नई दिल्ली, 01 अगस्त 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥●॥ मंत्रिमंडल द्वारा अनुमति
• वित्त वर्ष 2028-19 के दौरान 15,000 करोड़ रुपये की रकम स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) {एसबीएम(जी)} के लिए अतिरिक्त बजट संसाधनों को बढ़ाना; और
• पूववर्ती अंतर्राष्ट्रीय पेयजल गुणवत्ता केन्द्र के कार्य-विस्तार के लिए उसका नाम राष्ट्रीय पेयजल, स्वच्छता एवं गुणवत्ता केन्द्र रखा जाना तथा एसबीएम(जी) के लिए ईबीआर प्राप्त करने के लिए उसे काम करने के लिए अधिकृत करना
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने निम्नलिखित को मंजूरी दी है –
वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान नाबार्ड के जरिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) {एसबीएम(जी)} के लिए अतिरिक्त बजट संसाधन (ईबीआर) (पूर्णरूपेण सरकारी सेवा बांड) के रूप में 15,000 करोड़ रुपये तक निधियों को बढ़ाना।
बी) अंतर्राष्ट्रीय पेयजल गुणवत्ता केन्द्र नामक सोसायटी के कार्य विस्तार को अधिकृत करना, एसबीएम(जी) के लिए ईबीआर निधियों को प्राप्त करना, राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों की एजेंसियों के लिए आवंटन और उसका पुनर्भुगतान।
सी) ‘अंतर्राष्ट्रीय पेयजल गुणवत्ता केन्द्र’ का नाम बदल कर ‘राष्ट्रीय पेयजल, स्वच्छता एवं गुणवत्ता केन्द्र’ किया जाना।
प्रभाव : इस निर्णय से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और एसएलडब्ल्यूएम गतिविधियों के लिए ग्राम पंचायतों के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए योग्य लगभग 1.5 करोड़ ग्रामीण घरों को फायदा होगा।
देशभर के गांवों में खुले में शौच से मुक्ति का दर्जा प्राप्त करने और उसे कायम रखने के लिए निधियों को इस्तेमाल किया जाएगा।
निहित खर्च : तयशुदा शर्तों के अनुसार ऋण आवंटन की तिथि से 10वें वर्ष के समापन तक एकल भुगतान के रूप में नाबार्ड को 15,000 करोड़ रुपये के ऋण का पुनर्भुगतान किया जाएगा।
राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों की वास्तविक आवश्यकताओं/खर्चों पर विचार के बाद नाबार्ड के जरिए ईबीआर निधियों को बढ़ाया जाएगा तथा राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों की कार्य एजेंसियों को जारी किया जाएगा। एसबीएम (जी) के लिए निधियां प्राप्त करने के संबंध में राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों की कार्य एजेंसियों को उसका आवंटन तथा ऋण और ब्याज रकम के पुनर्भुगतान के संबंध में राष्ट्रीय पेयजल, स्वच्छता एवं गुणवत्ता केन्द्र प्राप्तकर्ता एजेंसी के रूप में काम करेगा।
इस प्रकार लक्षित समय सीमा के अन्दर एसबीएम (जी) के लक्ष्य प्राप्ति के संबंध में राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए समय पर उचित निधियां प्रदान करने में सहायता होगी।
पृष्ठभूमि : एसबीएम (जी) को 2 अक्टूबर 2014 से प्रभावी बनाकर जारी किया गया था। इसके तहत 2 अक्टूबर, 2019 तक ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वभौमिक स्वच्छता कवरेज का लक्ष्य पूरा करना है। आईएचएचएल के लिए 12,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिसके लिए योग्य लाभार्थियों को व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण के लिए सहायता दी जाएगी, जो केन्द्र और राज्यों के बीच वित्तीय साझेदारी के आधार पर होगी। एसएलडब्ल्यूएम गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिसकी अधिकतम सीमा 500 घरों से अधिक 150/300/500 तक की ग्राम पंचायतों के लिए क्रमश: 7/12/15/20 लाख रुपये होगी। 1ईसी के लिए कुल परियोजना लागत का पांच प्रतिशत राज्य/जि़ला स्तर पर खर्च किया जा सकता है और 3 प्रतिशत केन्द्रीय स्तर पर व्यय किया जा सकता है। पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर और विशेष वर्ग के राज्यों को छोड़कर इन गतिविधियों के लिए केन्द्र तथा राज्यों के बीच निधि साझेदारी 60:40 है। पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर और विशेष वर्ग के राज्यों के लिए वित्तीय साझेदारी 90:10 है।
