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नई दिल्ली, 08 अगस्त 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ सर्वाइकल कैंसर और स्तन कैंसर की रोकथाम

भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान परिषद के राष्‍ट्रीय कैंसर रजिस्‍ट्री कार्यक्रम की "जनसंख्‍या आधारित कैंसर रजिस्‍ट्री की तीन वर्षीय रिपोर्ट (2012-14)" के अनुसार उन्‍नीस (19) जनसंख्‍या आधारित कैंसर रजिस्‍ट्रियों (पीबीसीआर) में महिलाओं में सर्वाधिक सामान्‍य कैंसर स्‍तन कैंसर है, छ: (6) पीबीसीआर में महिलाओं में सर्वाधिक सामान्‍य कैंसर गर्भाशय का कैंसर है और देश में सताईस (27) विभिन्‍न पीबीसीआर में से सोलह (16) पीबीसीआर में यह दूसरा सर्वाधिक सामान्‍य कैंसर है। महिलाओं में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में लगभग 20.6% मौतें गर्भाशय के कैंसर के कारण और 17.4% मौतें स्‍तन कैंसर के कारण होती हैं।

केंद्र सरकार कैंसर की रोकथाम, निदान और उपचार सहित स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल में सुधार लाने संबंधी राज्‍य सरकारों के प्रयासों में सहयोग करती है। जिला स्‍तर पर किए गए क्रियाकलापों के लिए राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन (एनएचएम) के तहत क्रियान्वित किए जा रहे कैंसर, मधुमेह, हृदवाहिका रोगों और आघात की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्‍ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीडीसी) के उद्देश्‍यों में कैंसर की रोकथाम, स्क्रिनिंग, इसका शीघ्र पता लगाने और उपचार के लिए उपयुक्‍त स्‍तर के संस्‍थान में भेजने के लिए जागरूकता सृजन करना शामिल हैं। मुख्‍य ध्‍यान तीन प्रकार के कैंसरों नामत: स्‍तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर और मुख कैंसर पर दिया गया है।

व्‍यापक प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल के रूप में राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के तहत वर्ष 2017-18 में देश के 150 से अधिक जिलों में सामान्‍य गैर-संचारी रोगों (मधुमेह, उच्‍च रक्‍तचाप और कैंसर नामत: मुख कैंसर, स्‍तन कैंसर और गर्भाशय कैंसर) की रोकथाम, नियंत्रण और स्क्रिनिंग के लिए एक जनसंख्‍या स्‍तरीय पहल प्रारंभ की है।

कैंसर अनुसंधान के लिए क्षमता निर्माण और कैंसर संबंधी स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल की उपलब्‍धता में सुधार लाने के लिए, भारत सरकार एनपीसीडीसीएस के तहत तृतीयक कैंसर देखभाल सुविधा का सुदृढ़ीकरण नामक स्‍कीम का क्रियान्‍वयन कर रही है, जिसके तहत देश में राज्‍य कैंसर संस्‍थानों (एससीआई) और तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्रों (टीसीसीसी) की स्‍थापना के लिए सहायता प्रदान की जाती है। एससीआई और टीसीसीसी सभी कैंसर संबंधी क्रियाकलापों में परामर्श देंगे। चितरंजन राष्‍ट्रीय कैंसर संस्‍थान (सीएनसीआई), कोलकाता के दूसरे परिसर और एम्‍स, नई दिल्‍ली के अधीन राष्‍ट्रीय कैंसर संस्‍थान (एनसीआई) की स्‍थापना को भी मंजूरी दे दी गई है।

भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर)-राष्‍ट्रीय कैंसर रोकथाम और अनुसंधान संस्‍थान (एनआईसीपीआर), नोएडा ने आम जनसंख्‍या में जागरूकता फैलाने के लिए www.cancerindia.org.in नामक वेबसाइट प्रारंभ की है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्‍य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा राज्य सभा में लिखित में उत्तर दिया गया।


॥■॥ गरीबी रेखा के नीचे/अन्त्योदय अन्न योजना के
स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना (आरएसबीवाई) का कार्यान्‍वयान

गरीबी रेखा के नीचे/अन्त्योदय अन्न योजना के स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना (आरएसबीवाई) का कार्यान्‍वयान किया जा रहा है। इस योजना के तहत पैनलबद्ध अस्‍पतालों (निजी तथा सरकारी दोनों) के लिए अनुमोदित पैकेज तथा पैकेज पर बीपीएल तथा गैर-संगठित कार्यकर्ताओं की 11 परिभाषित श्रेणियों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 30,000 रुपए तक की स्‍वास्‍थ्‍य बीमा कवरेज प्रदान की जाती है।

