राहुल गांधी की छत्तीसगढ़ के किसान से मुलाकात को लेकर उठ रहे सवाल



--विजया पाठक (एडिटर- जगत विज़न),
रायपुर-छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ राहुल गांधी से मुलाकात कहीं फिक्स तो नहीं?

■ क्‍या इस स्‍तर पर भी जा सकती है भूपेश सरकार?

■ सीएम के खास अफसरों की फेहरस्‍ती में होते कारनामें

छत्‍तीसगढ़ की भूपेश सरकार में नित नये कारनामें सामने आते रहते हैं। कहा जा सकता है कि सरकार और कारनामों का चोली दामन का साथ है। किसी न किसी मामले में सरकार की किरकिरी होती रहती है। नया मामला हाल ही में छत्तीसगढ़ के ग्राम रंगाकठेरा के किसान भागवत वर्मा मां वैष्णो देवी के दर्शन करने परिवार के साथ जम्‍मू पहुंचा था। उसी दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी भी मां वैष्णो देवी के दर्शन करने पैदल पहुंचे थे। इसी दौरान किसान परिवार की राहुल गांधी से मुलाकात हो गई। बस फिर क्या था। राहुल ने उन्हें अपने पास बिठाया और उनके साथ कुछ समय बिताया। राहुल से मिलकर किसान परिवार काफी खुश हुआ। राहुल ने भी काफी सहज अंदाज में उनसे बात की और कुछ समय उनके साथ बिताया। बातों ही बातों में किसान ने राहुल को बताया कि हाल ही में उसने एक गाड़ी खरीदी है। जो उसने गोबर बेचकर खरीदी है। किसान ने कहा हमर सरकार बहुत अच्छा काम करत हे। किसान ने राहुल गांधी से कहा कि अभी सरकार को सिर्फ ढाई साल ही हुए हैं, भूपेश सरकार किसानों, वनवासियों के लिए बहुत अच्छा काम कर रही है। भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को 6 हजार रुपए दे रही है। किसान की इन सभी बातों से लग रहा है कि वह एक पटकथा को वाच रहे थे। क्‍योंकि सभी जानते हैं कि वर्तमान समय में प्रदेश के हालात सभी क्षेत्रों- अवैध शराब का कारोबार, भ्रष्‍टाचार, सरकार की मनमानी जैसे मामलों में किस तरह के हालात बने हुए हैं। लोगों ने बहुत तरीके के टूरिज्‍म के बारे में सुना होगा पर नकली डवलपमेंट टूरिज्‍म पहली बार भूपेश बघेल और उनके साथियों ने कर दिखाया। अपने सर्वोच्‍च नेता के धार्मिक यात्रा के दौरान उनको ट्रेक करना उसमें प्रायोजित लोगों से साक्षात्‍कार कराकर अपने राज्‍य की स्‍कीम का बखान करना क्‍या कांग्रेस पार्टी का स्‍तर इतना गिर जायेगा। निश्चित ही जहां भाजपा और उनके सहयोगी धर्म को लेकर गांधी परिवार के पीछे रहते हैं ऐसे में राहुल गांधी की अपनी निजी धार्मिक यात्रा को भी भूपेश बघेल की बचकानी हरकत के कारण यात्रा को मजाक बना दिया।

कैसा संयोग है कि छत्‍तीसगढ़ के ग्राम रंगाकठेरा के किसान भागवत वर्मा को 11 जून 2021 को सरकारी अधिकारी मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल से वर्चुअल मीटिंग में लाए थे। वही किसान अब वैष्‍णोदेवी मंदिर में टकरा गए। अब सवाल उठ रहे हैं कि ये संयोग है या फिर जानबूझकर बनाया गया अवसर है। कहा जा रहा है कि पूरा मामला फिक्स था और ब्रांडिंग का प्रयास किया गया है। जिस तरह से एक किसान के साथ राहुल गांधी की अचानक मुलाकात होती है और उसी किसान से कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मिलते हैं। यह किस तरह का संयोग है, यह समझ से परे है। प्रदेश सरकार राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ के दौरे का इंतजार कर रही है।

