सही चुनाव करने से ही मिलती है भीतरी ताकत



--आचार्य प्रशान्त,
वेदान्त मर्मज्ञ - लेखक,
पूर्व सिविल सेवा अधिकारी,
संस्थापक प्रशान्त अद्वैत फाउंडेशन,
ग्रेटर नोएडा, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

जब असफलता मिलेगी, जैसे कि ज़्यादातर लोगों को मिलती है, तो तुम पाओगे कि तुम्हारे भीतर से अब कोई प्रेरणा ही नहीं उठ रही है, कोई 'इंस्पिरेशन', कोई ऊर्जा ही नहीं उठ रही है तुम्हारे भीतर से कि "मैं उस काम में आगे लगूँ।" क्यों? क्योंकि तुम खुद भी निश्चित नहीं हो कि वो काम करने लायक है।

फिर तुम इधर-उधर जाकर के कहीं से मोटिवेशन इकट्ठा करते हो। कोई तुमने मोटिवेटिंग किताब पढ़ ली या किसी मोटिवेशनल स्पीकर को सुन लिया। इन तरीकों से तुम अपने-आप को धक्का देने की कोशिश करते हो। बिल्कुल ठंडे पड़ रहे हो, बाहरी आग जला करके किसी तरह अपने-आप को गर्म करने की कोशिश करते हो। सोचते हो कि, "चलो अब ये काम कर ही लें।" पर मूल बात ये है कि वो काम तुम्हारे करने लायक है ही नहीं क्योंकि तुम जानते नहीं हो कि वो काम क्या है। तुम क्यों नहीं जानते कि वो काम क्या है? क्योंकि तुम ये नहीं जानते कि तुम कौन हो, तुमने अपने मन को समझने की कोशिश नहीं करी है, न तुमने साहस के साथ ये जानने की कोशिश करी है कि तुम्हें ज़िंदगी में करना क्या चाहिए, क्या उचित है तुम्हारे लिए।

सही चुनाव में एक ताकत होती है। सही चुनाव करो न! उसके बाद ये नहीं होगा कि, "अरे! हार गए तो क्या होगा?" उसके बाद एक तरह की निर्विकल्पता आ जाती है, 'चॉइसलेसनेस'। तुम कहते हो, “हार भी गए तो हो क्या जाएगा? काम तो यही करना है। अब सफलता मिले कि असफलता मिले, लगे तो इसी में रहना है।"

उदाहरण के लिए लोग कहते हैं, “हम एक नौकरी की तैयारी कर रहे थे, प्रवेश परिक्षा में असफलता मिल गई।" भाई, तुम वो नौकरी किस उद्देश्य के लिए करना चाहते थे, पहले ये बताओ न। अगर उद्देश्य बिल्कुल ही छोटा-सा है एकदम, यही कि पैसा मिल जाएगा, घूस मिल जाएगा, शादी हो जाएगी, तो ज़रूर तुमको बड़ी निराशा हो जाएगी असफलता से। और इतना ही नहीं, तुम उस निराशा से शायद उबर भी न पाओ, क्योंकि तुम किसी बड़े काम में लगे ही नहीं थे न।

सबके सामने चुनौतियाँ होती हैं, सबको सफलता-असफलता मिलती है। उस सफलता-असफलता के प्रति तुम्हारा रव‌ईया क्या होगा वो निर्धारित इसी बात से होता है कि तुमने जो काम चुना है वो बिल्कुल तुम्हारे केन्द्र से, तुम्हारे 'कोर' से निकल रहा है या नहीं निकल रहा है।

तो बेहतर ये है कि भेड़ चाल में मत चलो, दुनिया का मुँह मत देखो, ये मत देखो कि सब लोग क्या कर रहे हैं, किस दिशा जा रहे हैं। अपने लिए सही काम चुनो। कुछ ऐसा चुनो अपने लिए जिसको जीवन भर बहुत रस के साथ, बड़े मौज़ और आनंद के साथ कर सको।

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