चेन्नई,
इंडिया इनसाइड न्यूज़
उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडू ने नागरिकों से एकल प्लास्टिक का उपयोग न करने और स्थानीय समुदायों में कूड़े वाले प्लास्टिक को साफ करने का आह्वान किया है।
चेन्नई स्थित मद्रास विश्वविद्यालय के शताब्दी सभागार में श्री धर्ममूर्ति राव बहादुर कलवला कुन्नन चेट्टी की 150वीं जयंती पर अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्लास्टिक के एकल-उपयोग को समाप्त करने के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह यह वास्तव में एक बहुत ही स्वागत योग्य अपील है।
नागरिकों से इसका समर्थन करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि “यह महात्मा गांधी को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि होगी। यह श्री कलवला कुन्नन चेट्टी गारु द्वारा अपनाए गए आदर्शों के अनुरूप होगा”।
स्वतंत्रता-पूर्व किए गए परोपकारी कार्यों के लिए धर्ममूर्ति राव बहादुर कलवला कुन्नन चेट्टी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, श्री नायडू ने ट्रस्टियों को ईमानदारी से उनकी विरासत और समाज के कल्याण के लिए कार्य करने और उसे सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने के लिए बधाई दी।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री कलवला कुन्नान चेट्टी ने देश के औपनिवेशिक शासन के दौरान सामाजिक उत्थान के मिशन को गंभीरता से लेते हुए अनेक ऐसी समाज कल्याण योजनाओं को अंजाम दिया।
उन्होंने कहा कि चेट्टी गुरु जैसे सृजनकर्ताओं और अर्थ वितरकों के योगदान को मान्यता देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह न केवल सरकार को राजस्व प्रदान करते हैं, बल्कि रोजगार उत्पन्न करने के साथ-साथ सामाजिक कल्याण में भी योगदान देते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सभी व्यावसायिक उद्यमों का एक सामाजिक परिप्रेक्ष्य है और बड़ी कंपनियों को सीएसआर गतिविधियों के लिए अपने लाभ का 2 प्रतिशत उपयोग में लाना चाहिए।
स्वच्छ भारत मिशन और सामाजिक रूप से प्रासंगिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए कुछ कॉरपोरेट निकायों द्वारा दिए गए समर्थन की सराहना करते हुए श्री नायडू ने कहा कि इस दिशा में और अधिक कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सीएसआर परियोजनाओं को परिणामोन्मुखी और समुदाय संचालित होना चाहिए ताकि यह एक स्थायी आंदोलन बन सकें।
उन्होंने कहा कि दुनिया में सामाजिक रूप से प्रासंगिक व्यवसाय की वृद्धि को देखते हुए यह आवश्यक है कि वैश्विक निकाय परोपकारी कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए फाउंडेशनों की स्थापना कर चुके हैं।
कम आयु से ही छात्रों में दान, सहानुभूति, करुणा और स्वैच्छिकता के मूल्यों को आत्मसात करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को अपने छात्रों को समाज के आदर्श नागरिकों में बदलने के लिए सशक्त रूप से कार्य करना होगा। ताकि वे व्यापक समुदायों के प्रति अपने उत्त्रदायित्व और जिम्मेदारी को निभा सकें।
स्थानीय समुदाय के लिए विद्यालय संसाधन केंद्र के रूप में कार्य कर सकते हैं, इस दिशा में अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री नायडू ने कहा कि उन्हें स्वैच्छिक रूप सामुदायिक कार्य करना चाहिए और सामाजिक एवं लैंगिक न्याय, पारिवारिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, बाल श्रम, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
श्री नायडू ने कहा कि भाषा हमारे विचारों और भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम है और प्रत्येक भाषा का अपना समृद्ध और विविध साहित्य है, इसलिए लोगों को अपनी मातृभाषा की उपेक्षा किए बिना अधिक से अधिक भाषाएं सीखनी चाहिएं।
उन्होंने कहा कि “भाषाएं हमें एक साथ ला सकती हैं। श्री नायडू ने कहा कि भाषाएं हमारे स्वयं के ज्ञान को बढ़ाने और विविध विचारों की व्यापकता में सहायता करती हैं” ।
श्री नायडू ने कहा कि शिक्षा को समावेशी और सार्वभौमिक बनाने के लिए स्थानीय भाषा या मातृभाषा को कक्षा 5 तक शिक्षा का माध्यम बनाना आवश्यक है और इस तरह के कदम से युवा मस्तिष्क को नवीन अवधारणाओं के लिए सहायता मिलेगी।
उन्होंने गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें उपलब्ध कराने और जहां तक संभव हो सके भारतीय भाषा शिक्षकों की भर्ती के द्वारा शिक्षा में भारतीय भाषाओं के उपयोग को प्रोत्साहन देने का आह्वान किया।
श्री नायडू ने शताब्दी वर्ष मनाने के लिए एक डाक टिकट भी जारी किया।
इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल, बनवारीलाल पुरोहित, तमिलनाडु के मत्स्य पालन और कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार मंत्री जयकुमार, मुख्य पोस्टमास्टर जनरल एम• संपत, धर्ममूर्ति राव बहादुर कलवला कुन्नन चेट्टी चैरिटीज़ के अध्यक्ष, एम• वेंकटेशपेरुमल और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।