कोरोना संक्रमण में राज्य को नंबर 1 बनाना चाहते हैं भूपेश बघेल



--विजया पाठक (एडिटर- जगत विजन),
रायपुर-छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ राज्य में हर दिन होती सैकड़ों मौतों का जिम्मेदार कौन?

■ कोरोना संक्रमण को रोकने में असफल साबित हुई भूपेश सरकार

■ क्रिकेट टूर्नामेंट से बिगड़े प्रदेश के हालात, टूर्नामेंट में जुटी थी लाखों की भीड़

■ असम के 12 कांग्रेस प्रत्याशियों को भूपेश ने रायपुर में डलवाया डेरा?

देश में कोरोना वायरस की वजह से महाराष्ट्र के बाद जिस राज्य में सबसे ज्यादा स्थिति खराब है, वो है छत्तीसगढ़। यहां हर रोज आने वाले नए मामले रिकॉर्ड स्थापित कर रहे हैं और मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। दोनों ही मामलों में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के बाद दूसरे नंबर पर है। देशभर में कोरोना संक्रमण के खिलाफ वैक्सीनेशन कार्यक्रम तेजी से चलाया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ देश में कोरोना संक्रमण के मामले दिन व दिन बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ भी खुद को बचा नहीं सका है। राज्य में हालात ये हैं कि आए दिन लोगों की मौतें होने का सिलसिला जारी है। छत्तीसगढ़ में कोरोना बेकाबू होता नजर आ रहा है। प्रदेश में हर दिन हजारों लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हो रही है। इसके साथ ही राज्य में इस वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर साढ़े 04 लाख से अधिक हो गई है।

देश में कोरोना वायरस की वजह से महाराष्ट्र के बाद जिस राज्य में सबसे ज्यादा स्थिति खराब है, वो है छत्तीसगढ़। यहां हर रोज आने वाले नए मामले रिकॉर्ड स्थापित कर रहे हैं और मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। 10 अप्रैल को राज्य में 14,098 नए मामले सामने आए थे, जो कि एक दिन में अब तक सबसे ज्यादा थे। वहीं 123 लोगों की मौत हुई, जो कि एक रिकॉर्ड है। दोनों ही मामलों में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के बाद दूसरे नंबर पर है। राज्य में वायरस से अब तक कुल 4777 लोगों की मौत हुई है। 1 अप्रैल को राज्य में 4600 से ज्यादा नए केस सामने आए थे, जो कि अब 10 दिन में ही 14 हजार से ज्यादा हो गए। लगातार कोरोना मरीजों की हो रही मौतों से बेखबर राज्य सरकार अपनी दुनिया में मस्त है। राज्य के मुखिया भूपेश बघेल को न राज्य की जनता की और न ही उनके स्वास्थ्य की चिंता है। तभी वो कोरोना संक्रमण को रोकने की दिशा में उचित कदम नहीं उठा रहे हैं।

यह बात भी सच है कि प्रदेश में कोरोना के हालात सबसे ज्यादा उस समय से बिगड़े हैं जब रायपुर में क्रिकेट टूर्नामेंट हुआ था। इस टूर्नामेंट में लाखों की संख्या में लोग जुटे थे। कोरोना का यह पीक समय था। यदि इस समय ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सतर्क हो जाते और इस ओर ध्यान दे देते तो शायद आज यह हालात नही होते। इस टूर्नामेंट ने प्रदेशवासियों को बहुत बड़े संकट में डाल दिया है। निश्चित तौर पर इसके जिम्मेदार भूपेश बघेल हैं। वहीं वह टूर्नामेंट में मैच देखने के दौरान पूरे समय बिना मास्क के रहे। सीएम खुद बिना मास्क के रहे तो आमजन भी बेफिक्र रहे। दूसरी तरफ सीएम लोगों से मास्क पहनने की अपील भी कर रहे हैं लेकिन खुद नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं भूपेश सरकार ने अब तक प्रदेश में रेमडेसिवीर इंजेक्शन की व्यवस्था तक नहीं की है। जहां हर दिन राज्य को 10 हजार डोज की आवश्यकता बताई जा रही है वहीं, राज्य में इंजेक्शन सप्लाई की व्यवस्था पूरी तरह ठप है। बावजूद उसके पिछले दिनों भूपेश सरकार ने प्रदेश में रोड सेफ्टी क्रिकेट टूर्नामेंट, राज्य कुंभ जैसे बड़े आयोजन कर लाखों लोगों की भीड़ होने दी और खुद की आंख पर पट्‌टी बांध रखी। बताया जा रहा है कि सरकार का पूरा फोकस इस समय धन बटोरने में है।

