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नई दिल्ली, 30 अगस्त 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ पर्यावरण मंत्री ने भारत के राष्‍ट्रीय आरईडीडी+ रणनीति जारी की

जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्री डॉ• हर्षवर्धन ने कहा कि आदिवासियों, जंगल में रहने वाले अन्‍य लोगों और पूरे समाज का सहयोग और उनकी भागीदारी आरईडीडी+ (वन कटाई एवं वन ह्रास से उत्‍सर्जन में कमी) रणनीति को लागू करने में अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं। राष्‍ट्रीय आरईडीडी+ रणनीति को आज जारी करते हुए डॉ• हर्षवर्धन ने नवाचारों और नए सुझावों की अहमियत भी बताई। उन्‍होंने कहा कि देश में रहन-सहन के स्‍वस्‍थ वातावरण के लिए हमारे जंगलों का सुरक्षित रहना आवश्‍यक है। उन्‍होंने यह भी कहा कि आरईडीडी+ से जुड़ी गतिविधियां स्‍थानीय समुदायों की आजीविका को बनाए रखने में मदद करती हैं और इससे जैव विविधिता का संरक्षण भी होता है।

विशेषज्ञ समिति के सदस्‍यों के काम की प्रशंसा करते हुए डॉ• हर्षवर्धन ने राष्‍ट्रीय आरईडीडी+ रणनीति को लागू करने में योगदान के लिए विशेषज्ञों और अन्‍य लोगों को आमंत्रित किया है। उन्‍होंने इस दस्‍तावेज को तैयार करने में शामिल लोगों के सहयोग के लिए आभार प्रकट किया। उन्‍होंने कहा कि भारत की राष्‍ट्रीय आरईडीडी+ रणनीति पेरिस समझौते के लिए भारत की प्रतिबद्धता को हासिल करने का एक माध्‍यम भी है।

इस अवसर पर वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव ने जोर देते हुए कहा कि आरईडीडी+ रणनीति देश की एनडीसी (राष्‍ट्रीय स्‍तर पर निर्धारित योगदान) प्रतिबद्धताएं पूरी करने में मदद करेगा और जंगल पर आश्रित लोगों की आजीविका में भी योगदान करेगा। भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के महानिदेशक डॉ• गैरोला ने बताया कि देश में आरईडीडी+ को लागू करने में मदद के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर पर केन्‍दीय पर्यावरण मंत्री की अध्‍यक्षता में आरईडीडी+ के राष्‍ट्रीय प्रबंधन परिषद और भारतीय वन संरक्षण के महानिदेशक एवं भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के महानिदेशक की अध्‍यक्षता में दो तकनीकी समितियां गठित की जा रही है। डॉ• गैरोला ने वन संरक्षण और पारिस्थितिक तंत्र की उत्‍पादकता को बढ़ाने के लिए कोशिशें तेज करने की जरूरत पर बल दिया। उन्‍होंने यह भी बताया कि राज्‍य स्‍तर पर आरईडीडी+ से जुड़े काम-काज प्रधान मुख्‍य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) की अध्‍यक्षता वाली समिति और राज्‍यों के वन बल के प्रमुख (एचओएफएफ) द्वारा नियोजित किए जाएंगे।

साधारण शब्‍दों में आरईडीडी+ का मतलब ‘वन कटाई एवं वन ह्रास से उत्‍सर्जन में कमी’, वन कार्बन स्‍टॉक का संरक्षण, जंगलों का सतत प्रबंधन और विकासशील देशों में वन कार्बन के स्‍टॉक में वृद्धि है। आरईडीडी+ रणनीति का उद्देश्‍य वन संरक्षण के काम को तेज करते हुए जलवायु परिवर्तन में कमी को हासिल करना है। आरईडीडी+ रणनीति से वन कटाई एवं वन ह्रास के वाहकों को नियंत्रित करने, वन कार्बन स्‍टॉक बढ़ाने के लिए रोडमैप विकसित करने और आरईडीडी+ कार्यों के जरिए वनों के प्रबंधन को बनाए रखने में मदद मिलेगी। राष्‍ट्रीय आरईडीडी+ रणनीति के बारे में जल्‍द ही यूएनएफसीसीसी को सूचित किया जाएगा।

