गंगा को प्रवाह की जरुरत - प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र



बंगलूरू, कर्नाटक । गंगा मात्र एक नदी नहीं है बल्कि यह भारत की संस्कृति है, लोगों की जीवन रेखा हैं। माँ गंगा को संरक्षित करके लगभग 40 करोड़ लोगों को सुरक्षित किया जा सकता है। गंगा को नदी की नजरिये से देखकर कभी भी सफाई नहींं किया जा सकता है। गंगा को प्रवाह की जरुरत है इनको स्वच्छ रखना वक्त की मांग है। गंगा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए आध्यात्म, विज्ञान और तकनीक तीनों पहलुओं से काम करने की जरुरत है। इसमें से एक भी पहलू कमजोर हुआ तो गंगा स्वच्छ नहीं हो सकती। यह बात इंजीनियरों की संस्था आईईटी की ओर से बंगलूरू में आयोजित दो दिवसीय आईओटी इंडिया कॉन्फ्रेंस 2017 के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता आईआईटी बीएचयू इलेक्ट्रॉनिक विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र ने कही।

उन्होंने कहा कि यदि सभी इंजीनियर्स एकजुट होकर आगे आए तो निश्चित तौर पर गंगा का मुद्दा ग्लोब्लाइज होगा और जनता के सामने सच्चाई जाने के कारण काम भी ठीक ढंग से होगा। प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने कहा कि मेरा इंजीनियरिंग में स्नातक कावेरी के तट पर तथा इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की दीक्षा माँ गंगा के गोद में हुआ है। गोमुख से बंगाल तक 2550 किलोमीटर की यात्रा करने वाली माँ गंगा विभिन्न कारणों से प्रदूषित होती चली आ रही है। गंगा के तटीय इलाकों में बसे सभी महानगरों की समस्या है जिसके निराकरण के लिए सरकारों ने गंभीरता नहींं दिखाई, यही वजह है कि आज भी गंगा जी में अनवरत मलजल सिवेज और नालों के माध्यम से गिरने का सिलसिला जारी है। गंगा को लेकर 1980 से राजनीति होती रही है मगर नतीजा गंगा निरंतर अपने असली स्वरुप को खोती चली गई है। मौजूदा सरकार से काफी उम्मीदें थी मगर तत्कालीन मंत्री रही उमा भारती ने पहले कहा 2 महीने फिर कहा 2 वर्ष फिर उन्होंने कहा वर्ष 2020 तक गंगा साफ हो जाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताया कि नए मंत्री से उम्मीद है वह कुछ बेहतर करेंगे।

बंगलूरू में दूसरी बार हुए इस अधिवेशन में पहले दिन गंगा का मुद्दा छाया रहा। गौरतलब है कि आईइटी 146 वर्ष पुरानी संस्था है जिसका मुख्यालय यूके में स्थित है। इस संस्था से 150 देशों से करीब 1 लाख 67 हजार लोग जुड़े है। दो दिवसीय अधिवेशन में करीब छ: सौ से ज्यादा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

ताजा समाचार

National Report



Image Gallery
इ-अखबार - जगत प्रवाह
  India Inside News