--डॉ. इन्द्र बली मिश्र,
काशी हिंदू विश्वविद्यालय,
वाराणसी-उत्तर प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी पर पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, जिसे बड़े ही हषोर्ल्लास और भक्ति के साथ मनाई जाती है।
महाशिवरात्रि का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। भारतीय पंचांग के अनुसार फाल्गुन के महीने में मासिक शिवरात्रि को महा शिवरात्रि के रूप में जाना जाता है। इस साल महाशिवरात्रि का व्रत 01 मार्च को मनाया जाएगा। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन भक्त व्रत रख कर शिव-पार्वती की पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि शिवरात्रि के दिन जो व्यक्ति भक्ति भाव से भगवान शिव जी की पूजा आराधना करता है भगवान भोले नाथ उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
■ शुभ मुहुर्त
● अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:47 से दोपहर 12:34 तक।
● विजय मुहूर्त : दोपहर 02:07 से दोपहर 02:53 तक।
● गोधूलि मुहूर्त : शाम 05:48 से 06:12 तक।
● सायाह्न संध्या मुहूर्त : शाम 06:00 से 07:14 तक।
● निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:45 से 12:35 तक।
▪︎ खास संयोग - धनिष्ठा नक्षत्र में परिघ योग रहेगा। धनिष्ठा के बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा। परिघ के बाद शिव योग रहेगा। सूर्य और चंद्र कुंभ राशि में रहेंगे।
▪︎ पूजा विधि- महाशिवरात्रि की विधि-विधान से विशेष पूजा निशिता या निशीथ काल में होती है। हालांकि चारों प्रहरों में से अपनी सुविधानुसार यह पूजन कर सकते हैं। साथ ही महाशिवरात्री के दिन रात्रि जागरण का भी विधान है।
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा होती है। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, आंकड़े के फूल, चावल आदि अर्पित करें साथ ही भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व है।