राजपथ: 'कर्तव्य पथ' नहीं 'किंगकर्त्वय विमूढ़ पथ' रखा जाना चाहिए - महुआ मोइत्रा



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

दिल्ली के राजपथ का नाम बदलने की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद इस पर रार शुरु हो गया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पथ का नाम “किंगकर्तव्य विमूढ” नाम रखने का सुधाव दिया है। अब इस राजपथ को “कर्तव्य पथ” के नाम से जाना जाएगा।

नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) ने सात सितंबर को एक विशेष बैठक बुलाई है। इस दौरान नाम बदलने के प्रस्ताव को परिषद के सामने रखा जाएगा। एनडीएमसी ने यह बैठक राजपथ और सेंट्रल विस्टा लॉन का नाम बदलकर कर्तव्यपथ करने के उद्देश्य से ही बुलाई है। इंडिया गेट पर नेताजी की प्रतिमा से लेकर राष्ट्रपति भवन तक की पूरी सड़क और क्षेत्र कर्तव्यपथ के नाम से जाना जाएगा। ब्रिटिश शासन के दौरान राजपथ को किंग्सवे के नाम से जाना जाता था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत इंडिया गेट से लेकर विजय चौक तक पूरे खंड का उद्घाटन करेंगे। इस परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय ऐंनक्लेव, केंद्रीय सचिवालय, त्रिकोणीय संसद भवन, और एक नया प्रधानमंत्री आवास की परिकल्पना शामिल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से गुलामी की हर चीज से मुक्त होने की बात कही है, तभी से राजपथ के नाम बदलने पर भी मंथन शुरू हो गया था। इसी को लेकर सरकार ने अब कई सालों बाद राजपथ को “कर्तव्य पथ” नाम देने का ऐलान कर दिया है। नेताजी स्टैच्यू से लेकर राष्ट्रपति भवन तक जो पूरी रोड जाती है, उसे कब कर्तव्य पथ के नाम से जाना जायेगा।

सोमवार को मोदी ने बड़ा फैसला लेते हुए दिल्ली के राजपथ का नाम बदलने की बात कही थी। भाजपा सरकार अपने इस फैसले के माध्यम से लोगों को संदेश देना चाहती है कि आज का युग स्वतंत्रता का युग है, अब शासक और प्रजा जैसा कोई युग नहीं है, आज सभी लोग स्वतंत्र है। बता दें कि इससे पहले भी भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री आवास स्थित सड़कमार्ग रेसकोर्स रोड का नाम बदलकर “लोक कल्याण मार्ग” किया था। सेंट्रल विस्टा एवेन्यू (सीवीए), सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना (सीवीपीपी) का ही एक महत्वपूर्ण अंग है।

सेंट्रल विस्टा एवेन्यू में घूमने आने वाले यात्रियों के लिए चारों तरफ हरियाली, फूड स्टाले और 24 घंटों के लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इंडिया गेट से लेकर मानसिंह रोड तक लोगों को कुछ भी खाने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा किसी भी जगह कुछ भी खा सकते हैं।

शहरी मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि 8 सितंबर को राजपथ मार्ग का नाम बदलने का फैसला लिया गया है। कहा जा रहा है कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से गुलामी की हर चीज से मुक्त होने की बात कही है, तभी से राजपथ के नाम बदलने पर भी मंथन शुरू हो गया था। इसी कड़ी में सरकार ने अब कई सालों बाद राजपथ को कर्तव्य पथ नाम देने का ऐलान कर दिया है। नेताजी स्टैच्यू से लेकर राष्ट्रपति भवन तक जो पूरी रोड जाती है, उसे कब कर्तव्य पथ कहा जाएगा।

कई रेलवे स्टेशनों के नाम भी ऐसे ही बदले जा चुके हैं। सरकार का तर्क है कि आजादी के 75 साल बाद गुलामी का कोई भी प्रतीक नहीं रहना चाहिए। सबकुछ न्यू इंडिया वाले विजन को ताकतवर करने वाला साबित होना चाहिए।

इस बीच नाम बदले जाने को लेकर विपक्ष ने सरकार की आलोचना की है। आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने तंज कसते हुए कहा है कि पहले रेस कोर्स रोड लोक कल्याण मार्ग बना…अब राजपथ कर्तव्य पथ हो चला लेकिन आज की सबसे बड़ी चुनौतियों मसलन बेरोज़गारी, मंहगाई, बिगड़ते सामाजिक सौहार्द पर इसका पॉजिटिव प्रभाव हो तो सब स्वीकार्य है। लोकोन्मुख सरोकारों पर चुप्पी और काबिलियत सिर्फ सड़कों के नाम बदलने की हो तो क्या कहें?

सेंट्रल विस्टा के उद्घाटन और नाम बदलने के विवाद से पहले अब विपक्ष राजपथ और सेंट्रल विस्टा के नामकरण को लेकर आक्रोशित है।सरकार और विपक्ष के बीच वाकयुद्ध चल रहा है। कांग्रेस के सासद प्रमोद तिवारी कहते हैं-"एक बीमारी है कि अगर आप कुछ नहीं कर सकते हैं तो इसका समाधान इसका नाम बदलना है। वे सिर्फ शहरों और सड़कों के नाम बदलते हैं।

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