खिलौनों के निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बनेगा टॉयकैथॉन: डॉ• मनीष अरोड़ा



वाराणसी-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

भारत का खिलौना बाजार लगभग 1.5 बिलियन अमरीकी डालर का है, परंतु विडंबना ये है कि इसके बड़े हिस्से पर विदेशों से आयातित खिलौनों का ही प्रभुत्व ज्यादा है। वैश्विक स्तर शतरंज, लूडो, सांप और सीढ़ी जैसे प्रसिद्ध खेलों की जन्मभूमि होने के बावजूद भी आज भारत खिलौनों के अग्रणी निर्माताओं में से नहीं है। वैश्विक स्तर तो छोड़िये देश में भी बिकने वाले अधिकांश खिलौने भारतीय विरासत, सभ्यता और मूल्य प्रणालियों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। इस परिदृश्य के मद्देनज़र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत ‘टॉयकैथॉन-2021’ की कल्पना की गई है।

टॉयकैथॉन-2021 अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, महिला और बाल विकास मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सहयोग से शिक्षा मंत्रालय के नवाचार प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित एक अंतर-मंत्रालयी पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय सभ्यता, इतिहास, संस्कृति, पौराणिक कथाओं और लोकाचार पर आधारित खेल एवं खिलौनों की अवधारणा विकसित करने, खेल एवं खिलौनों के उत्पादन में नवोन्मेष के लिए भारत के युवा मेधा के नवोन्मेषी दिमागों को चुनौती देने उद्देश्य के लिए की गई है।

भारत को खेल-खिलौनों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की कड़ी में टॉयकैथॉन-2021 के माध्यम भारत में छात्रों, शिक्षकों, स्टार्ट-अप और खिलौना विशेषज्ञों/पेशेवरों के लिए अपने नवीन खिलौने/खेल अवधारणाओं को प्रस्तुत करने मौका प्रदान किया जा रहा है। इस योजना में बड़ी संख्या में लोगों के विचार आयें इसके लिए 50 लाख रुपये तक के पुरस्कार राशि का भी प्रवाधान किया गया है।

इस कड़ी में देशव्यापी स्तर पर 4 जून को एक ऑनलाइन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन भी किया जा रहा है। जिसमें देश भर से जुड़े प्रतिभागियों को विभिन्न सत्रों में - खिलौनों और खेलों में भारतीय संस्कृति का परिचय; खेल-खिलौनों में खेल तत्व; एक खिलौने के डिजाइन और तत्व; खेल-खिलौनों का विकास और निर्माण; खेल-खिलौनों का विपणन और बौद्धिक संपदा आदि विषयों पर डिजाईन पेशेवरों द्वारा प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस प्रशिक्षण शिविर में देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में शुमार नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिजाईन एवं बीएचयू के दृश्य कला संकाय के प्राध्यापकों के अलावा उद्योग जगत के विशेषज्ञ एवं स्वतंत्र आर्टिस्टों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। सिर्फ बीएचयू के दृश्य कला संकाय से सहायक प्राध्यापक डॉ. मनीष अरोड़ा, शोधार्थी शिवांगी गुप्ता, श्रृष्टि प्रजापति के अलावा पुरातन छात्र राहुल कुमार साव, अंकित श्रीवास्तव आदि कई सत्रों में प्रशिक्षण देंगे। उद्योग जगत से जुड़े पेशेवरों में पद्मजा सिंह, शुभी अग्रवाल के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिजाईन के ऑस्टिन डेविस एवं श्रृष्टि मनिपाल कला, डिजाईन एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के बिक्रम पाल आदि विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे।

टॉयकैथॉन-2021 के बारे में बताते हुए बीएचयू के नवाचार सेल के संयोजक डॉ. मनीष अरोड़ा ने बताया कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि देश में खेल-खिलौनों के निर्माण एवं उत्पादन को गति देने के लिए शिक्षा मंत्रालय के नवाचार प्रकोष्ठ ने जो योजना बनायी है उसमें देश भर से जुड़े प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने में बीएचयू के दृश्य कला संकाय से जुड़े नए-पुराने विद्यार्थियों को अग्रणी भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है। समाज के तमाम क्षेत्रों के उत्थान में बीएचयू ने हमेशा से अग्रणी भूमिका निभायी है। हमें पूरी आशा है कि टॉयकैथॉन-2021 के माध्यम से हम भारत को खेल-खिलौनों के निर्माण एवं उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में सफल होंगे।

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