जलवायु परिर्वन पर पेरिस समझौते में जलवायु परिर्वन में कमी लाने में वनों की भूमिका की पहचान की गई और आरईडीडी+ को लागू करने तथा इसके समर्थन के लिए विभिन्‍न देशों को आगे बढ़ने के लिए कहा गया। भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने राष्‍ट्रीय स्‍तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) में कहा है कि 2030 तक अतिरिक्‍त वन क्षेत्र एवं वृक्षारोपण को बढ़ाया जाएगा जिससे 2.5 से 3 अरब टन कार्बन डाईआक्‍साइड गैस को रोका जा सकेगा। भारत यूएनएफसीसीसी को अपनी पहली द्विवार्षिक रिपोर्ट में बताया है कि भारत के जंगल देश के कुल जीएचजी उत्‍सर्जन के 12 फीसदी हिस्‍से को समाहित कर लेता है। इस तरह भारत के वन क्षेत्र जलवायु परिवर्तन में कमी के लिए सकरात्‍मक किफायती योगदान कर रहा है।

आरईडीडी+ पर यूएनएफसीसीसी के फैसलों के अनुरूप भारत ने राष्‍ट्रीय आरईडीडी+ रणनीति तैयार की है। मौजूदा राष्‍ट्रीय हालात में तैयार रणनीति में जलवायु परिवर्तन पर राष्‍ट्रीय कार्य योजना, हरित भारत मिशन और यूएनएफसीसीसी के प्रति भारत के राष्‍ट्रीय स्‍तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के अनुरूप सुधार किया गया है।

इस अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव डॉ• सिद्धांत दास, मंत्रालय के अपर सचिव ए• के• मेहता और अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी भी मौजूद थे।


॥■॥ “मोबिलिटी-वीक” के साथ नीति आयोग ने मूव : भारत के प्रथम विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन-2018 का सूत्रपात किया

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ• राजीव कुमार और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने 31 अगस्त से 06 सितंबर, 2018 तक चलने वाले “मोबिलिटी-वीक” के मद्देनज़र आयोजनों की एक श्रृंखला का आज सूत्रपात किया। यह मूव : भारत के प्रथम विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन-2018 के संबंध में है, जिसका आयोजन विज्ञान भवन में 07 और 08 सितंबर, 2018 को होगा। शिखर सम्मेलन का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे।

सप्ताह भर में होने वाले आयोजनों के तहत विभिन्न समूह शिरकत करेंगे, जिनमें स्टार्ट-अप, अकादमिक हस्तियां, निगम, नीति विश्लेषक, गैर-सरकारी संगठन, सिविल सोसायटी इत्यादि शामिल हैं। इस दौरान मोबिलिटी परिदृश्य, भावी संभावनाओं तथा अवसरों एवं चुनौतियों से निपटने के लिए देश की तैयारी का जायजा लिया जाएगा। इन कार्यक्रमों में अकादमिक सम्मेलन, गोलमेज चर्चाओं, विषय वस्तु पर आधारित कार्यशालाओं का आयोजन होगा, ताकि विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन – 2018 के संबंध में अर्थपूर्ण संवाद के लिए नजरिया तैयार किया जा सके।

डॉ• राजीव कुमार ने कहा कि देशभर और विश्व के मोबिलिटी क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के साथ साझेदारी से मोबिलिटी के संबंध में भारत की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। शिखर सम्मेलन से भारत को अन्य देशों में होने वाले विकास से सीखने का भी अवसर मिलेगा।

गतिविधियों का सूत्रपात करते हुए अमिताभ कांत ने कहा कि ‘ग्लोबल मोबिलिटी हेकथॉन’ और ‘पिच टू मूव’ जैसे आयोजनों से भारत की युवा पीढ़ी की आपार क्षमता उजागर होगी और यह बात स्पष्ट होगी की भारत अपने उज्ज्वल भविष्य की तरफ बढ़ने के लिए कितना तैयार है।

• ‘मोबिलिटी-वीक’ के बारे में

मोबिलिटी-वीक के तहत 31 अगस्त से 06 सितंबर, 2018 तक 17 आयोजन होंगे। इन आयोजनों में मोबिलिटी क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा का अवसर मिलेगा।

प्रतिभागियों में विश्व और भारत के मोबिलिटी क्षेत्र के दिग्गज शामिल हैं। इनमें ओईएम, बैटरी निर्माता, चार्जिंग अवसंरचना प्रदाता, प्रौद्योगिकी सॉल्यूशन प्रदाता, भारत सरकार और विदेशों के प्रतिनिधि, विभिन्न अंतर-सरकारी संगठन, अकादमिक जगत और पॉलिसी थिंक-टैंक शामिल हैं।

