15वें वित्‍त आयोग ने कर्नाटक में.....



कर्नाटक, 25 जून 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने कर्नाटक में अर्थशास्त्रियों से बातचीत की

15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन• के• सिंह और इसके सदस्यों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने अर्थशास्त्रियों से बातचीत के साथ अपना कर्नाटक दौरा शुरू किया।

वित्त आयोग के विचारार्थ विषयों से संबंधित अनेक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं-

• विभिन्न प्रदर्शन संकेतकों पर राज्यों को प्रोत्साहन देने से संबंधित मुद्दों पर चर्चाएं की गईं- विशेषज्ञों ने इस तरह के प्रोत्साहनों और संभावित संकेतकों के स्वरूप के बारे में अपने-अपने विस्तृत सुझाव दिए।

• विशेषज्ञों ने कर्नाटक के अच्छे राजकोषीय प्रदर्शन की सराहना करते हुए राज्यों के भीतर मौजूद भारी क्षेत्रीय विषमता पर प्रकाश डाला। भारत के अन्य प्रमुख राज्यों में इसी तरह की क्षेत्रीय विषमताओं पर भी कुछ संभावित समाधानों के साथ विचार-विमर्श किया गया।

• लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण, जिसमें कर्नाटक अग्रणी है, के क्षेत्र में विभिन्न हालिया अध्ययनों और सरकार के तीसरे स्तर से संबंधित रूझानों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के मामले में व्यापक अंतर होने पर चिंता जताई। शहरी स्थानीय निकायों के संबंध में तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण बढ़ती राजकोषीय जरूरत की ओर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया गया और बेहतर राजस्व संग्रह से संबंधित सुझाव आयोग को दिए गए तथा इसके साथ ही भूमि प्रबंधन को बेहतर करने से जुड़े कुछ उपायों से आयोग को अवगत कराया गया।

• विशेषज्ञों ने आयोग द्वारा जनगणना 2011 के जनसंख्या डेटा के उपयोग का मुद्दा भी उठाया। ज्यादातर विशेषज्ञों की यही राय थी कि नवीनतम जनसंख्या डेटा का इस्तेमाल अवश्य ही किया जाना चाहिए, क्योंकि यह राज्यों की वर्तमान जरूरतों को दर्शाता है। हालांकि, ऐसे राज्यों के लिए प्रोत्साहन तय किए जाने चाहिए, जिन्होंने बेहतर ढंग से जनसंख्या नियंत्रण सुनिश्चित किया है।

• केन्द्र प्रायोजित योजनाओं के जरिए अंतर-सरकारी अंतरण, राजस्व घाटे से संबंधित अनुदान और विशेष उद्देश्यों से संबंधित अनुदान के मुद्दों पर दिए गए सुझावों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन• के• सिंह और इसके सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान जो अर्थशास्त्री मौजूद थे, उनमें ये शामिल हैं- टी• आर• रघुनंदन, पूर्व संयुक्त सचिव, पंचायती राज मंत्रालय; डॉ• ज्योत्सना झा, निदेशक, बजट एवं सार्वजनिक नीति केंद्र; डॉ• रूपा चंदा, प्रोफेसर, आईआईएम, बेंगलुरू; डॉ• नरेंद्र पाणि, प्रोफेसर, एनआईएएस; वेंकट राव घोरपड़े; एच• ए• सी• प्रसाद, महासचिव, एफकेसीसीआई; डॉ• अश्विन महेश, सीईओ, मापुनिटी, प्रणय कोटास्थेन, अनुसंधान प्रमुख, तक्षशिला संस्थान, बेंगलुरू; एम• गोविंदा राव, एमेरिटस प्रोफेसर, एनआईपीएफपी एवं काउंसलर, तक्षशिला इंस्टीट्यूशन, बेंगलुरू; डॉ• एस• एस• मीनाक्षीसुंदरम, विजिटिंग प्रोफेसर, राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान, बेंगलुरू; डॉ• कला श्रीधर, प्रोफेसर, सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन संस्थान, बेंगलुरू; डॉ• डी• राजशेखर, प्रोफेसर, सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन संस्थान, बेंगलुरू; प्रो• आर• एस• देशपांडे, पूर्व निदेशक, सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन संस्थान, बेंगलुरू; एम• जी• चंद्रकांत, निदेशक, आईएसईसी और डॉ• एस• आर• केशव, प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग, बेंगलुरू विश्वविद्यालय।


● 15वें वित्‍त आयोग ने कर्नाटक में आईटी विशेषज्ञों से बातचीत की

15वें वित्‍त आयोग के कार्य क्षेत्र और सीमाओं के पैरा 7(5) में कहा गया है कि आयोग निम्‍नलिखित क्षेत्रों में प्रत्‍यक्ष लाभ, हस्‍तांतरण और सार्वजनिक वित्‍त प्रबंधन प्रणाली को अपनाकर बचत को बढ़ावा देकर, डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ावा देकर तथा सरकार और लाभान्वितों के बीच की परतों को हटाकर राज्‍यों के लिए कार्य निष्‍पादन के आधार पर औसत दर्जे के प्रोत्‍साहनों के प्रस्‍ताव पर विचार कर सकता है।

