गांधी नाम का बेजा उपयोग निषिद्ध हो !



--के. विक्रम राव,
अध्यक्ष - इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स।

समय आ गया है कि भारतीय दंड संहिता में संसद एक प्रावधान सन्निहित करें कि राष्ट्रपिता बापू के कुलनाम (गांधी) का कोई निजी स्वार्थ हेतु जाली मनुष्य बेजा इस्तेमाल न करे। मेरा अभिप्राय आर्थिक अभियुक्त सोनिया और राहुल से है। इंदिरा और राजीव तो दिवंगत हैं अत: विस्मरणीय हैं।

मगर अब परिवेश बदला है। बापू द्वारा नेतृत्व पायी पुरानी कांग्रेस फर्जीवाड़ा का शिकार हो गयी है। राहुल, प्रियंका, सोनिया आदि को नेहरु लिखा जाना चाहिये। पारसी धर्मांवलम्बी फिरोज जहांगीर घाण्डी की ये संतानें सिर्फ वर्तनी बदल कर विश्व को धोखा दे रही हैं। इनके द्वारा कुलनाम का भ्रामक उपयोग करना फर्जीवाडा करार हो। यह धारा 43 (भारतीय दंड संहिता : आई.पी.सी.) के तहत दंडनीय अपराध हो। इस नियम के आधार पर नेहरु के वंशजों द्वारा ''गांधी'' का उपयोग करना अवैध बनाया जाये। इस पर न्यायालयों को विचार करना चाहिये। इसका नाता वास्ता मां-बेटे (सोनिया-राहुल) से सीधा और करीबी है। बापू कई बार जेल गये। गुलाम भारत को ब्रिटिश चंगुल से मुक्त कराने हेतु उन्होंने सत्याग्रह किया। इन लोगों ने राष्ट्र के लिये क्या किया?

फिरोज घाण्डी ही नेशनल हेरल्ड, नवजीवन आदि के प्रबंधन तथा संचालन से जुड़े रहे। तब इसके प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स कम्पनी को हानि कई गुना बढ़ी थी। वित्तीय अनियमिततायें हुयी। आज तो उसके नाम पर धनशोधन का धंधा चल निकला। इसी धनशोधन मामले पर उच्चतम न्यायालय का कल (27 जुलाई 2022) का निर्णय ऐतिहासिक है। उच्चतम न्यायालय ने धनशोधन अधिनियम पर अत्यंत दूरगामी निर्णय दिया है।

नेशनल हेरल्ड के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉड्रिंग के तहत ईडी द्वारा की जाने वाली गिरफ्तारियों और अन्य कानूनी प्रावधानों को सही ठहराया है। स्मरण रहे कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारों को लेकर वर्ष 2018 में संविधान संसोधन किया गया था। इसके तहत ईडी को मनी लॉड्रिंग केस में गिरफ्तारी करने के साथ कई विशेष अधिकार भी दिए गए थे। ईडी को मिले अधिकारों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सौ से ज्यादा याचिकाएं दाखिल हुई। इन याचिकाओं में गिरफ्तारी, जमानत और संपति जब्त जैसे अधिकारों पर सवाल उठाए गए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं के संबंध में अपना फैसला सुनाते हुए वर्ष 2018 में दिए गए विशेष अधिकारों को सही ठहराया है। अर्थात ईडी के पास मनी लॉड्रिंग केस में पूछताछ करने, गिरफ्तारी करने, जमानत देने और संपति जब्त करने सहित कई विशेष अधिकार प्राप्त हो गये है। कानून की धारा-24 के तहत अभियुक्त को ही यह साबित करना होता है कि जो उसके पास से धन मिला है वह कानूनी रूप से वैध हे या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी सही ठहराया। स्पष्ट भी कर दिया कि ईडी के अफसर पुलिस अधिकारी नहीं हैं। उनके द्वारा-50 के तहत दर्ज बयान संविधान के अनुच्छेद-20 (3) (खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर करना) के प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आता। धारा-50 के तहत की गयी कार्रवाई एक जांच है, अंवेषण नहीं। यह बयान कोर्ट में सबूत के रुप में स्वीकार्य है।

सुप्रीम कोर्ट फैसले का मतलब है कि ईडी की कार्रवाई कानूनी तौर पर वैध है। अदालत के निर्णय से राजनीतिक और कारोबारी हलकों में डर और घबराहट बढ़ गए हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि सर्वोच्च न्यायालय इस कानून की समीक्षा कर सकता है और ईडी पर लगाम लगा सकता है। कई राजनेताओं, बिल्डरों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं पर धनशोधन के आरोप लगे हैं और उनमें से कई लोग अभी ईडी की हिरासत में हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुला के खिलाफ भी पिछले मंगलवार को धनशोधन मामले में आरोप पत्र दायर किया गया है। कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भी मामला चल रहा है, जिसमें ईडी अधिकारियों ने उनसे गहन पूछताछ की है। कल अदालत ने पीएमएलए (धनशोधन कानून) के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। उसका कहना है कि पीएमएलए को मनमाना बताने वाले याचियों के तर्क बेबुनियाद हैं। आरोपी को गिरफ्तार करने की वजह बताना ही पर्याप्त होगा।

ईडी के अधिकारों के बारे में इस फैसले का देश के लोकतंत्र पर दूरगामी प्रभाव पड़ा हे। विपक्ष को इसकी आशंका है। खास तौर पर जब सरकार राजनीतिक प्रतिशोध में लगी है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि ईडी सरकार गिराने का हथियार बन गया है। पूर्व सांसद आनंद शर्मा ने कहा, ‘यह काफी परेशान करने वाला है कि कानून ज्यादा कठोर हो रहा है जो संविधान में दिए मौलिक अधिकारों के लिए खतरा बन रहा है। यह सब कांग्रेसियों की निराशा का परिचायक है।

सर्वोच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय से देश में मची राजकोष की लूट और कालाधन संचय की प्रवृत्ति को जबरदस्त धक्का लगेगा। इसमें ममता बनर्जी के काबीना मंत्री पार्थ चटर्जी तथा तृणमूल नेत्री अर्पिता भी प्रभावित होंगी।

फिलहाल सोनिया गांधी और राहुल गांधी तथा कांग्रेस पार्टी का संकट गहरायेगा। उनकी पार्टी के सत्याग्रह अब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दुराग्रह कहलायेगा। सोनिया गांधी जो प्रधानमंत्री पद की दावेदार रहीं है को प्रवर्तन निदेशालय गत सप्ताह तीन दिनों की जांच में करीब सौ प्रश्न पूछे। पचास घंटे की हाजिरी रही। अब यह स्पष्ट हो गया कि माता-पुत्र ने जो वक्तव्य ईडी को दिया है वह कोर्ट में विधिवत मान्य होगा। सबूत बनेगा। राष्ट्र संपत्ति का सर्वाधिक लाभ यह होगा कि अब विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे लुटेरों को भी दंड मिलेगा।

इस महत्वपूर्ण निर्णय से अब देश के छुट्टा घूम रहे, लगातार जनधन पर डाका डाल रहे, पेशेवर आर्थिक अपराधियों पर राज्य का शिकंजा कसेगा। इसके अंतर्गत मियां अफजाल अंसारी और मियां मुख्तार अंसारी से लेकर सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी तक अभियुक्त होंगे। अपराध प्रमाणित होने पर गंभीर दण्ड के भागी होंगे।

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