ग्रामीण भारत में स्वच्छता के क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तेजी से प्रगति कर रहा है। 31 जुलाई 2018 को भारत में स्वच्छता कवरेज 88.9 प्रतिशत है। 2 अक्टूबर 2014 के बाद से 7.94 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। 4.06 लाख गांव, 419 जिले और 19 राज्य तथा केन्द्रशासित प्रदेश खुले में शौच से मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। प्रगति की रफ्तार बराबर बनी हुई है और भारत अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच से मुक्ति प्राप्त करने की राह पर है।
मंत्रिमंडल ने 24 सितम्बर 2014 को एसबीएम (जी) को मंजूरी दी थी, जो 2 अक्टूबर 2014 से प्रभावी हुई। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 2 अक्टूबर, 2019 तक सार्वभौमिक स्वच्छता कवरेज का लक्ष्य प्राप्त करना तय हुआ था। एसबीएम (जी) के तहत महत्वपूर्ण प्रगति हो चुकी है और यह मिशन अपने अंतिम पड़ाव के नजदीक है। सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में प्रगति की रफ्तार कायम है।
वित्त मंत्री द्वारा बजट घोषणाओं के अनुरूप वर्ष 2018-19 के लिए एसबीएम (जी) लक्ष्यों की प्राप्ति के संबंध में वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु एसबीएम (जी) के लिए 30,343 करोड़ रुपये की रकम आवंटित की गई थी। प्रस्ताव था कि 15,343 करोड़ रुपये आम बजटीय समर्थन और शेष 15,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त बजट संसाधनों के जरिए जुटाए जाएंगे। इसके बाद आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता में ईवीआर संबंधी संचालन समूह ने नाबार्ड के जरिए एसबीएम (जी) के लिए 2018-19 के दौरान 15,000 करोड़ रुपये तक ईबीआर को बढ़ाने की सिफारिश की थी।
॥●॥ मंत्रिमंडल ने गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन की खोज और दोहन के लिए नीति-रूपरेखा को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने शेल ऑयल/गैस, कोल बेड मीथेन इत्यादि जैसे गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन की खोज और दोहन के लिए नीति-रूपरेखा को मंजूरी दे दी है। मौजूदा रकबे में गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन की क्षमता का दोहन करने के संबंध में लाइसेंसधारी/पट्टाधारी मौजूदा ठेकेदारों को प्रोत्साहित करने के लिए वर्तमान उत्पादन साझेदारी संविदाओं, सीवीएम संविदाओं और नामित क्षेत्रों के तहत इसका अनुपालन किया जाएगा।
■ लाभ
•इस नीति से वर्तमान संविदा क्षेत्रों में संभावित हाइड्रोकार्बन भंडारों के उपयोग के लिए क्षमता बढ़ेगी, जो अब तक खोजे नहीं गये थे और जिनका दोहन नहीं हुआ था।
• इस नीति के कार्यान्वयन से नयी हाइड्रोकार्बन खोजों के संबंध में अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों में नया निवेश तथा परिणामस्वरूप घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी की आशा की जाती है।
• अतिरिक्त हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज और दोहन से नये निवेश में तेजी आने, आर्थिक गतिविधियों में इजाफा होने, अतिरिक्त रोजगार सृजन होने की आशा है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को लाभ होगा।
• इससे नई, अभिनव और उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी की संभावना बढ़ेगी तथा गैर-पारंपारिक हाइड्रोकार्बन के दोहन के लिए नये प्रौद्योगिकी सहयोग का रास्ता खुलेगा।