आंकड़े बताते हैं कि पिछले सप्ताह में कोरोना से चार दर्जन से अधिक व्यक्तियों की मौतें हुई, जबकि फरवरी माह में एवं मार्च के पहले सप्ताह में 27-29 प्रति सप्ताह मौत हुई थी। जनवरी के अंतिम सप्ताह में 43 लोगों की मौत हो गई। वहीं, दुर्ग जैसे शहर में शमशान घाट में अंतिम संस्कारों के लिए लाइन लगी पड़ी है और 200 से अधिक मृतक शरीर अंतिम संस्कार की प्रतिक्षा सूची में हैं। ये आंकड़े बता रहे हैं कि राज्य सरकार संक्रमण को रोकने में बुरी तरह से असफल हुई है।

भूपेश बघेल को चाहिए कि वो खुद उच्च स्तरीय सवर्दलीय कमेटी गठित करें, विपक्षी नेताओं से भी सलाह मशवरा कर सकते हैं। क्‍योंक‍ि यह समय संकट का है। पूूूरा प्रदेश संकट में है। इसमें क्‍या पक्ष और क्‍या विपक्ष। सबको मिलकर इस संक्रमण को रोकना होगा। वहीं संक्रमण किसी एक पार्टी या सरकार से नहीं रोका जा सकता है इसके लिए सभी दलों के नेताओं को एकजुटता दिखानी होगी। खासतौर से भूपेश बघेल को अपने सलाहकार सदस्यों की बातों को गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि संक्रमण के इस गति में ब्रेक लगाया जा सके।

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से अभी तक संक्रमण को रोकने के लिए कोई कड़े कदम नहीं उठाए गए। अगर भूपेश बघेल एंड कंपनी राज्य में शुरूआती दौर में ही संक्रमण को रोकने कोई कड़े कदम उठा लेती तो आज राज्य की जनता की हालत ऐसी नहीं होती। अस्पताल हो या फिर घर हर जगह संक्रमित लोग परेशान हैं और सरकार लोगों की परेशानी से पूरी तरह अंजान। अस्पतालों में न तो पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही लोगों को संक्रमण के प्रति जागरूक करने का कोई प्लान। अगर सरकार ने इस कैजुअल एप्रोच के साथ संक्रमण रोकने की कोशिश की तो वो दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ राज्य देश के सबसे ज्यादा संक्रमण वाले राज्यों की सूची में नंबर वन पर होगा।

● स्वास्थ्‍य मंत्री टीएस सिंहदेव को अंधेरे में रख रहे मुख्यमंत्री

प्रदेश में बढ़ते कोरोना के मामले को लेकर स्वास्य् को मंत्री टीएस सिंहदेव काफी चिंतित हैं और हर पल इस महामारी से बचाव के कारणों पर कार्य कर रहे हैं। लेकिन इसे बिडंबना ही कहेंगे कि एक तरफ जहां स्वास्थ्‍य मंत्री अपने स्तर पर कोरोना की स्थिति में सुधार के लिए प्रयासरत हैं वहीं प्रदेश के मुख्य्मंत्री भूपेश बघेल कोरोना को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं दिख रहे हैं। इस विकट परिस्थिति में भी वह प्रदेश के बाहर रहने में मस्त हैं। सब जानते हैं कि इस समय प्रदेश में कोरोना भयानक स्थिति में पहुंच चुका है। दिन प्रतिदिन हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री अपने सहयोगी स्वास्‍थ्‍य मंत्री को अंधेरे में रखने की कोशिश करते हैं। कोरोना की सही जानकारी तक मुहैया नहीं कराते। जिस कारण से स्वास्य्री मंत्रालय द्वारा किये जाने वाले कार्य बाधित हो रहे हैं। इस तरह की कार्यशैली तो निश्चित तौर पर प्रदेश के हित में नहीं हैं और कोरोना संक्रमणों की स्थिहति और बिगड़ेगी।

● असम के 12 कांग्रेस प्रत्याशी रायपुर में?

विश्वीस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि असम में कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़े 12 प्रत्याशियों को प्रदेश में रूकवाया गया है। ये प्रत्याशी भटगांव और रायपुर के व्हीआईपी रोड स्थित होटल में रूके हैं। मतलब साफ है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का अभी भी सारा ध्यान सियासत की पैतरेबाजी पर है। जबकि प्रदेश में कोरोना के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें राज्य में बिगड़ रहे हालात पर होना चाहिए था लेकिन वह नेताओं की आवभगत में लगे हैं। यह संवेदनशीलता का काला चेहरा है। प्रदेश की जनता ऐसी असंवेदनशीलता को कहां तक बर्दाश्त करेगी।

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