• मंत्रालय आदान-प्रदान

इसके तहत सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एक कार्याशाला का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में सार्वजनिक यातायात, साझा मोबिलिटी और संपर्कता के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा नीति आयोग के साथ मिलकर भारतीय रेल एक संगोष्ठी का आयोजन करेगी, जिसका विषय ‘भारतीय रेल में ई-मोबिलिटी’ है। इसका उद्देश्य परियोजना विकास कर्ताओं और अन्य हितधारकों को एक साझा मंच पर लाना है, ताकि भारतीय रेल को प्रभावशाली, हरित और सर्व सुलभ यातायात बनाया जा सके।

• छात्र एवं उद्यमी

देश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समुदाय को शामिल करने के लिए आईआईटी दिल्ली 01 सितंबर को विद्युत वाहनों पर एक कार्यशाला की मेजबानी कर रहा है। तकनीकी सम्मेलन के बाद रेनॉल्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सुमित सहाय एवं अथर एनर्जी के तरुण मेहता के साथ छात्रों की चर्चा का आयोजन किया जाएगा।

‘मूव हेक’ और ‘पिच टू मूव’ जैसे प्रतिस्पर्धी आयोजनों के लिए छात्र समुदाय भारी मात्रा में पंजीकरण करा रहा है। इन आयोजनों के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा तथा 07 और 08 सितंबर, 2018 को होने वाले मूव शिखर सम्मेलन में विजेताओं का सम्मान किया जाएगा।

• सार्वजनिक यातायात

अंतिम दूरी तक संपर्कता और साइकिल जैसे गैर-मोटर यातायात की भूमिका भावी समग्र मूविलिटी उपायों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। शिखर सम्मेलन की शुरूआत के पहले साइकिलिंग को प्रोत्साहन देने के लिए नीति आयोग 02 सितंबर को एक साइकिल रैली का आयोजन करेगा, जिसे गृह मंत्री राजनाथ सिंह रवाना करेंगे। नीति आयोग के उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी इसमें हिस्सा लेंगे।

• मूव : विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन के बारे में

प्रौद्योगिकी लागत और व्यापार आधारित इनोवेशन के मद्देनज़र दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत वाहनों की तरफ झुकाव बढ़ता जा रहा है। इस पृष्ठभूमि में विभिन्न मंत्रालयों और उद्योग साझेदारों के सहयोग से नीति आयोग नई दिल्ली में 07 और 08 सितंबर, 2018 को ‘मूव : विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन’ का आयोजन कर रहा है। इस शिखर सम्मेलन में तीन बिन्दु होंगे – सम्मेलन, डिजिटल प्रदर्शनी और विशेष आयोजन। इससे वाहनों के विद्युतीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और रोजगार विकास के लिए सरकार के उद्देश्य को पूरा करने में मदद मिलेगी तथा स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत के कदम तेजी से बढ़ेंगे।

अपने तरह का यह पहला शिखर सम्मेलन है, जिसमें पूरे विश्व से 1200 प्रतिभागियों के शामिल होने की आशा है। इनमें सरकार, उद्योग, शोध-संगठनों, अकादमिक जगत, थिंक-टैंक और सिविल सोसायटी की हस्तियां शामिल हैं। यह सभी प्रमुख हितधारकों के साथ चर्चा करेंगे। सामान्तर सत्रों में पांच विषय आधारित पर्चों पर चर्चा होगी।


॥■॥ विधि आयोग ने ‘’अनुचित तरीके से मुकदमा चलाने (अदालत की गलती): कानूनी उपायों’’ पर रिपोर्ट सौंपी

भारत के विधि आयोग ने ‘’अनुचित तरीके से मुकदमा चलाने (अदालत की गलती): कानूनी उपायों’’ शीर्षक से रिपोर्ट संख्‍या 277 आज (30 अगस्‍त, 2018) सरकार को सौंपी।

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने बबलू चौहान@डबलू बनाम दिल्‍ली सरकार, 247 (2018) डीएलटी 31, के मामले में 30 मई, 2017 के अपने आदेश में निर्दोष व्‍यक्तियों पर अनुचित मुकदमा चलाने, ऐसे अपराधों में कैद जो उन्‍होंने नहीं किए हैं, जैसी स्थिति पर चिंता व्‍यक्‍त की थी। अदालत ने अनुचित तरीके से मुकदमे के शिकार लोगों को राहत और पुनर्वास प्रदान करने के लिए एक कानूनी रूपरेखा तैयार करने की तत्‍काल आवश्‍यकता बताई थी और विधि आयोग से कहा था कि वह इस मुद्दे की विस्‍तृत जांच का काम हाथ में ले और सरकार को अपनी सिफारिशें दें।

अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर, अनुचित तरीके से मुकदमा चलाने, कैद और निर्दोष व्‍यक्तियों को दोषी ठहराने के मुद्दे की ‘अदालत की गलती’ के रूप में पहचान की गई है, जो व्‍यक्ति को अनुचित तरीके से दोषी ठहराने के बाद होता है लेकिन बाद में उसे नए तथ्‍यों/प्रमाणों के आधार पर तथ्‍यात्‍मक रूप से निर्दोष पाया जाता है। नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्‍ट्रीय नियम (आईसीसीपीआर), भारत द्वारा पुष्टि) में भी अदालत की गलती के शिकार लोगों को मुआवजा देने के लिए एक कानून बनाने के लिए कहा गया था।

यह रिपोर्ट भारतीय आपराधिक न्‍याय प्रणाली के संदर्भ से इस मुद्दे को देखती है और सिफारिश करती है कि ‘अनुचित तरीके से मुकदमा चलाना’ और गलत तरीके से कैद करना, ‘गलत तरीके से दोष साबित करना अदालत की गलती के मानकों में शामिल होंगे जहां आरोपी और अपराध का दोष साबित नहीं होने वाले व्‍यक्ति, पुलिस तथा/ अथवा अभियोजक जांच में और/ अथवा व्‍यक्ति पर मुकदमा चलाने में किसी तरह के दुर्व्‍यवहार में शामिल है। इसमें दोनों तरह के मामले शामिल होंगे, जहां व्‍यक्ति ने जेल में समय बिताया है और नहीं बिताया है ; और जहां आरोपी को निचली अदालत द्वारा दोषी नहीं पाया गया अथवा जहां आरोपी को एक या अधिक अदालतों द्वारा दोषी पाया गया लेकिन अंतत: उच्‍च अदालत द्वारा दोषी नहीं पाया गया।

रिपोर्ट में वर्तमान कारणों के अंतर्गत उपलब्‍ध उपायों की जानकारी दी गई है और उनकी अपर्याप्‍तता पर विचार किया गया है। आयोग ने अनुचित तरीके से मुकदमा चलाने के मामलों के निपटारे के लिए विशेष कानून, प्रावधान लागू करने की सिफारिश की है, ताकि अनुचित तरीके से मुकदमें के शिकार लोगों को मौद्रिक और गैर-मौद्रिक मुआवजे (जैसे परामर्श, मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं, व्‍यावसायिक/रोजगार, कौशल विकास आदि) के मामले में वैधानिक दायरे के भीतर राहत प्रदान की जा सके। रिपोर्ट में अनुशंसित रूपरेखा के प्रमुख सिद्धांतों - ‘अनुचित तरीके से मुकदमा चलाने’ की परिभाषा यानी जिन मामलों में मुआवजे का दावा दायर किया गया है, मुआवजे के इन दावों के फैसले के लिए विशेष अदालतें बनाने, कार्यवाही की प्रकृति – दावों के फैसले के लिए सामयिकता आदि, मुआवजा निर्धारित करते समय वित्‍तीय और अन्‍य कारक, कुछ मामलों में अंतरिम मुआवजे का प्रावधान, गलत तरीके से मुकदमा चलाने/दोषी ठहराने आदि को देखते हुए अयोग्‍यता हटाने जैसी बातों को एक-एक करके बताया गया हैं।


॥■॥ उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार की संस्कृति के प्रोत्साहन के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नवाचार उपलब्धियों पर नवाचार प्रकोष्ठ एवं संस्थानों की अटल रैंकिंग (एआरआईआईए) को लांच किया

उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार की संस्कृति के प्रोत्साहन के लिए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ• सत्य पाल सिंह ने आज यहां एआईसीटीई में नवाचार उपलब्धियों पर नवाचार प्रकोष्ठ एवं संस्थानों की अटल रैंकिंग (एआरआईआईए) को लांच किया। नवाचार प्रकोष्ठ मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल है और उसे एआईसीटीई परिसर में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार संस्कृति को व्यवस्थित तरीके से प्रोत्साहन देना है।