पृष्ठभूमि : पीएससी के मौजूदा संविदा नियमों के अनुसार वर्तमान ठेकेदारों को पहले से लाइसेंस और पट्टे पर आवंटित क्षेत्रों में सीबीएम या गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन की खोज और दोहन की अनुमति नहीं है। इसी तरह सीबीएम को छोड़कर संबंधित ठेकेदारों को अन्य हाइड्रोकार्बन की खोज और दोहन की अनुमति नहीं है। पीएससी और सीबीएम ब्लॉकों में विभिन्न ठेकेदारों के अधीन इस समय जो रकबा मौजूद है तथा नामित व्यवस्था में राष्ट्रीय तेल कंपनियों का भारत के तलछट संबंधी बेसिन में एक बड़ा हिस्सा है।
आरंभिक अध्ययन में विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने आकलन किया है कि पांच भारतीय तलछट बेसिनों में 100-200 टीसीएफ के दायरे में संभावित शेल गैस संसाधन मौजूद हैं। कैमबे, कृष्णा-गोदावरी, कावेरी इत्यादि जैसे बेसिनों में शेल ऑयल/गैस होने की मजबूत संभावना है, जहां जैविक संपदा से पूर्ण शेल मौजूद है। पीएसई की पूर्व-नव अन्वेषण लाइसेंस नीति (एनईएलपी)/एनईएलपी व्यवस्था के तहत 72,027 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और सीबीएम संविदाओं के तहत 5269 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारंपरिक या गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन के दोहन और खोज के लिए खोल दिया गया है। इस नीति की मंजूरी के बाद ‘एकल हाइड्रोकार्बन संसाधन प्रकार’ के स्थान पर ‘समान लाइसेंसिंग नीति’ लागू हो जाएगी, जो हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति (एचईएलपी) तथा अन्वेषित लघु क्षेत्र (डीएसएफ) नीति में इस समय लागू है।
पीएससी ब्लॉकों में नये हाइड्रोकार्बन अन्वेषण की लागत रिकवरी और पेट्रोलियम गतिविधियों के संचालन का दायरा तय करने के लिए नीतिगत वित्तीय तथा संविदा संबंधी शर्तों से सहायता होती है। सीबीएम संविदा मामले में पेट्रोलियम लाभ/उत्पादन स्तरीय भुगतान की अतिरिक्त 10 प्रतिशत दर तथा इसके विषय में मौजूदा दर से अधिक को सरकार के साथ नई खोजों के संबंध में साझा करना होगा। नामित ब्लॉकों के लिए अन्वेषण/पट्टा लाइसेंस की मौजूदा वित्तीय और संविदा शर्तों के तहत गैर-पारंपारिक हाइड्रोकार्बन की खोज एवं दोहन की अनुमति के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।
॥●॥ मंत्रिमंडल ने सात राज्यों में 13 नए केंद्रीय विद्यालय तथा मध्यप्रदेश में रतलाम जिले के एलोत में दूसरा जवाहर नवोदय विद्यालय खोलने की स्वीकृति दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने सात राज्यों में 13 नए केंद्रीय विद्यालय (केवी) खोलने तथा मध्यप्रदेश में रतलाम जिले के एलोत में दूसरा जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) खोलने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।
13 नए विद्यालय बांदा (उप्र), वाशिम (महाराष्ट्र), चाकपीकारोंग (मणिपुर), परभम (महाराष्ट्र), नवादा (बिहार), मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश), भदोही (उत्तर प्रदेश), पलामू (झारखंड), सिद्दीपेट (तेलंगाना) कुडामालाकुन्ते (कर्नाटक) सीआईएसएफ सूरजपुर (उत्तर प्रदेश) देवकुंड (बिहार) तथा बावली (उत्तर प्रदेश) में खोले जाएंगे।
मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मध्यप्रदेश में रतलाम जिले के एलोत में अतिरिक्त जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने की स्वीकृति भी दे दी है।
मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी प्रतिशत अधिक है और उस जिले में अतिरिक्त जेएनवी स्थापित करने की मांग की गई है। राज्य सरकार भी विद्यालय स्थापित करने के लिए आवश्यक जमीन और अस्थाई भवन देने में दिलचस्पी दिखाई है।
■ लाभ