सरकार ने वर्ष 2018-19 के दौरान आयुष्‍मान भारत- राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा मिशन (एबी-एनएचपीएम) की मंजूरी दी है जोकि द्वितीयक तथा तृतीयक अस्‍पतालीकरण सुविधाओं हेतु प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपए की कवरेज प्रदान करते हुए 10 करोड़ निर्धनों तथा संवेदनशील परिवारों (लगभग 50 करोड़ लाभार्थियों) को कवर किया जाएगा। एबी-एनएचपीएम के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों हेतु एसईसीसी वंचना मानदंडों के आधार पर तथा शहरी क्षेत्रों हेतु 11 परिभाषित व्‍यवसायिक श्रेणियों के आधार पर लाभार्थी परिवारों का चयन किया जाता है।

भारत सरकार ने, देश में सभी नैदानिक प्रतिष्‍ठानों (सरकारी तथा निजी दोनों) के पंजीकरण तथा विनियमन हेतु नैदानिक प्रतिष्‍ठान (पंजीकरण तथा विनियमन) अधिनियम, 2010 को अधिनियम किया है। उक्‍त अधिनियम के तहत नैदानिक स्‍थापना (केंद्र सरकार) नियम, 2012 के अनुपालन में राज्‍यों/केंद्र शासित राज्‍यों, जहां पर उक्‍त अधिनियम लागू हैं, में नैदानिक संस्‍थानों को अन्‍य बातों के साथ-साथ दिखने योग्‍य स्‍थान पर प्रत्‍येक प्रकार की प्रदत्‍त सुविधाओं और राज्‍य सरकारों के विचार-विमर्श से समय-समय पर निर्धारित दरों की रेंज में प्रत्‍येक प्रकार की सेवाओं के लिए चार्ज की जाने वाली दरों को प्रदर्शित करना अपेक्षित है। राष्‍ट्रीय नैदानिक संस्‍थान परिषद ने चिकित्‍सा प्रक्रियाओं की एक मानक सूची और मानक नमूने का अनुमोदन किया है और उपयुक्‍त कार्रवाई हेतु इसे राज्‍यों एवं संघ राज्‍य क्षेत्रों के साथ साझा किया गया है। नैदानिक संस्‍थानों से यह भी अपेक्षित है कि वे केंद्र सरकार अथवा राज्‍य सरकार द्वारा जारी किए गए मानक उपचार दिशा-निर्देशों का अनुपालन करेंगे। वर्तमान में यह अधिनियम 11 राज्‍यों और दिल्‍ली को छोड़कर संघ राज्‍य क्षेत्रों में लागू है। उक्‍त अधिनियम का कार्यान्‍वयन एवं प्रवर्तन राज्‍यों/संघ शासित राज्‍यों के कार्यक्षेत्र में आता है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्‍य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा राज्य सभा में लिखित में उत्तर दिया गया।


॥■॥ कृत्रिम औषधियां

भारत को विश्‍व की फार्मेसी के रूप में जाना जाता है। देश में कृत्रिम (रासायनिक और जैव रासायनिक) प्रक्रियाओं सहित दवाई के उत्‍पादन में सतत वृद्धि होती है। कृत्रिम (सिंथेटिक) औषधि को कभी-कभी नशीली औषधि भी कहा जाता है। हैदराबाद और मुंबई सहित देश में इन औषधियों के विनिर्माण में वृद्धि की कोई पुख्‍ता प्रवृत्ति नहीं है।

देश में औषधियों का विनिर्माण, विक्रय तथा वितरण औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और नियम, 1945के उपबंधों के अधीन लाइसेंसिंग और निरीक्षण प्रणाली के माध्‍यम से विनियमित किया जाता है। औषधियों के विनिर्माण और विक्रय के लिए लाइसेंस संबंधित राज्‍य सरकारों द्वारा नियुक्‍त राज्‍य लाइसेंसिंग प्राधिकरण (एसएलए) द्वारा प्रदान किए जाते हैं। एसएलए को अधिनियम के पास उपबंधों और नियमों का उल्‍लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की विधिक शक्तियां हैं।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्‍य मंत्री अश्‍विनी कुमार चौबे के द्वारा राज्य सभा में लिखित में उत्तर दिया गया।


॥■॥ जम्‍मू-कश्‍मीर में आतंकी गतिविधियां

सरकार ने 16.05.2018 को सुरक्षाबलों एवं सेना को जम्‍मू एवं कश्‍मीर में रमजान की अवधि के दौरान आक्रामक ऑपरेशन आरंभ नहीं करने का निर्देश जारी किया था। फिर भी अगर आम लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए यदि अनिवार्य हो, तो सुरक्षाबल उपयुक्‍त कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाएंगे। जम्‍मू एवं कश्‍मीर में रमजान की अवधि तथा रमजान से पूर्व आतंकी हिंसा, मारे गए आतंकियों, मारे गए नागरिकों एवं शहीद हुए सुरक्षा बल के जवानों की संख्‍या निम्‍नलिखित है -

