436 करोड़ रुपये कीमत के माल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे के लिए फर्जी रसीदें जारी करने वाली फर्म का भंडाफोड़



नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

सेंट्रल जीएसटी दिल्ली पूर्वी आयुक्तालय के कर वंचना अधिकारियों ने सर्कुलर कारोबार के एक प्रमुख संचालन का भंडाफोड़ किया है। इसके तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट के फर्जी पुनर्भुगतान के लिए फर्जी रसीदों का इस्तेमाल किया जाता था। आसिफ खान, राजीव चटवाल और अर्जुन शर्मा 17 फर्जी फर्म चला रहे थे और इन लोगों ने बिना माल की आपूर्ति के रसीदें हासिल की थीं। इस तरह इन लोगों ने 436 करोड़ के बराबर फर्जी तौर पर आईटीसी को प्राप्त कर लिया था। गलत आधार पर प्राप्त की गई आईटीसी द्वारा इन लोगों ने 11.55 करोड़ रुपये के पुनर्भुगतान के लिए दावा किया था। आरोपित व्यक्तियों ने फर्जी फर्मों द्वारा भी पुनर्भुगतान का दावा किया था।

आरोपित व्यक्तियों का एक-दूसरे के साथ वैवाहिक संबंध भी है और वे पिछले एक महीने से जांच से बच रहे थे। जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि आरोपित व्यक्ति कुछ बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से हवाला कारोबार में भी लिप्त थे। इन बैंक कर्मचारियों की भी जांच चल रही है। ऊपर जिन 17 फर्मों का उल्लेख किया गया है, वे सिर्फ कागज पर हैं और उनका इस्तेमाल फर्जी रसीदें बनाने को आईटीसी के लिए किया जाता था। दोनों तरफ लेनदेन करने वाली कंपनियों, प्राप्तकर्ता और आपूर्तिकर्ता का कोई अता-पता नहीं है।

धनशोधन के मामले में आरोपित व्यक्तियों से प्रविष्टियां पाने वाले कुछ व्यापारियों की भी जांच चल रही है। यह भी पता लगा है कि पुराने वैट कानून के दौरान भी आसिफ खान इसी तरह की गतिविधियों में लिप्त रहा है। यह भी पता लगा है कि ये तीनों आरोपित व्यक्ति पकड़े जाने के समय अपनी गतिविधियां अन्य राज्यों में फैलाने की भी योजना बना रहे थे।

आसिफ खान, राजीव चटवाल और अर्जुन शर्मा जानबूझकर सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132(1)(बी) और धारा 132 (1)(सी) के तहत अपराध कर रहे थे। यह अपराध सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132 (5) के प्रावधानों के तहत संज्ञेय और गैर-जमानती है तथा अधिनियम की धारा 132 की उपधारा (1) के खंड (i) के तहत सजा योग्य है। यह भी पता लगा है कि आरोपित व्यक्तियों ने अधिनियम की धारा 132(1)(ई) के तहत भी अपराध किया है।

इस अपराध के लिए उपरोक्त व्यक्तियों को सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 (1) के तहत 1 मार्च, 2020 को गिरफ्तार किया गया और पटियाला हाउस कोर्ट के चीफ-मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने तीनों को 13 मार्च, 2020 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

इस मामले में आगे जांच चल रही है।

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