भारत को एशियाई प्रशांत डाक संघ का नेतृत्व



नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

भारत इस महीने से एशियाई प्रशांत डाक संघ (एपीपीयू) का नेतृत्व संभालेगा। इसका मुख्यालय बैंकॉक, थाईलैंड में है। अगस्त-सितंबर 2022 के दौरान बैंकॉक में आयोजित 13वीं एपीपीयू कांग्रेस के दौरान हुए सफल चुनावों के बाद, डाक सेवा बोर्ड के पूर्व सदस्य (कार्मिक) डॉ. विनय प्रकाश सिंह 4 वर्षों के कार्यकाल के लिए संघ के महासचिव का पदभार संभालेंगे।

एशियाई प्रशांत डाक संघ (एपीपीयू) एशियाई-प्रशांत क्षेत्र के 32 सदस्यीय देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है। एपीपीयू इस क्षेत्र में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) का एकमात्र प्रतिबंधित संघ है, जो संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है। एपीपीयू का लक्ष्य डाक सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना के लिए सदस्य देशों के बीच डाक संबंधों का विस्तार, सुविधा देना और सुधार करना है। विभिन्न यूपीयू परियोजनाओं के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में, एपीयूयू यह सुनिश्चित करने में भी अग्रणी भूमिका निभाता है कि यूपीयू की सभी तकनीकी और परिचालन परियोजनाएं इस क्षेत्र में पूरी हो जाएं ताकि क्षेत्र को सर्वोत्तम संभव तरीके से वैश्विक डाक नेटवर्क में एकीकृत किया जा सके। महासचिव डाक संघ की गतिविधियों का नेतृत्व करते हैं और एशियन पैसिफिक पोस्टल कॉलेज (एपीपीसी) के निदेशक भी हैं जो इस क्षेत्र का सबसे बड़ा अंतर सरकारी डाक प्रशिक्षण संस्थान है।

डाक संघ को लेकर अपने दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए डॉ. विनय प्रकाश सिंह ने कहा, "मेरा लक्ष्य डाक नेटवर्क के माध्यम से व्यापार के विकास में सुधार करने, संघ की स्थिरता सुनिश्चित करने और एपीपीसी में कराए जाने वाले प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में सुधार करने के लिए एशिया प्रशांत क्षेत्र में डाक से जुड़े संस्थानों के साथ क्षेत्रीय समन्वय में सुधार करना है।" एशिया प्रशांत क्षेत्र में पूरी दुनिया के मेल का लगभग आधा मेल आता-जाता है और यहां डाक मानव संसाधन पूरी दुनिया का लगभग एक तिहाई है।

डाक विभाग के सचिव विनीत पांडे ने कहा, “यह पहली बार है जब कोई भारतीय शख्स डाक क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय संगठन का नेतृत्व कर रहा है। डाक क्षेत्र के लिए इस महत्वपूर्ण मोड़ पर, यह विभाग के लिए सौभाग्य की बात है कि उसका अधिकारी एशियाई प्रशांत डाक संघ (एपीपीयू) की गतिविधियों का, विशेष रूप से भारत की जी20 अध्यक्षता के इस वर्ष से, नेतृत्व करेगा।” उन्होंने आगे कहा, "भारत एपीपीयू को अपना पूर्ण समर्थन देना जारी रखेगा और एपीपीयू सदस्यता के सामूहिक दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से साकार करने के लिए अपने योगदान को और मजबूत करेगा।"

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