16.04.2018 से 16.05.2018 की अवधि तक (रमजान पूर्व )
17.05.2018 से 16.06.2018 की अवधि तक (रमजान)

आतंकी हिंसा की घटनाओं की संख्‍या
34
73

मारे गए आतंकियों की संख्‍या
14
23

मारे गए नागरिकों की संख्‍या
8
3

शहीद हुए सुरक्षाबलों के जवानों की संख्‍या
5
8

राज्‍य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार कश्‍मीर में लगभग 300 आतंकी सक्रिय हैं।

यह जानकारी केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने लोकसभा में एक लिखित उत्‍तर में दी।


॥■॥ नक्‍सली गतिविधियां

नक्‍सलियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में सुरक्षाबलों ने काफी सफलता हासिल की है जिससे नक्‍सली हिंसा में कमी होने के साथ ही ऐसी गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्र भी कम हुए हैं। वर्ष 2017 में नक्‍सली हिंसा की घटनाएं कम होकर 908 रह गई थीं जबकि 2009 में इनकी संख्‍या 2258 रही थी। इसके साथ ही नक्‍सल प्रभावित क्षेत्र भी सिमट गए हैं।

नक्‍सली हिंसा से निपटने के लिए 11 राज्‍यों के 90 जिलों में सुरक्षा संबंधित खर्च योजना लागू की गई है। तय रणनीति के तहत नक्‍सली अपनी गतिविधियों का स्‍थान बदलते रहते हैं। ऐसा वह आमतौर पर सुरक्षा बलों पर दबाव बनाने के लिए करते हैं। पिछले कुछ सालों के दौरान माओवादियों ने केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु तथा मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र और छत्‍तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में पांव पसारे हैं हालांकि उन्‍हें वहां कोई ज्‍यादा सफलता नहीं मिल पाई है। केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के सीमावर्ती इलाकों में स्थित वयनाड, पालक्‍काड और मल्‍लापुरम तथा मध्‍यप्रदेश का बालाघाट और मांडला, महाराष्‍ट्र का गोंडिया तथा छत्‍तीसगढ़ का राजनंदगांव जिला नक्‍सली हिंसा से सबसे ज्‍यादा प्रभावित रहा है।

सरकार ने नक्‍सली समस्‍या से निबटने के लिए व्‍यापक दृष्टिकोण अपनाया है जिसके तहत एक ओर जहां वह नक्‍सल प्रभावित राज्‍यों को उनके प्रयासों में मदद कर रही है तो वहीं दूसरी ओर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर एक नीति‍ और कार्ययोजना भी तैयार की है। इस योजना में सुरक्षा से जुड़े उपायों के साथ ही स्‍थानीय लोगों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके विकास से जुड़े कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। विकास योजनाओं से जुड़ी पहल में नक्‍सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क बनाने, मोबाइल टॉवर लगाने, कौशल विकास, बैकों और डाकघरों का नेटवर्क सुधारने तथा शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं बेहतर करने जैसे काम शामिल हैं। इन उपायों ने स्‍थानीय लोगों को नक्‍सलियों से दूर कर सरकार पर उनका विश्‍वास बढ़ाया है।

यह जानकारी केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने लोकसभा में एक लिखित उत्‍तर में दी।


॥■॥ सीआरपीएफ द्वारा अति महत्‍वपूर्ण व्‍यक्तियों की सुरक्षा

व्‍यक्तिगत सुरक्षा कर्तव्‍यों के विशिष्‍ट दायित्‍व में एकरूपता एवं मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने सीआरपीएफ को धीरे-धीरे व्‍यक्तिगत सुरक्षा कर्तव्‍यों से मुक्‍त करने तथा यह कार्य सीआईएसएफ एवं एनएसजी के सुपुर्द करने का फैसला किया है।

वर्तमान में एसपीजी में 30 प्रतिशत अधिकारी सीआरपीएफ से प्रतिनियुक्ति पर हैं और एनएसजी में यह संख्‍या लगभग 11 प्रतिशत की है।

सीआरपीएफ सहित सभी सीआरपीएफ उग्र वामपंथ (एलडब्‍ल्‍यूई) प्रभावित क्षेत्रों एवं जम्‍मू व कश्‍मीर की चुनौतीपूर्ण स्थितियों में कार्य करते हैं।

यह जानकारी केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने लोकसभा में एक लिखित उत्‍तर में दी।