फिलहाल केंद्रीय विद्यालय देश में 12 लाख से अधिक विद्यार्थियों को गुणवत्ता संपन्न शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। जवाहर नवोदय विद्यालय देश के विभिन्न भागों में लगभग 2.50 लाख विद्यार्थियों को निशुल्क आधुनिक शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। 13 नए केंद्रीय विद्यालय खुलने से 13 हजार से अधिक पात्र श्रेणी के विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। एलोत में दूसरा जवाहर नवोदय विद्यालय खुलने से छठी से बारहवीं कक्षा के 560 अतिरिक्त विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।
पृष्ठभूमि
मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मार्च, 2017 में ‘चुनौती पद्धति’ के अंर्तगत 1160 करोड़ रुपये के अनुमानित आवंटन के साथ देश के नागरिक/रक्षा क्षेत्र के अंतर्गत 50 नए केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। ये नए केंद्रीय विद्यालय केवल उन्हीं स्थानों पर खोले जाने थे जहां प्रायोजक अधिकारी केंद्रीय विद्यालय के मानकों के अनुसार पहले आओ, पहले पाओ आधार पर जमीन देने या अस्थाई भवन की व्यवस्था करने के लिए आगे आए।
इस स्वीकृति के अनुसार केंद्रीय विद्यालय संगठन ने अधिकारियों द्वारा आवश्यक नियमों को पूरा करने पर 37 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने का प्रशासनिक आदेश जारी किया था।
चुनौती पद्धति के अंर्तगत प्रस्तावों पर विचार के लिए दिशा निर्देश सितंबर 2017 में जारी किए गए। उसके बाद सभी शेष प्रस्ताव तथा नए प्रस्ताव पर बनाई गई समिति ने विचार किया और चुनौती पद्धति के अंर्तगत नए केंद्रीय विद्यालय खोलने के प्रस्तावों पर विचार करने की सिफारिश की। समिति ने चुनौती पद्धति के अंर्तगत अधिकतम भारांक वाले 134 प्रस्तावों की सिफारिश की ताकि स्वीकृति के लिए इसे सक्षम अधिकारी के पास रखा जा सके।
॥●॥ मंत्रिमंडल ने हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा 15 प्रतिशत की प्रदत हिस्सा पूंजी तक नई इक्विटी जारी करने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) द्वारा सेबी तथा अन्य मान्य निर्देशों के अनुसार क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनस प्लेसमेंट (क्यूआईपी) रूट से 15 प्रतिशत की प्रदत इक्विटी पूंजी तक पांच रुपये सममूल्य के 13,87,82700 इक्विटी शेयर जारी करने को अपनी मंजूरी दे दी है।
इसके परिणामस्वरूप एचसीएल में भारत सरकार की हिस्सेदारी 76.05 प्रतिशत से घटकर 66.13 प्रतिशत रह जाएगी। इससे एचसीएल की प्रदत हिस्सा पूंजी वर्तमान 462.61 करोड़ रुपये से बढ़कर 532 करोड़ हो जाएगी। एचसीएल क्यूआईपी से प्राप्त धन का इस्तेमाल अपनी विस्तार योजना में करेगी।
• प्रभाव
एचसीएल की विस्तार योजनाओं के लिए धन उगाही आवश्यक है क्योंकि कंपनी को लगभग 1.90 लाख टन स्तर का उत्पादन लक्ष्य हासिल करना है और देश की शोधित तांबा मांग का 30 प्रतिशत पूरा करना है।
प्रस्तावित विस्तार योजना से लगभग 9300 व्यक्तियों के लिए रोजगार का अवसर प्राप्त होगा।
एचसीएल की विस्तार योजनाएं मध्य प्रदेश, राजस्थान और झारखंड में हैं।
• पृष्ठभूमि
हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) केंद्रीय सार्वजनिक मिनी रत्न (श्रेणी-1) अनुसूची-1, कंपनी है। एचसीएल तांबा अयस्क खनन का काम करने वाली भारत की एकमात्र कंपनी है। एचसीएल बीएसई और एनएसई में सूचीबद्ध है। देश में तांबे के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एचसीएल की खनन क्षमता बढ़ाना आवश्यक है। एचसीएल का उद्देश्य वर्तमान उत्पादन क्षमता 6 गुना बढ़ाकर अगले छह वर्षों में 202 लाख टन करना है।
॥●॥ मंत्रिमंडल ने सिंदरी, गोरखपुर तथा बरौनी में हिन्दुस्तान ऊर्वरक तथा रसायन लिमिटेड द्वारा ऊर्वरक परियोजनाओं को पुर्नजीवित करने में निर्माण सापेक्ष ब्याज के बराबर ब्याज मुक्त ऋण जारी करने को मंजूरी दी
• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने हिन्दुस्तान ऊर्वरक तथा रसायन लिमिटेड द्वारा गोरखपुर, सिंदरी और बरौनी में ऊर्वरक परियोजनाओं को नया जीवन देने के लिए 422.28 करोड़ रुपए, 415.67 करोड़ रुपए तथा 419.77 करोड़ रुपए के निर्माण सापेक्ष ब्याज के बराबर ब्याज मुक्त ऋण देने के ऊर्वरक विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। ब्याज मुक्त ऋण का कुल मूल्य 1257.82 करोड़ रुपए होगा। ब्याज मुक्त ऋण में केवल निर्माण अवधि के दौरान बने ब्याज को कवर किया जाएगा और समय या लागत की वजह से बढ़े खर्च का बोझ संयुक्त उपक्रम कंपनी उठाएगी।
ब्याज मुक्त ऋण का वितरण निर्माण के पहले तीन वर्षों में किया जाएगा। इसका पुनर्भुगतान 11 वर्षों की अवधि में किया जाएगा और निर्माण के दौरान तीन वर्ष के ऋण वि۠तरण अवधि में इस पर ब्याज चुकाने की छूट रहेगी। इसका पुनर्भुगतान अगले आठ वर्षों में चरणबद्ध रूप में होगा।
• पृष्ठभूमि
हिन्दुस्तान ऊर्वरक और रसायन लिमिटेड राष्ट्रीय ताप वि۠द्युत निगम, कोल इंडिया लिमिटेड तथा भारतीय ऊर्वरक लिमिटेड/हिन्दुस्तान फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड की सुंयक्त उद्ययम कंपनी है। यह कंपनी गोरखपुर, सिंदरी और बरौनी की ऊर्वरक परियोजनाओं को पुर्नजीवित करने के लिए 2016 में बनाई गई। ब्याज मुक्त ऋण से परियोजना के लागत व्यय में बचत होगी तथा परियोजना आईआरआर और संभावना अनुपात विशेषकर न्यूनतम ऋण सेवा कवरेज अनुपात में सुधार होगा।
॥●॥ मंत्रिमंडल ने विदेशों में रणनीतिक रूप से महत्वापूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं के लिए बोली लगाने में भारतीय कंपनियों को समर्थन देने के लिए रियायती वित्तस पोषण योजना (सीएफएस) की अवधि बढ़ाने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने विदेशों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं के लिए बोली लगाने में भारतीय कंपनियों को समर्थन देने के लिए रियायती वित्त पोषण योजना (सीएफएस) की अवधि बढ़ाने की मंजूरी दी है।
विवरण : सीएफएस के तहत भारत सरकार 2015-16 से ही विदेशों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं के लिए बोली लगाने में भारतीय कंपनियों को समर्थन दे रही है। योजना का उद्देश्य लगातार प्रासंगिक बना हुआ है, इसलिए प्रस्ताव किया गया कि योजना को 2018 से 2023 तक यानी अगले पांच सालों तक के लिए बढ़ा दिया जाए।
वित्तीय निहितार्थ : जिन ऋणदाता बैंकों के लिए आर्थिक कार्य विभाग द्वारा बजटीय प्रावधान किया जाएगा, उनके संबंध में ब्याज समाकरण समर्थन के भुगतान के वित्तीय निहितार्थ इस प्रकार हैं –
वर्ष
2018-19
2019-20
2020-21
2021-22
2022-23
कुल
• आईईएस राशि (मिलियन अमेरिकी डॉलर में)
6.5
10.00
18.75
29.00
32.00
96.25
आईईएस राशि (करोड़ रुपये में)
42.25
65.00
121.88
188.50
208.00
625.63
नोट : अनुमानित आईईएस केवल मौजूदा परियोजना के संबंध में है।
प्रमुख प्रभाव : सीएफएस के पहले भारतीय कंपनियां विदेशों में बड़ी परियोजनाओं के लिए बोली लगाने में सक्षम नहीं थीं, क्योंकि वित्तीय लागत उनके लिए बहुत अधिक होती थी और चीन, जापान, यूरोप तथा अमेरिका जैसे अन्य देशों के बोलीकर्ता बेहतर शर्तों पर ऋण देने में सक्षम होते थे। इस तरह कम ब्याज दर और लंबे समय के आधार पर इन देशों के बोलीकर्ताओं को फायदा होता था।
इसके अलावा भारतीय कंपनियों द्वारा भारत के रणनीतिक हितों की परियोजनाओं के मद्देनज़र सीएफएस से भारत को यह क्षमता मिलती है, जिसके आधार पर रोजगार सृजन, भारत में सामग्री और मशीनरी की मांग तथा भारत की साख में बढ़ोतरी संभव है।
कार्यान्वयन रणनीति एवं लक्ष्य : योजना के तहत विदेश मंत्रालय भारत के रणनीतिक हितों को ध्यान में रखकर विशेष परियोजनाओं का चयन करता है और उसे आर्थिक कार्य विभाग को भेजता है।
