बिहार में पहले की तुलना में आज नाटेपन में 5.4 फीसदी हुआ सुधार



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

कद और काठी को लेकर लोगों को हमेशा चिंता रहती है। सभी को लगता है कि व्यक्ति की लंबाई अच्छी हो। अगर बिहार की बात करें तो यहां लोगों की औसत ऊंचाई जहां पहले कम थी वही अब ऊंचाई बढ़ने लगी है। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 में यह बात निकलकर सामने आई है कि बिहार में अब लोगों के नाटेपन में तेजी से सुधार आया है। बिहार में पहले की तुलना में आज नाटेपन में 5.4 फीसदी की कमी आई है।

2015-16 में बिहार के 48.3 प्रतिशत बच्चे नाटेपन का शिकार थे वहीं अब ये दर घटकर 42.9 फीसदी रह गया है। पिछले चार सालों में बच्चो के नाटेपन में तेजी से सुधार हुआ है, हालांकि अब भी 43 प्रतिशत बच्चों में नाटापन है पर इसमें तेजी से हो रहा सुधार लोगों के लिए अच्छा संकेत है।

बिहार के बच्चों में नाटेपन को लेकर सबसे चिंताजनक आंकड़े सामने आए थे। 2005 के आंकड़ों की अगर बात करें तो बिहार में 55.6 प्रतिशत बच्चे नाटेपन का शिकार थे। नीतीश कुमार ने 2005 में मुख्यमंत्री पद संभालने के साथ ही इस पर तेजी से कम करना शुरू किया। सभी जिलों में तेजी से पोषण अभियान चलाना शुरू हुआ। बच्चो में पोषण को लेकर सालों भर लगातार सघन अभियान चलाया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों पर दूध के साथ अंडे भी दिए गए। पिछले 15 सालों में लगातार अभियान का नतीजा है कि आज नाटेपन में 12.7 फीसदी की कमी आई है। आज आंकड़ा 55.6 प्रतिशत से घटकर 42 प्रतिशत तक आ पहुंचा है।

अगर जिलों की बात करे तो सीतामढ़ी और शेखपुरा में नाटेपन का औसत आज सबसे ज्यादा है। सीतामढ़ी में जहां 54.2 प्रतिशत तो शेखपुरा में 53.6 प्रतिशत नाटापन आज भी है, वहीं गोपालगंज और शिवहर की सबसे बेहतर स्थिति है। गोपालगंज में 34.2 प्रतिशत तो शिवहर में 34.4 प्रतिशत ही नाटापन है।

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