कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव से गहलोत हुए बाहर, दिग्विजय सिंह मैदान में



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

राजस्थान में अपने समर्थक विधायकों के शर्मसार कर देनी वाली हरकतों के बाद अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से न केवल माफी बल्कि भविष्य ऐसा नहीं होने देने का भोसा भी दिया। पार्टी अध्यक्ष से हुई बातचीत के बाद उन्होंने अध्यक्ष पद के चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है। कांग्रेस नए अध्यक्ष के संभावित नामों पर विचार निमर्श शुरु कर दिया है। अशोक गहलोत जब सोनिया गांधी से मिलने 10 जनपद गए, तो उनके पास एक पेपर था, इसमें लिखा था जो हुआ बहुत दुखद है। मैं भी बहुत आहत हूं।

इस दौड़ में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 136 साल पुरानी पार्टी के अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। इधर, दिग्विजय के पर्चा लेने के बाद पार्टी में अध्यक्ष पद के चुनाव पर सस्पेंस गहरा गया है। दिग्विजय को भी गांधी परिवार का करीबी माना जाता है। वह दो बार मध्य प्रदेश के सीएम रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें संगठन में काम करने का अनुभव भी है। इस बीच दिग्विजय सिंह कांग्रेस दफ्तर पहुंचकर अध्यक्ष चुनाव का पर्चा ले लिया है। दिग्विजय सिंह ने पर्चा लेने के बाद कहा कि वह अपना नामांकन फॉर्म लेने आए थे और वह कल पर्चा भरेंगे।

शर्मनाक विद्रोह के बावजूद गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने में कामयाब होते दिखते हैं। गहलोत ने कहा कि यह श्रीमती गांधी को तय करना है कि वह मुख्यमंत्री के रूप में बने रहेंगे या नहीं। 90 से अधिक विधायकों ने उनके अध्यक्ष बनने की स्थिति में यदि सचिन पायलट को उनका उत्ताधिकारी बनाये जाने पर सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी थी।

अशोक गहलोत ने आज साफ कर दिया कि वह कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं। उनके प्रति वफादार विधायकों द्वारा राजस्थान में विद्रोह के लिए “नैतिक जिम्मेदारी” लेते हुए उन्होंने राजस्थान संकट पर सोनिया गांधी से माफी मांगी है। सोनिया गांधी ने उन्हें दो पदों में से एक चुनने का विकल्प दिया था। पार्टी में अनुशासन समिति के प्रमुख सीनियर कांग्रेस नेता ए के एटोनी ने सोनिया गांधी से मिल कर राजस्थान में उत्पन्न ताजा राजनीतिक संकट पर चर्चा की थी।

गैर-गांधी उम्मीदवारों के साथ दो दशकों में पहला कांग्रेस चुनाव होने के लिए नामांकन की प्रक्रिया कल बंद हो जाएगी। अब तक 17 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में दिग्विजय सिंह बनाम शशि थरूर का मुकाबला है। दोनों कल अपना नामांकन दाखिल करेंगे।

चुनाव लड़ने के अपने फैसले की घोषणा के बाद दिग्विजय सिंह ने शशि थरूर से मुलाकात की। दोनों के गले मिलने की एक तस्वीर साझा करते हुए, श्री थरूर ने ट्वीट किया: "मैं अपनी पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए उनकी उम्मीदवारी का स्वागत करता हूं। हम दोनों सहमत थे कि हमारी लड़ाई प्रतिद्वंदियों के बीच नहीं बल्कि सहयोगियों के बीच एक दोस्ताना प्रतियोगिता है। हम दोनों चाहते हैं कि जो भी जीत हासिल करे, कांग्रेस जीतेगी!" उधर, दिग्विजय सिंह के घर भी हलचल बढ़ गई है। चिदंबरम उनसे मुलाकात करने पहुंचे। महासचिव केसी वेणुगोपाल सोनिया गांधी से मिलने उनके आवास 10 जनपथ पहुंचे।

अशोक गहलोत को गांधी की पहली पसंद माना जाता था, लेकिन उनके समर्थक विधायकों ने उनके अध्यक्ष बनने की उम्मीद को पलीता लगा दिया। विधायकों ने दो केंद्रीय नेताओं- अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने शर्तें रखीं, जिन्होंने सोनिया गांधी को अपनी रिपोर्ट में विद्रोह को "घोर अनुशासनहीनता" बताया। श्री गहलोत के करीबी तीन मंत्रियों को 10 दिनों के भीतर विद्रोह में उनकी भूमिका की व्याख्या करने के लिए कहा गया था।

कांग्रेस चाहती थी कि श्री गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष के लिए दौड़ने से पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद छोड़ दें। उन्हें यह भी कहा गया था कि राजस्थान में उनकी जगह कौन लेगा, इसके नेतृत्व की पसंद का सम्मान करना चाहिए। लेकिन गहलोत पार्टी प्रमुख की दौड़ में शामिल होते हुए भी राजस्थान के मुख्यमंत्री बने रहना चाहते थे। राहुल गांधी ने पिछले हफ्ते स्पष्ट किया कि यह संभव नहीं है क्योंकि पार्टी "एक व्यक्ति, एक पद" के अपने संकल्प पर कायम रहेगी।

सोनिया गांधी के सचिन पायलट से भी मिलने की संभावना है, जिन्होंने लंबे समय से मुख्यमंत्री पद का इंतजार किया है, लेकिन टीम गहलोत फिलहाल उन्हें रोकने में सफल हो गई है। राजस्थान में पार्टी में कलह के बाद से ही सोनिया गांधी काफी एक्टिव हो गई हैं।

सीधे 10 जनपथ तक पहुंच रखने वाले गहलोत को करीब एक दिन के बाद सोनिया ने मिलने का वक्त दिया है। उधर, शशि थरूर का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। गहलोत के मुख्यमंत्री बने रहने का मामला सोनिया की कोर्ट में है। सभी को सोनिया के फैसले का इंतजार है। सोनिया को उन विधायकों और मंत्रियों पर भी फैसला लेना है, जिन्होंने राजस्थान में केंद्रीय नेतृत्व को चुनौती देने की कोशिश की है।

करीब 90 मिनट चली बैठक के बाद गहलोत ने कहा कि जिस प्रकार से 50 साल में मुझे कांग्रेस पार्टी ने इंदिरा गांधी के समय से ही चाहें, कोई भी अध्यक्ष रहा, मुझे हमेशा विश्वास करके जिम्मेदारी दी गई। राहुल गांधी ने जब फैसला किया, उसके बाद भी घटना हुई, उस घटना ने हिलाकर रख दिया। पूरे देश में मैसेज चला गया कि मैं सीएम बना रहना चाहता हूं। मैंने इसके लिए सोनिया गांधी से माफी मांगी है। मैं कांग्रेस का वफादार हूं।

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