साहित्य अकादमी की संस्कृत युव-साहिती कार्यक्रम में राजस्थान के दो रचनाकारों का प्रतिनिधित्व



नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

साहित्य अकादमी नई दिल्ली के तत्त्वावधान में गुरुवार 10 जून को आयेजित संस्कृत साहित्यकारों की युवसाहिती कार्यक्रम में राजस्थान से आमंत्रित दो संस्कृत साहित्यकारों ने प्रतिनिधित्व किया। कोटा से कथाकार डॉ. पूर्णचन्द्र उपाध्याय ने स्व रचित संस्कृत कहानी पाठ एवं जालोर से कवि डॉ. प्रवीण पण्ड्या ने कविता पाठ किया। साहित्य अकादमी द्वारा आन्तर्जालिक साहित्य व्याख्यानमाला के अन्तर्गत राष्ट्रिय युवसाहिती कार्यक्रम आयेजित हुआ।

डॉ. पूर्णचन्द्र उपाध्याय ने सम सामयिक घटना पर आधारित अपनी संस्कृत कथा ’वरमेको गुणी पुत्रः’ का ससमीक्षण पाठ किया। कथा में वर्तमान की सामाजित स्थिति को विषय बना कर लोक चेतनात्मक संदेश प्रेषित किया गया है।

चर्चित संस्कृत कवि डॉ. प्रवीण पण्ड्या ने समकालिक बोध से जुड़ी चार संस्कृत कविताएं पढीं। कविता ’खेचराः! शुभा वः पन्थानम्’ में जीवन की उड़ान और उसकी बाधाओं को विषय बनाते हुए दुविधा की स्थिति में दूरवाणी की जगह अन्तर्वाणी को खडखडाने का आह्वान किया गया।

महाराष्ट्र की पूर्णिमा कलेकर ने ग्रन्थ समीक्षा की।

उत्तराखण्ड से डॉ. कीर्तिवल्लभ शक्टा ने अपने मधुर स्वर में लयबद्ध देवस्तुति परक कविताओं एवं राष्ट्र वन्दना का पाठ किया।

कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन अकादमी के उपसचिव डॉ. एन. सुरेश बाबू ने किया।

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