इस योजना के तहत वित्त योग्य रणनीतिक महत्व वाली परियोजना तय की जाती है। इसे आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति मामलों के आधार पर तय करती है। समिति में व्यय विभाग, विदेश मंत्रालय, औद्योगिक संवर्द्धन एवं नीति विभाग, वाणिज्य विभाग, वित्तीय सेवा विभाग और गृह मंत्रालय सदस्य हैं। राष्ट्रीय उप सुरक्षा सलाहकार भी समिति के सदस्य हैं। समिति से मंजूरी मिल जाने के बाद आर्थिक कार्य विभाग एक्जिम बैंक को एक औपचारिक पत्र जारी करता है, जिसमें सीएफएस के अंतर्गत परियोजना के वित्तपोषण की मंजूरी की जानकारी दी जाती है।
यह योजना इस समय भारत के एक्जिम बैंक के जरिए संचालित की जा रही है, जो रियायती वित्त प्रदान करने के लिए बाजार से संसाधन जुटाता है। भारत सरकार एक्जिम बैंक को काउंटर-गारंटी और 2 प्रतिशत का ब्याज समाकरण समर्थन देती है।
पृष्ठभूमि : इस योजना के तहत अगर कोई भारतीय कंपनी किसी परियोजना के लिए संविदा प्राप्त करने में सफल होती है तो भारत सरकार किसी विदेशी सरकार या विदेशी सरकार के स्वामित्व या उसके द्वारा नियंत्रित कंपनी को रियायती वित्त प्रदान करने के संबंध में एक्जिम बैंक को काउंटर गारंटी और 2 प्रतिशत का ब्याज समाकरण प्रदान करती है।
योजना के तहत एक्जिम बैंक ऋण प्रदान करता है, जिसकी दर एलआईबीओआर (औसत छह माह) + 100 बीपीएस से अधिक न हो। ऋण के पुनर्भुगतान की गारंटी विदेशी सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।
॥●॥ मंत्रिमंडल ने कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी) को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी) को मंजूरी दी है।
विवरण : एएसआरबी में अब तीन सदस्यों के स्थान पर चार सदस्य होंगे। बोर्ड में एक अध्यक्ष और तीन सदस्य होंगे।
एएसआरबी तीन वर्षों की अवधि या 65 वर्ष की आयु पूर्ण करने, जो भी पहले हो, तक होगी।
स्वायत्तता, गोपनीयता, उत्तरदायित्व और एएसआरबी के कारगर संचालन के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उसे आईसीएआर से पृथक कर दिया जाएगा तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग से जोड़ दिया जाएगा।
एएसआरबी का बजट भी आईसीएआर से पृथक करके कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के अधीन कर दिया जाएगा। एएसआरबी का सचिवालय में अपना प्रशासनिक स्टॉफ होगा और उसका स्वतंत्र प्रशासनिक नियंत्रण होगा।
प्रभाव : एक अध्यक्ष और तीन सदस्यों वाले चार सदस्यीय संस्था के गठन से एएसआरबी का कामकाज दुरूस्त हो जाएगा। इसके कारण भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी, जो कृषि समुदाय और कृषि के लिए फायदेमंद होगी। इसके अलावा देश में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा संबंधी प्रमुख एजेंसी आईसीएआर में विभिन्न वैज्ञानिक पदों पर प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों की भर्ती पारदर्शी और कुशल तरीके से संभव होगी।
पृष्ठभूमि : नवम्बर 1973 में सरकार ने कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड की स्थापना को मंजूरी दी थी, जिसमें एक पूर्णकालिक अध्यक्ष की नियुक्ति शामिल थी। इसके तहत कृषि अनुसंधान सेवा एवं अनुसंधान पदों पर विभिन्न वैज्ञानिकों की नियुक्ति के संबंध में स्वतंत्र भर्ती एजेंसी के रूप में काम करना तय किया गया था। एएसआरबी के कामकाज में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड के पुनर्गठन का प्रस्ताव किया गया था। इस प्रस्ताव को अक्टूबर 1986 में मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी जिसके तहत सदस्यता एक से बढ़ाकर तीन कर दी गई थी। 1986 में हुए एएसआरबी के पुनर्गठन के बाद से बोर्ड का कामकाज बढ़ता गया और कृषि विज्ञान के क्षेत्र में उसकी भूमिका भी बढ़ गई। तदनुसार बोर्ड के दायरे को बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई, जिसके मद्देनज़र अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों को विशेषज्ञता के आधार पर शामिल किया जाना तय हुआ।