बड़ी सोचनीय बात है कि प्रदेश सरकार इस स्‍तर पर भी जा सकती है। सरकार अपनी ब्रांडिंग करने के लिए कुछ भी कर सकती है। फिर भी यह बात भी सोचनीय है कि जिस किसान को राहुल गांधी से मिलवाया या मिला उससे सरकार क्‍या बताना चाहती है? आखिर भूपेश बघेल, राहुल गांधी की आंखों में कब तक धूल झोंकते रहेंगे। ऐसी झूठी वाहवाही करवाकर या गलत जानकारियां प्रसारित कर अपने आपको सुरक्षित करना चाहते हैं लेकिन सीएम की चालाकियों को राहुल गांधी को समझना होगा। क्‍योंकि जब राहुल गांधी को सच्‍चाई का पता चलेगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

यदि किसान का राहुल से मिलना संयोग नहीं है तो बड़े ही निंदनीय बात है। वैसे कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अपनी ब्रांडिंग में इस तरह छूटी वाहवाही लूटने के चक्‍कर में इस स्‍तर पर नही गिरना चाहिए। यह सरासर अशोभनीय है। एक प्रदेश की सरकार के लिए यह शर्म की बात कहीं जा सकती है।

सब जानते हैं कि प्रदेश सरकार को इस समय 4-5 अधिकारियों की तूती बोल रही है। पत्रकार विनोद वर्मा, अधिकारी सौम्या चौरसिया, पत्रकार रूचिर गर्ग, आइएएस अफसर अनिल टुटेजा और आलोक शुक्‍ला, इन पॉचों का अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रष्‍टाचार और विवादों से गहरा नाता रहा है। विनोद वर्मा की बात करें तो इनका नाम प्रदेश के पूर्वमंत्री राजेश मूणत की फर्जी अश्लील सीडी कांड में सामने आया है। इनके संरक्षण में ही फर्जी सीडी कांड का घिनौना खेल खेला गया था। यह कांड काफी चर्चित हुआ था। दूसरा नाम आता है सौम्या चौरसिया का। सौम्या चौरसिया वह महिला अधिकारी हैं जिन्हें इस समय सुपर सीएम कहा जा रहा है। मतलब साफ है कि सीएम भूपेश बघेल इस महिला अफसर की सलाह के बगैर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाते हैं। कई महत्वपूर्ण फैसलों में सौम्या चौरसिया का सीधा दखल होता है। वह चाहे प्रशासनिक हों या व्यक्तिगत हों। सीएम भूपेश बघेल और सौम्या चौरसिया के काफी करीबी रिश्ते हैं। तीसरा नाम आता है रूचिर गर्ग का। रूचिर गर्ग वहीं शख्‍स हैं जिन्हें कभी अपनी गलत हरकतों की वजह से नवभारत और नई दुनिया प्रेस से निकाला गया था। वर्तमान में यह सीएम के मीडिया सलाहकार बने हुए हैं और गलत सलत सलाह देकर सरकार की और सीएम की छबि धूमिल करने पर तुले हुए हैं। यह बात भूपेश बघेल को समझ नहीं आ रही है। चौथा नाम आता है अनिल टुटेजा का। अनिल टुटेजा छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाले के प्रमुख आरोपी रहे हैं। यह घोटाला 35 हजार करोड़ का था और अनिल टुटेजा की भूमिका संदिग्ध थी। वर्तमान में टुटेजा सीएम बघेल के चहेते अफसरों में शुमार हैं और महत्वपूर्ण विभाग का मुखिया बना दिया है। पांचवा नाम आता है डॉ. आलोक शुक्‍ला का। राज्य सरकार ने डॉ. शुक्ला को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव की महती जिम्मेदारी दी है। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणु जी पिल्लै थी, जो बहुत ईमानदार और साफ स्‍वच्‍छ छबि वाली महिला अफसर हैं। डॉ. शुक्ला ने कोरोना काल में जमकर भ्रष्‍टाचार किया और महत्‍वपूर्ण विभाग का मुखिया होने के बावजूद कोरोना महामारी को काबू करने में असमर्थ रहे।

खैर, सत्ता संघर्ष के बीच वैष्णो देवी मंदिर के रास्ते में किसान का मिलना और उनसे बातचीत ने एक और सियासी विवाद को जन्म दे दिया है। किसान की मुलाकात का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। इंटरनेट मीडिया में राहुल गांधी और किसान वर्मा की मुलाकात की तस्वीर वायरल कर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। वायरल पोस्ट में रोचक बातें भी लिखी जा रही हैं।

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