भारत पर इस्लामी मलेशिया की प्रेतछाया



--के• विक्रम राव,
अध्यक्ष - इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स।

भारत-शत्रु महतिर बिन मुहम्मद को मलेशिया के प्रधान मंत्री पद से 1 मार्च 2020 की शाम को हटा दिया गया। सुलतान अहमद शाह ने कुआलालम्पुर में डॉ• मुहिउद्दीन बिन हाजी मुहम्मद यासीन को प्रधान मंत्री पद की शपथ दिला दी। चौरानवे –वर्षीय महतिर साठ वर्षों तक दो किश्तों में प्रधान मंत्री रहे।

पिछले दिनों अपनी इस्लामाबाद की यात्रा पर महतिर ने कहा था कि कश्मीर पर मोदी सरकार ने कब्ज़ा कर लिया है। उन्होंने इस्लामिक राष्ट्रों को संगठित कर भारत के खिलाफ मुहिम चला दी। गत वर्ष महतिर ने मुम्बई के इस्लामी प्रचारक डॉ• जाकिर नाईक के प्रत्यर्पण वाली भारत की माँग को ठुकरा दिया था। डॉ• जाकिर नाईक पीस टीवी के मालिक, सलाफी कट्टर इस्लामी रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक तथा लश्करे तैय्यबा और जैशे मोहम्मद से जुड़े हैं। डॉ• नाईक को लखनऊ के फिरंगी महली, शहर काजी मुफ़्ती अब्दुल्ला इरफान मियां और देवबंद दारुल उलूम के उलेमाओं ने राष्ट्रघाती करार दिया था। मुंबई के रेल विस्फोट (11 जुलाई 2006) में डॉ• नाईक के शिष्यों का हाथ था। इसमें 189 यात्री मारे गए थे।

महतिर द्वारा भारत के विरुद्ध विषवमन के प्रतिरोध में मोदी सरकार ने मलेशिया से ताड़ के तेल का आयात ढाई लाख टन से घटाकर सत्तर हजार कर दिया है। विश्व का दूसरे नम्बर का ताड़ के तेल का उत्पादक मलेशिया है। यहाँ पर्यटकों की बड़ी संख्या भारतीय है। मगर वे चीन के वायरस की बीमारी के कारण अब घट गए हैं।

महतिर मुहम्मद अपने युवाकाल में भारत के सुहृद थे। उन्हें पी• वी• नरसिम्हा राव सरकार ने 1993 में जवाहरलाल नेहरू अंतर्राष्ट्रीय एवार्ड से नवाजा था। मलेशियायी कम्युनिस्टों का सफाया करने में भी भारत ने उनकी मदद की थी। मलेशिया में भारतवंशी बड़ी संख्या में नागरिक हैं। उनके पुरखों को ब्रिटिश सरकार रबर खेत मजदूर के रूप में ले गई थी। उन्हीं में तमिलनाडु से एक सुन्नी युवा भी गया था। इसने मलेशियायी महिला से विवाह किया। उसके पुत्र हुए मोहम्मद सिकंदर जो महतिर मुहम्मद के पिता थे। अर्थात् आंशिक रूप से महतिर भारतवंशी हैं। तमिल में महतिर नाम ‘महातीर’ (बड़ा बाण) का अपभ्रंश है।

हाल के वर्षों में पाकिस्तान से इस्लाम के कारण मलेशिया की दोस्ती बढ़ी तो महतिर को निशान-ए-पाकिस्तान (भारत रत्न के समकक्ष) से गत वर्ष इमरान खान ने नवाजा था।

प्रारंभ में सेक्युलर समतामूलक चिंतनवाले महतिर शनैः शनैः कट्टर इस्लामी हो गए। तुर्रा यह था कि कभी उन्होंने मुस्लिम महिलाओं का खतना, जो पाकिस्तान में कानूनन मान्य है, का जबरदस्त विरोध किया था। अपनी इस्लामाबाद यात्रा पर प्रधान मंत्री महतिर ने लाहौर में एक पत्रकार –वार्ता में कहा था कि पाकिस्तान की भांति मलेशिया “जाहिल हुदूद कानून” का पालन नहीं कर सकता है। (“न्यूज़वीक पाकिस्तान” के संपादक खालिद अहमद: इंडियन एक्सप्रेस : 4 जुलाई 2015)। मगर आज तिरानवे प्रतिशत मलेशियायी मुस्लिम महिलाओं का सुन्नते-इब्राहिम किया जाता है। (दैनिक एक्सप्रेस ट्रिब्यून, पाकिस्तान : 20 फरवरी 2015)।

मलेशिया में भी अहमदिया, शिया और इस्माइली मुसलमानों का संहार हो रहा है। कभी महतिर प्रशंसा करते थे मोहम्मद अली जिन्ना की कि वे मुस्तफा कमाल पाशा अतातुर्क की आत्मकथा को तकिये के नीचे रख कर सोते थे। सेक्युलर, क्रांतिकारी नेता कमाल पाशा ने आलमी इस्लाम के खलीफा हालीफ अब्दुल माजिद अफ़ेण्डी को (3 मार्च 1924) अपदस्थ कर दिया था। तुर्की को एक पंथनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किया था। आलमी इस्लाम का मरकज इस्ताम्बुल ख़त्म कर दिया गया। हालाँकि ईराक में एक सिरफिरे मुसलमान अबू बक्र अल-बगदादी ने अपने को खलीफा घोषित कर दिया था। वह सीरिया में अमरीकी सैनिकों द्वारा गत वर्ष मारा गया। अहमदाबाद में 24 फरवरी 2020 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसकी पुष्टि भी की थी। अबू बक्र जिहादी था और उसका अगला घोषित निशाना कश्मीर था।

किन्तु महतिर जैसे कट्टर इस्लामिस्ट अब भारत के लिए बड़ा खतरा हैं। उन्होंने भारतीय संसद द्वारा पारित नागरिक संशोधन कानून की खुले आम भर्त्सना की। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी आलोचना में कहा था कि महतिर भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं। गौरतलब बात है।

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