इस अवसर पर प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हमें भारत में नवाचार संस्कृति का सृजन करना होगा और इसके लिए उच्च शिक्षा संस्थानों को प्रोत्साहित करना होगा कि वे अपने परिसरों में नवाचार क्लब बनाएं। उन्होंने कहा कि नवाचार के बिना कोई भी देश सतत विकास और समृद्धि हासिल नहीं कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि 21वीं शताब्दी नवाचार की शताब्दी है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2010-2020 के दशक को ‘नवाचार दशक’ कहा है। भारत विश्व मंच पर नवाचार के संदर्भ में पांच वर्ष पहले 86वें स्थान पर था, जो इस वर्ष 57वें स्थान पर पहुंच गया है।

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हम गरीबों तक न्याय पहुंचाना चाहते हैं और उन्हें समृद्ध बनाने के लिए हमें नवाचार का सहारा लेना होगा। इसके बिना यह मुमकिन नहीं है। देश की युवा आबादी के बारे में उन्होंने कहा कि हमारी युवा आबादी को परिसंपत्ति के रूप में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि नवाचार प्रकोष्ठ की स्थापना से नवाचार क्लब, स्मार्ट इंडिया हेकथॉन और छात्र स्टार्ट-अप को बल मिलेगा।

उन्होंने कहा कि हमें नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए किए जाने वाले प्रयासों का आकलन करना चाहिए। इसलिए एआरआईआईए को आज शुरू किया गया है। इसके जरिए उच्च शिक्षा संस्थानों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ• सत्य पाल सिंह ने कहा कि नवाचार को हमारी संस्कृति का हिस्सा बनाना चाहिए और ऐसा न हो कि वह केवल इंजीनियरिंग के छात्रों तक सीमित रह जाए। उसे हर छात्र के लिए खोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवाचार का मतलब मौलिक विचार होता है और सभी लोग नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए अपने-अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं।

इस अवसर पर मानव संसाधन विकास सचिव आर सुब्रमण्यम, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष डी• पी• सिंह और एआईसीटीई के अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे भी उपस्थित थे।

• मानव संसाधन विकास मंत्रालय नवाचार प्रकोष्ठ

नवाचार प्रकोष्ठ मंत्रालय की पहल है जिसे एआईसीटीई ने स्थापित किया है। इसका उद्देश्य देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार की संस्कृति को व्यवस्थित तरीके से प्रोत्साहन देना है। नवाचार प्रकोष्ठ के प्रमुख कार्यों में युवा छात्रों को प्रोत्साहित, प्रेरित और शिक्षित करना है। इसके तहत युवा छात्रों को नए विचारों से परिचित कराया जाएगा और उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार क्लबों के नेटवर्क के जरिए उनमें नवाचार के प्रति रुझान पैदा किया जाएगा।

● प्रमुख कार्यक्रम

• नवाचार क्लबों का नेटवर्क (एनआईसी)
• नवाचार उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग (एआरआरआईए)
• स्मार्ट इंडिया हेकथॉन (एसआईएच) 2019
• राष्ट्रीय छात्र स्टार्ट-अप नीति (एनएसएसपी)


॥■॥ अरूण जेटली ने सीसीआई के नए कार्यालय का उदघाटन किया

केन्‍द्रीय वित्‍त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग का और अधिक विस्‍तार होगा क्‍योंकि हमारी अर्थव्‍यवस्‍था का आकार बढ़ रहा है। इस वर्ष शुद्ध आकार की दृष्टि से हमने फ्रांस को पीछे छोड़ दिया है। अगले वर्ष हमें उम्‍मीद है कि हम इंग्‍लैंड की अर्थव्‍यवस्‍था के आकार से आगे निकल जाएंगे और दुनिया में 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन जाएंगे। श्री जेटली आज यहां भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग (सीसीआई) के नए कार्यालय का उदघाटन कर रहे थे।

