अशोक गहलोत के अध्यक्ष का चुनाव लड़ने पर ग्रहण लगेगा?



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

"अशोक गहलोत ने यह कैसे किया? गहलोत से इसकी उम्मीद नहीं की थी," सोनिया गांधी ने कथित तौर पर बैठक के दौरान राजस्थान के लिए एआईसीसी प्रभारी अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे से बातचीत में यह टिप्पणी की। गहलोत समर्थक विधायकों ने केंद्रीय पर्यवेक्षकों से बातचीत करने से इंकार कर दिया था। लिहाजा दोनों पर्यवेक्षक अशोक गहलोत को बताए बगैर दिल्ली वापस लौट आए। आज किसी भी समय वे अपनी रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौंप सकते हैं। माना जाता है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद पर फैसला अगले महीने कांग्रेस के अध्यक्ष के चुनाव के बाद लिया जाएगा।

कांग्रेस की एक पूर्व महासचिव कहतीं हैं यह कांग्रेस की वेचारगी का ही नतीजी है कि जिस व्यक्ति को अध्यक्ष पद के लिए योग्य नेता माना जा रहा था वह रातों-रात गांधी परिवार के "पसंदीदा उम्मीदवार" से पूर्व विद्रोही हो गया है।

कांग्रेस पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन ने सोमवार को दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की और उन्हें राजस्थान के संकट से अवगत कराया। पार्टी अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के रुख पर निराशा व्यक्त की। राजस्थान में हुए सियासी ड्रामे के बाद कांग्रेस आलाकमान अशोक गहलोत से नाराज बताया जा रहा है। ऐसे में अशोक गहलोत पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव की रेस से बाहर हो सकते हैं। राजस्थान का राजनीतिक संकट अब दिल्ली तक पहुंच गया है।

राजस्थान की राजनीतिक संकट ने 17 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष चुनावों से पहले उथल-पुथल मचा दी। दो दशक से अधिक समय में पहली बार कोई गांधी इस मुकाबले में नहीं है। हालांकि पार्टी के सीनियर नेताओं का कहना है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ से बाहर नहीं हैं। कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने संवाददाता को बताया कि अशोक गहलोत "अभी भी कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए विवाद में हैं और इससे इंकार नहीं किया गया है"। गांधी परिवार उनके प्रति वफादार राजस्थान के 90 से अधिक विधायकों के विद्रोह से परेशान हैं।

राहुल गांधी की "भारत जोड़ो यात्रा" के बीच में पार्टी को शर्मिंदा करने वाले विद्रोह की साजिश रचने के लिए कांग्रेस नेतृत्व अशोक गहलोत से नाराज़ है। सूत्रों का कहना है कि 71 वर्षीय गहलोत के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने से इनकार करने से नेतृत्व नाराज हो गया है। गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपनी पदोन्नति से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने पर सहमति व्यक्त की थी, जब राहुल गांधी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि कांग्रेस की "एक व्यक्ति, एक पद" नीति को देखते हुए उन्हें दोहरी भूमिका की अनुमति नहीं दी जाएगी।

राजस्थान में परिवर्तन की औपचारिक घोषणा रविवार को श्री गहलोत के आवास पर विधायकों की बैठक में की जानी थी। हालांकि, श्री गहलोत के घर पर केवल 20 से 25 विधायक ही दिखाई दिए। अधिकांश कांग्रेस विधायक गहलोत के करीबी मंत्री शांति धारीवाल के घर पर एक अलग बैठक में शामिल हुए। बाद में उन्होंने स्पीकर के घर के लिए एक विशेष बस ली और गहलोत को उनके प्रतिद्वंद्वी सचिन पायलट द्वारा मुख्यमंत्री के रूप में बदलने पर इस्तीफा देने की धमकी दी, जिन्होंने उनके खिलाफ 2020 में विद्रोह किया था।

विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की खुलेआम अवहेलना करते हुए दो केंद्रीय नेताओं के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलने से इनकार कर दिया, और ऐसी शर्तें रखीं जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के बाद ही एक नया मुख्यमंत्री चुनना शामिल था। यदि श्री गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं, तो यह हितों का टकराव होगा क्योंकि उन्हें राजस्थान में अपना उत्तराधिकारी चुनने का अधिकार होगा।

इधर, दिल्ली में किसी को भी इस बात का भरोसा नहीं था कि गहलोत के सक्रिय समर्थन और प्रोत्साहन के बिना 92 विधायक सामूहिक इस्तीफे की धमकी दे सकते हैं। हालांकि गहलोत ने माफी मांग ली है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने अपने सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक द्वारा अनुशासनहीनता को गंभीरता से लिया है।

पार्टी भावी अध्यक्ष पद के लिए अशोक गहलोत के विकल्प पर भी विचार करना शुरु हो गया है। मल्लिकार्जुन खड़गे और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का भी नाम सामने आया है। हालांकि कल शाम सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद कमललाथ ने कहा कि वह अपने राज्य पर ध्यान देना पसंद करेंगे।

इस बीच, सियासी संकट के बीच सचिन पायलट जयपुर से दिल्ली पहुंच गए हैं। इससे पहले सचिन पायलट राहुल और सोनिया गांधी से फोन पर बात कर चुके हैं। सचिन पायलट के करीबी सूत्रों के अनुसार पायलट ने कांग्रेस हाईकमान को बता दिया है कि अगर गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं, तो उन्हें सीएम पद पर नहीं रहना चाहिए। इतना ही नहीं यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे विधायकों को साथ लाएं।

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