग लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा--हमें संदेश मिला है कि वह इस बैठक में भाग लेंगी।''

76 वर्षीय सोनिया गांधी न केवल सबसे पुरानी पार्टी, बल्कि विपक्ष की भी अकेली ग्रैंड लेडी हैं। उन्होंने अतीत में दो बार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को सफलतापूर्वक सत्ता पर बिठाया और फिर भी प्रधानमंत्री पद को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया। बेंगलुरु बैठक विपक्षी दलों की भावी रणनीति के लिहाज से अहम है। पिछली बैठक में इन दलों ने बीजेपी के खिलाफ साझा लड़ाई का संकल्प लिया था। बीजेपी के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार से लेकर साझा न्यूनतम कार्यक्रम को लेकर चर्चा होगी।

मनमोहन सिंह सोनिया के पसंद थे और प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने एक मिसाल कायम की है। उनकी पसंद के बाद विपक्षी रैंकों से शीर्ष सरकारी पद के लिए नेता या उम्मीदवार का सवाल मौन रहता है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने स्पष्ट किया है कि पार्टी भविष्य में किसी भी विपक्षी गठबंधन पर अपना नेता नहीं थोपेगी, जिससे संकेत मिलता है कि नेता का फैसला चुनाव के बाद संख्या और लोगों के फैसले की प्रकृति के आधार पर किया जा सकता है।

सोनिया गांधी ने आखिरकार कदम उठाने और 2024 के आम चुनावों से पहले विपक्षी एकता बनाने की प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया है। अपने गिरते स्वास्थ्य के बारे में चिंताओं के बावजूद उनके 17-18 जुलाई को बेंगलुरु में विपक्षी नेताओं की बैठक में भाग लेने की उम्मीद है। दरअसल बेंगलुरु में हो रही बैठक की जिम्मेवारी कांग्रेस के पास है ऐसे में उसने अपने सभी सहयोगी छोटे दलों को न्योता भेजा है।

23 जून को पटना में हुई विपक्ष की पहली महाबैठक में बड़े दलों को ही आमंत्रित किया गया था। इसमें कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, जेडीयू, आरजेडी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, समाजवादी पार्टी, एनसीपी, शिव सेना (उद्धव), सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई एमएल, नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी शामिल थे। आमंत्रित दलों में आरएलडी नेता जयंत चौधरी नहीं पहुंचे थे।

विपक्षी एकता की पहल भले ही नीतीश कुमार ने की है लेकिन विभिन्न दलों के नेता उन पर भरोसा करने से परहेज करने की सलाह दे रहे हैं। विपक्ष के अनेक नेता उन पर भरोसा करने को लेकर खासे सतर्क से हैं।

बेंगलुरु की बैठक में कांग्रेस ने इन सभी दलों के साथ ही केरल के छोटी पार्टियां जैसे इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (जोसेफ), केरल कांग्रेस (मणि), आरएसपी, तमिलनाडु की छोटी पार्टियां जैसे एमडीएमके, केडीएमके, वीसीके और बंगाल की पार्टी फॉरवर्ड ब्लॉक को भी आमंत्रित किया है।

हालांकि आम आदमी पार्टी के बेंगलुरु की बैठक में शामिल होने को लेकर सस्पेंस बरकरार है। कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन ने कहा कि लगभग सभी दलों ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है। हालांकि आम आदमी पार्टी की तरफ इशारा करते हुए नासिर हुसैन ने माना कि कुछ दलों के प्रदेश स्तर पर अपने मुद्दे हैं जिससे अड़चन आ रही है।

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