तेजी से आगे बढ़ती भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में सीसीआई की भूमिका के बारे में श्री जेटली ने कहा कि भारत की खपत वाली अर्थव्‍यवस्‍था उभर रही है। अनेक क्षेत्रों में हो रही जबरदस्‍त वृद्धि से बड़ी संख्‍या में घरेलू और अंतर्राष्‍ट्रीय दिग्‍गज आकर्षित होंगे। अर्थव्‍यवस्‍था के आकार में वृद्धि होने पर कुछ लोग निष्‍पक्ष बाजार नियमों का पालन नहीं कर पाएंगे, व्‍यवसायी समूहन में शामिल होंगे, लंबवत और क्षितिज संबंध बनाएंगे, मूल्‍यों को प्रभावित करने अथवा प्रतिस्‍पर्धा को कमजोर करने के लिए प्रभावी पदों का दुरूपयोग करेंगे। अत: हर प्रकार के विलयों और अधिग्रहणों को नियंत्रित करने के लिए नियामक तंत्र की जरूरत होगी। ये परिवर्तन काफी बड़े पैमाने पर होंगे और बाजार पर इनका काफी बड़ा असर पड़ेगा।

अरुण जेटली ने पैन इंडिया पर बोलते हुए भारत की पूर्वी क्षेत्र की वृद्धि संभावनाओं पर विशेष ध्‍यान केंद्रित किया। उन्‍होंने कहा कि ‘’अगले 10-20 वर्ष में हमारी वृद्धि को आगे ले जाने के लिए हमारे पास अनेक संभावनाएं होंगी। भारत ने देश के उत्‍तरी, दक्षिण और पश्चिमी हिस्‍सों में अधिक वृद्धि देखी है। पूर्वी क्षेत्र अभी भी काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमें उम्‍मीद है कि वहां और वृद्धि देखने को मिलेगी।

उदघाटन समारोह में सीसीआई के अध्‍यक्ष सुधीर मित्‍तल, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव इंजेती श्रीनिवास, आयोग के सदस्‍य, वरिष्‍ठ सरकारी अधिकारी और वकील शामिल हुए।


॥■॥ जेपी नड्डा ने केरल में बाढ़ राहत उपायों की समीक्षा की

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री जेपी नड्डा ने आज मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ केरल में बाढ़ राहत उपायों की समीक्षा की।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने केन्द्रीय मंत्री को बताया कि सरकार महामारी से जुड़ी बीमारियां फैलने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए बीमारी संबंधी आंकड़ों की निगरानी कर रही है। लेप्‍टोसपिरोसिस, अतिसार संबंधी बीमारी और डेंगू के मामलों की बढ़ती प्रवृति का संकेत मिल रहा है और वे इन मामलों की निगरानी के लिए राज्‍य के साथ समन्‍वय कायम किए हुए हैं।

अब तक केन्द्र सरकार राज्‍य को 1000 लीटर साइफिनोथ्रिन 5%, 500 किलोग्राम डाइफ्लूबेंजूरोन 25% और 250 लीटर मैलाथियोन के अलावा 73 मीट्रिक टन आवश्‍यक आपात दवाएं; 1000 टीके एड्रीनलिन वायल्‍स; 2.25 करोड़ क्‍लोरीन टेबलेट (20 लीटर पानी को क्‍लोरीनयुक्‍त करने के लिए एक टेबलेट); 80 मीट्रिक टन ब्‍लीचिंग पाउडर; चार लाख सेनेट्री नेपकिन की आपूर्ति कर चुकी है।

राज्‍य से प्राप्‍त अतिरिक्‍त अनुरोध के अनुसार, आवश्‍यक दवाओं/उपभोज्‍य 58 मदों जिनका वजन करीब 120 मीट्रिक टन है, और 40 अल्‍ट्रा लो वोल्‍यूम (यूएलवी) धुंआ करने की मशीनें भी राज्‍य को भेजी जा रही हैं।

निमहंस बेंगलुरू पहले ही 40 सदस्‍यों का साइको सोशल दल (मनोविज्ञान, मनो चिकित्‍सक और मनो-सामाजिक कार्यकर्ता) तैनात कर चुका हैं।

राज्‍य से आज प्राप्‍त अनुरोध के अनुसार सरकार 30 विशेषज्ञ डॉक्‍टरों, 20 सामान्‍य ड्यूटी चिकित्‍सा अफसरों और 40 मलयाली भाषी नर्सों को भेज रही है और ये दल कल केरल पहुंचेगा। विभिन्‍न सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य उपायों में राज्‍य स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की मदद के लिए सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ, सूक्ष्‍म जीव विज्ञानी और एक – एक कीट विज्ञानी को मिलाकर सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य के 12 सदस्‍यों का एक दल तैनात किया जा रहा है।

जेपी नड्डा ने केरल की स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के• के• शैलेजा से भी बात की और उन्‍हें वर्तमान बाढ़ राहत उपायों में स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय का सहयोग लगातार जारी रखने का आश्‍वासन दिया।

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