॥■॥ नकली उत्‍पादों की बिक्री

उपभोक्‍ता मामलों के विभाग द्वारा शुरू की गई राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता हेल्‍पलाइन पर उत्‍पादों की खराब गुणवत्ता, नकली/डुप्‍लीकेट उत्‍पादों, इत्‍यादि के बारे में विभिन्‍न शिकायतें प्राप्‍त हो रही हैं। उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत त्रिस्‍तरीय अर्द्ध-न्‍यायिक व्‍यवस्‍था स्‍थापित की गई है, ताकि उपभोक्‍ता विवादों का त्‍वरित एवं सरल निपटान संभव हो सके। इस व्‍यवस्‍था के तहत विशिष्‍ट तरह की राहत देने के साथ-साथ जहां उचित प्रतीत हो वहां उपभोक्‍ताओं को मुआवजा देने का भी अधिकार दिया गया है।

उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 में आदेशों का पालन न होने पर अर्द्ध-न्‍यायिक निकायों द्वारा जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है। जब किसी उपभोक्‍ता फोरम द्वारा किसी शिकायत को जायज ठहराया जाता है तो वैसी स्थिति में यह प्रतिवादी को संबंधित उत्‍पाद की कमी दूर करने, संबंधित वस्‍तु की जगह नए वस्‍तु देने, उपभोक्‍ता को पैसा वा‍पस करने, इत्‍यादि के आदेश दे सकता है। विभाग ने 5 जनवरी, 2018 को लोकसभा में उपभोक्‍ता संरक्षण विधेयक, 2018 पेश किया है जो उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 का स्‍थान लेगा। ई-कॉमर्स में अनुचित व्‍यापारिक तौर-तरीकों की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा नियम बनाने का प्रावधान इस विधेयक में किया गया है।

इस आशय की जानकारी खाद्य, उपभोक्‍ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्‍यमंत्री सी• आर• चौधरी ने लोकसभा में दी।


॥■॥ पुलिस जवानों की सार्वजनिक छवि

गृह मंत्रालय ने गृह सचिव के विभागीय आदेश पत्र दिनांक 14.07.2015 के माध्‍यम से राज्‍य सरकारों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के सभी पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) से आवश्‍यक व्‍यवस्‍था करने तथा एक ऐसी प्रणाली बनाने को कहा था, जिससे पुलिस थाना स्‍तर या जिला स्‍तर या इससे नीचे के स्‍तर पर किसी अन्‍य पुलिस कार्यालय द्वारा किये जा रहे सकारात्‍मक कहानियों/अच्‍छे कार्यों की अपलोडिंग सुनिश्चित हो और यह पुलिस की नकारात्‍मक सार्वजनिक छवि को बदलने का कार्य करे। विभागीय आदेश संख्‍या का अनुसरण गृह मंत्रालय से एक अन्‍य संप्रेषण दिनांक 14.10.2017 द्वारा किया गया था।

उपलब्‍ध सूचना के अनुसार संबंधित राज्‍य या जिला पुलिस वेबसाइटों पर 44,708 सकारात्‍मक कहानियां/अच्‍छे कार्यों को अपलोड किया गया है। इसके अतिरिक्‍त 2014 में डीजीपी/आईजीपी सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री द्वारा घोषित स्‍मार्ट पोलिसिंग पर विचार-विमर्शों पर आधारित पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्‍यूरो ने राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों के 43 सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों को अपनी वेबसाइट (www.bprd.nic.in) पर अपलोड किया है।

यह जानकारी केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने लोकसभा में एक लिखित उत्‍तर में दी।


॥■॥ पुलिस द्वारा आधार डाटा का उपयोग

पुलिस को आधार डेटा तक सीमित पहुंच दिए जाने से संबंधित कोई सुझाव भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण यूआईडीएआई को नहीं मिला है। आधार कानून 2016 के अध्‍याय छह (लक्षित लाभार्थियों तक वित्‍तीय और अन्‍य सब्‍सिडी, लाभ तथा सेवाएं पहुंचाना) के तहत आधार नियम 2016 की व्‍यवस्‍थाओं में आधार से संबंधित सूचनाओं को सुरक्षित रखने की व्‍यवस्‍था की गई है ताकि प्राधिकरण के पास संचित जानकारी पूरी तरह से उसकी निगरानी व नियंत्रण में रहे। कानून की व्‍यवस्‍थाओं के तहत इन सूचनाओं तक पहुंच, इनके इस्‍तेमाल या इन्‍हें सार्वजनिक किए जाने की अनुमति नहीं है।

केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने लोकसभा में एक लिखित उत्‍तर में यह जानकारी दी।

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