सरकार डरी हुई है! ऐसा है तो भारतीय सेना को एलएसी पर किसने भेजा?



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ नियंत्रण रेखा पर कांग्रेस ने नहीं भेजी सेना

■ राहुल गांधी के चीन वाले बयान पर विदेश मंत्री जयशंकर का पलटवार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को राहुल गांधी पर चीन पर दिए गये बयान को लेकर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि वो भारत-चीन तनाव को लेकर गलत धारणा फैला रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि वो नैरेटिव फैला रहे हैं कि भारत सरकार डरी हुई है, ऐसा है तो भारतीय सेना को एलएसी पर किसने भेजा? राहुल गांधी ने उन्हें नहीं भेजा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भेजा है। यह उनसे पूछा जाना चाहिए कि कौन सच वह बोल रहे हैं।

जयशंकर ने इशारों में कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें ‘सी’ से शुरू होने वाले शब्दों को समझने में थोड़ी दिक्कत हो रही होगी। यह सच नहीं है। मुझे लगता है कि वे जानबूझकर स्थिति को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। यह सरकार सीमा के बुनियादी ढांचे के बारे में गंभीर है। दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर चीन को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। राहुल का कहना है कि सरकार चीन का नाम लेने से डरती है। इसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह जवाब दिया है।

जयशंकर ने कहा कि मैं सबसे लंबे समय तक चीन का राजदूत रहा और बॉर्डर मु्द्दों को डील कर रहा था। मैं ये नहीं कहूंगा कि मुझे सबसे अधिक ज्ञान है मगर मैं इतना कहूंगा कि मुझे इस (चीन) विषय पर काफी कुछ पता है। अगर उनको (राहुल गांधी) चीन पर ज्ञान होगा तो मैं उनसे भी सीखने के लिए तैयार हूं। ये समझना मुश्किल क्यों है कि जो विचारधारा और राजनीतिक पार्टियां हिंदुस्तान के बाहर हैं, उससे मिलती जुलती विचारधारा है। ऐसी पार्टियां भारत के अंदर भी हैं और दोनों एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारतीय सेना और चीन की आर्मी के बीच हुई झड़प को लेकर कहा था कि चाइना युद्ध की तैयारी कर रहा है। इसको लेकर मोदी सरकार गंभीर नहीं है। इस कारण सरकार हमारे सवालों का जवाब भी नहीं दे रही है। उन्होंने दावा किया था कि केंद्र सरकार चर्चा से भाग रही है। उन्होंने सरकार की "रक्षात्मक" चीन नीति के रूप में वर्णित अपनी लगातार आलोचना पर कांग्रेस नेता पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा, 'अगर मुझे चीन की इस बात का सार निकालना है, तो कृपया इस नैरेटिव को न खरीदें कि कहीं सरकार रक्षात्मक है...कहीं हम उदार हो रहे हैं। मैं लोगों से पूछता हूं कि क्या हम उदार हो रहे थे, जिसने भारतीय सेना को वहां भेजा। "एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा)। राहुल गांधी ने उन्हें नहीं भेजा। नरेंद्र मोदी ने उन्हें भेजा," डॉ जयशंकर ने समाचार एजेंसी एएनआई को एक विशेष पॉडकास्ट में यह टिपिपणियां की हैं।

"चीन सीमा पर आज हमारे इतिहास में शांतिकाल की सबसे बड़ी तैनाती है। हम बड़ी मेहनत से बड़ी कीमत पर वहां सैनिकों को रख रहे हैं। हमने इस सरकार में सीमा पर अपने बुनियादी ढांचे के खर्च को पांच गुना बढ़ा दिया है। अब मुझे बताओ कि कौन है "रक्षात्मक और मिलनसार व्यक्ति? कौन वास्तव में सच कह रहा है? कौन चीजों को सटीक रूप से चित्रित कर रहा है? कौन इतिहास के साथ फुटसी खेल रहा है?"

"मुझे लगता है कि उन्होंने (राहूल गांधी ) ने यह कहीं एक सार्वजनिक बैठक में कहा था। यह शायद चीन के संदर्भ में है। मैं अपने बचाव में कह सकता हूं कि मैं चीन में सबसे लंबे समय तक रहने वाला राजदूत रहा हूं। अगर उसके पास बेहतर ज्ञान है है तो, मैं हमेशा सुनने के लिए तैयार हूं। जैसा कि मैंने कहा, मेरे लिए जीवन एक सीखने की प्रक्रिया है। अगर यह एक संभावना है, तो मैंने कभी भी अपने दिमाग को किसी भी चीज़ के लिए बंद नहीं किया है। चाहे वह कितना भी असंभव क्यों न हो। लद्दाख में पैंगोंग झील क्षेत्र में चीनी निर्माण को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा सरकार की आलोचना करने पर, विदेश मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र 1962 के युद्ध के बाद से चीन के अवैध कब्जे में था।

मंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा, "कांग्रेस और उसके नेताओं को 'सी' से शुरू होने वाले शब्दों को समझने में कुछ समस्या होनी चाहिए।" "वह क्षेत्र वास्तव में चीनी नियंत्रण में कब आया? उन्हें (कांग्रेस को) 'सी' 1962 से शुरू होने वाले शब्दों को समझने में कुछ समस्या होनी चाहिए। जयशँकर ने कहा- अब आप 2023 में मोदी सरकार को उस पुल के लिए दोषी ठहराने जा रहे हैं जिस पर चीनियों ने 1962 में कब्जा कर लिया था और आपके पास यह कहने की ईमानदारी नहीं है कि यह वहीं हुआ है जहां यह हुआ था।

राजीव गांधी 1988 में बीजिंग गए...1993 और 1996 में समझौतों पर हस्ताक्षर किए। मुझे नहीं लगता कि उन समझौतों पर हस्ताक्षर करना गलत था। ." विपक्षी दल को ईमानदारी से देखना चाहिए कि क्या हुआ। उन्होंने कहा, "क्या होता है आप यह स्मोक एंड मिरर करते हैं, ओह यहां कुछ ऐसा हो रहा है जैसे 1962 कभी नहीं हुआ था।" डॉ. जयशंकर ने कहा, "निजी तौर पर मैं आरोप-प्रत्यारोप के खेल में पड़ सकता हूं, जो 1962 में हुआ था। वह हो गया था। लेकिन अब अगर आप उस पर लीपापोती कर दें तो सब कुछ 2023 में ही हुआ... मुझे आपको (कांग्रेस को) बाहर करना होगा।" उन्होंने कहा कि सरकार ने सीमा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बजट को पांच गुना बढ़ा दिया है।

ताजा समाचार

National Report



Image Gallery
इ-अखबार - जगत प्रवाह
  India Inside News