नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े करती बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

केंद्र सरकार ने गुजरात दंगों पर बीबीसी की डॉक्यूकमेंट्री को ‘प्रोपेगेंडा का हिस्सा’ बताया है और कहा है कि वह ऐसी फिल्म का ‘महिमामंडन’ नहीं कर सकती। सरकार की ओर से कहा गया कि प्रधानमंत्री पर बीबीसी की डॉक्यूयमेंटी दुष्प्रचार, पक्षपाती और औपनिवेशक मानसिकता को दर्शाती है। हम नहीं जानते कि इसके पीछे का एजेंडा क्या है?

वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने पीएम मोदी पर बनी बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर एतराज जताते हुए बचाव किया है। यह डॉक्यूमेंट्री 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उनके लीडरशिप पर सवाल खड़ा करती है। जिसमें हजारों लोग मारे गए थे।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि इसमें पूर्वाग्रह, निष्पक्षता की कमी और औपनिवेशिक मानसिकता स्पष्ट रूप से झलकती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि यह एक झूठे नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए दुष्प्रचार का एक हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह हमें इस कवायद के उद्देश्य और इसके पीछे के एजेंडा के बारे में सोचने पर मजबूर करता हैं। बागची ने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री उस एजेंसी और उन लोगों की मानसिकता को प्रदर्शित करता है जो इस नैरेटिव को फिर से आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हाल ही में प्रसारित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री दुष्प्ररचार का हिस्साह है। यह डॉक्यूमेंट्री 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उनके लीडरशिप पर सवाल खड़ा करती है। जिसमें हजारों लोग मारे गए थे।

बीबीसी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी डॉक्यूमेंट्री का पहला एपीसोड मंगलवार को प्रसारित किया गया था। सीरीज का दूसरा पार्ट अगले सप्ताह 24 जनवरी को प्रसारित किया जाएगा।

बीबीसी ने ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ नाम से दो पार्ट में एक डॉक्यूमेंट्री जारी की है। इस डॉक्यूमेंट्री को कथित रूप से यूट्यूब पर भी रिलीज किया गया था, लेकिन विवादों की वजह से यूट्यूब से इसे हटा दिया गया है। सीरीज के डिस्क्रिप्शन में कहा गया है, ‘भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यक के बीच तनाव पर एक नजर, 2002 के दंगों में उनकी भूमिका के बारे में दावों की जांच, जिसमें हजारों लोग मारे गए।’

ब्रिटेन के पीएम ऋषि सनक ने गुजरात 2002 के सांप्रदायिक दंगों पर बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर पीएम मोदी का बचाव किया है।

यूके हाउस ऑफ लॉर्ड्स के एक सदस्य लॉर्ड रामी रेंजर ने भी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को पक्षपातपूर्ण बताया है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘बीबीसी आपने एक लोकतांत्रिक रूप से चुने गए भारत के प्रधानमंत्री, भारतीय पुलिस और भारतीय ज्यूडिशियरी को ठेस पहुंचाई है और करोड़ों भारतीय की भावनाओं को आहत किया है। हम दंगों और इसमें जो जानें गईं उसकी आलोचना करते हैं और हम आपके पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग की भी आलोचना करते हैं।’

2002 के गुजरात दंगे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि नरेंद्र मोदी का दंगों में कोई हाथ नहीं था। इस मामले में गंठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआटी) ने पीएम मोदी को क्लीन चिट दे दी थी।

बीबीसी की "इंडिया: द मोदी क्वेश्चन" नामक दो-भाग की श्रृंखला ने तीखी प्रतिक्रियाओं को उकसाया है। श्रृंखला विवरणक इसे "भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यक के बीच तनाव को देखते हुए, 2002 के दंगों में उनकी भूमिका के बारे में दावों की जांच कर रहा है, जिसमें एक हजार से अधिक लोग मारे गए थे।"

उधर, ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने संसद में बीबीसी की डॉक्यूजमेंट्री से खुद को दूर कर लिया और कहा कि वह पीएम मोदी के इस चरित्र चित्रण से सहमत नहीं हैं। ऋषि सुनक ने पीएम नरेंद्र मोदी का बचाव किया है। सुनक ने ये टिप्पणी पाकिस्तान मूल के सांसद इमरान हुसैन द्वारा ब्रिटिश संसद में उठाए गए विवादित डॉक्यूमेंट्री पर की। ऋषि सुनक ने बीबीसी की रिपोर्ट पर हुसैन के सवालों का जवाब देते हुए कहा, "इस पर यूके सरकार की स्थिति बेहद स्पष्ट है। इसे लेकर हमारी नीति लंबे समय से चली आ रही है और वह अभी भी बदली नहीं है। निश्चित रूप से, हमें जहां भी, कहीं भी उत्पीड़न दिखाई देता है, हम उसे बर्दाश्त नहीं करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस डॉक्यूमेंट्री को यूट्यूब पर भी लांच किया गया था लेकिन विवाद गहराने पर इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से इसे हटा दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जांच में फरवरी 2002 में दंगे भड़कने पर गुजरात के मुख्यमंत्री रहे पीएम मोदी द्वारा किसी भी गलत काम का कोई सबूत नहीं मिला। विशेष जांच दल ने दंगों के एक दशक बाद एक रिपोर्ट में पीएम मोदी का हवाला देते हुए कहा " कोई अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं"। पिछले साल जून में, सुप्रीम कोर्ट ने पीएम मोदी को मंजूरी का समर्थन किया और कहा कि मामला "गुणों से रहित" था और "जाहिर है, गुप्त डिजाइन के लिए" दायर किया गया था। 2013 में, जब एक स्थानीय अदालत ने उन्हें दंगों के दौरान हुए सबसे बड़े नरसंहार में किसी भी भूमिका से मुक्त कर दिया, तो पीएम मोदी ने एक पोस्ट में कहा: "सत्यमेव जयते (सत्य की जीत होती है)"। 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की दो बोगियां जलाने की घटना के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगे के समय नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे।

बीबीसी का कहना है कि श्रृंखला इस बात की पड़ताल करती है कि कैसे "नरेंद्र मोदी का प्रीमियर भारत की मुस्लिम आबादी के प्रति उनकी सरकार के रवैये के बारे में लगातार आरोपों से प्रभावित हुआ है।" ..और "विवादास्पद नीतियों की एक श्रृंखला" पीएम मोदी द्वारा 2019 में उनके पुन: चुनाव के बाद लागू की गई, जिसमें "अनुच्छेद 370 के तहत गारंटीकृत कश्मीर की विशेष स्थिति को हटाना।" "एक नागरिकता कानून जिसके बारे में कई लोगों ने कहा कि मुसलमानों के साथ गलत व्यवहार किया गया", जो "हिंदुओं द्वारा मुसलमानों पर हिंसक हमलों की रिपोर्ट के साथ किया गया है।"

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