आश्रम व्यवस्था का दूसरा नाम अनुशासन-व्यवस्था



बूंदी-राजस्थान,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

राजकीय महाविद्यालय, बूंदी के संस्कृत विभाग द्वारा आईक्यूएसी के तत्वावधान में शुक्रवार दिनांक 11 फरवरी 2022 को ‘‘महाकवि कालीदास एवं आश्रम व्यवस्था : वर्तमान परिप्रेक्ष्य में‘‘ विषय पर अन्तर्जालीय राष्ट्रीय वेबीनार प्रातः 11.00 बजे आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतीश सारस्वत ने की।

संगोष्ठी के समन्वयक संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. पूर्णचन्द्र उपाध्याय ने बताया कि मुख्य अतिथि के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत साहित्यकार केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रोफेसर राधावल्लभ त्रिपाठी ने अपने बीज-भाषण में संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समाज को महाकवि कालिदास का संदेश यह है कि आश्रम व्यवस्था समाज को मनोवैज्ञानिक स्तर पर अनुशासित करने का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण तत्त्व है।

संगोष्ठी के विषय विशेषज्ञ के रूप में श्री लाल बहादुर शास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के साहित्य विभागाध्यक्ष प्रोफेसर भागीरथि नन्द एवं केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (जयपुर परिसर) के प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डे ने अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।

अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतीश सारस्वत ने कहा कि हमारे राष्ट्र की अस्मिता का आधार है भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत साहित्य। अतः वर्तमान युग में भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत साहित्य का अध्ययन वर्तमान समय में नितान्त उपादेयपूर्ण है। 150 से अधिक प्रतिभागियों ने चर्चा सत्र में बढ़-चढ़कर भाग लेकर अपनी अभिव्यक्तियां प्रस्तुत की।

संगोष्ठी का संचालन संस्कृत विभाग की सह आचार्य डॉ. सीमा चौधरी ने किया एवं धन्यवादार्पण आयोजन समिति के सचिव डॉ. दिनेश कुमार शुक्ल ने किया। संगोष्ठी के सफल आयोजन में संस्कृत विभाग के संकाय सदस्य डॉ. प्रतिभा किरण, डॉ. के.के.गोठवाल, सीता गहलोत, डॉ. मीरा गुप्ता एवं डॉ. दिलीप कुमार राठौड़, हेमलता टांक, डॉ. सविता चौधरी, तकनिकी सहायक दिलशाद शेरवानी एवं अब्दुल वहाब ने अपनी सराहनीय भूमिका निभाई।

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