इस बात को ध्‍यान में रखते हुए आयोग ने निम्‍नलिखित के साथ विस्‍तृत बातचीत की –

· नंदन नीलेकणि – भारत के विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण(यूआईडीएआई) के पूर्व अध्‍यक्ष।

· संजय जैन – जाने-माने उत्‍पाद प्रबंधन विशेषज्ञ जिनका गूगल, आधार आदि में अनुभव है, आरबीआई की भुगतान समिति के पूर्व सदस्‍य।

· डॉ• विवेक राघवन- मुख्‍य उत्‍पाद प्रबंधक और यूआईडीएआई में बायोमीट्रिक आर्कीटेक्‍ट, जाने-माने एआई विशेषज्ञ।

· तनुज भोजवानी– सहायक, आईएसपीआईआरटी, डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था नीति में अनुभव और डिजिटल वस्‍तुओं पर अंतर्राष्‍ट्रीय चिंतन में योगदान।

· डॉ• प्रमोद वर्मा – आधार और अनेक अन्‍य राष्‍ट्रीय प्रणालियों के चीफ आर्कीटेक्‍ट।

हस्‍तक्षेपों के संभावित क्षेत्रों की जानकारी हासिल करने के लिए आयोग ने निम्‍नलिखित के बारे में विस्‍तृत विचार-विमर्श किया –

· आईटी के विकास में तेजी और उसे बढ़ावा (क्षेत्र के आधार पर अनुदान, यदि उचित हो)

· डीबीटी को बढ़ावा

· डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था को प्रोत्‍साहन और

· प्रभावी सार्वजनिक वित्‍त प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्‍वयन

आयोग ने प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण प्रौद्योगिकी को विद्युत सब्सिडी और संभावित जल सब्सिडी तक बढ़ाने की संभावना के बारे में विस्‍तृत विचार-विमर्श किया। बातचीत के दौरान डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए स्‍टैंप डयूटी के डिजिटलीकरण, अन्‍य डिजिटल भुगतानों, डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण, विकास के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्‍तेमाल और राज्‍यों के बीच टेक्‍नोलॉजी के फासले को कम करने के बारे में चर्चा की।


● 15वें वित्त आयोग ने कर्नाटक की पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मुलाकात की

15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन• के• सिंह ने आयोग के सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कर्नाटक की पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

आयोग को सूचित किया गया कि संविधान की 11 अनुसूची में परिकल्पित पीआरआई के सभी 29 कार्यों को कर्नाटक की पंचायती राज संस्थाओं को सौंपा गया है और राज्य चौथे राज्य वित्त आयोग ( 2018-19 to 2022-23) की सिफारिशों के अनुसार वर्तमान में धनराशि जारी कर रहा है।

कर्नाटक में कुल 6228 पंचायती राज संस्थाएं हैं जिनमें से 30 जिला परिषद, 177 तालुक पंचायत और 6021 ग्राम पंचायतें हैं।

चौथे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार

1• वर्ष 2018-2019 से वर्ष 2022-23 की अवधि का स्थानीय निकायों को हस्तांतरित होने वाला गैर-ऋण शुद्ध राजस्व (एनएलएनओआरआर) 42 प्रतिशत से बढ़ा कर 48 प्रतिशत किया जाएगा।

2• एनएलएनओआरआर का 1 प्रतिशत वृहद बैंगलुरू नगर निगम के लिए निर्धारित किया जा सकता है, 47 प्रतिशत पीआरआई और यूएलबी को 75:25 के अनुपात में आवंटन के लिए छोड़ा जा सकता है। (यानी पीआरआई और यूएलबी की क्रमशः 35 प्रतिशत और 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी)

3• केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों को राज्य हस्तांतरण के भाग के रूप में शामिल नहीं किये जाने चाहिए।

14वें वित्त आयोग ने वर्ष 2015-20 की अवधि के लिए कर्नाटक हेतु 8359.79 करोड़ रुपये की राशि मूलभूत अनुदान के रूप में (कुल अनुदानों का 4.64 प्रतिशत) और 928.87 रुपये निष्पादन अनुदान के रूप में (कुल अनुदानों का 4.64 प्रतिशत) प्रदान करने की सिफारिश की है।

आयोग ने देखा कि :

• पीआरआई को जारी होने वाले मूलभूत और निष्पादन अनुदानों में क्रमशः वर्ष 2015-16 से 2018-19 और 2016-17 से 2017-18 के दौरान हर साल मामूली कमी आई है। वर्ष 2018-19 में पीआरआई को कोई भी निष्पादन अनुदान जारी नहीं किया गया।

• राज्य वित्त आयोगों का गठन समयबद्ध रूप से नहीं किया गया है – चौथे राज्य वित्त आयोग को आदर्श रूप से अब तक गठित हो जाना चाहिए।

• चौथे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के बावजूद राज्य सरकार ने केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों के राज्य के भाग को शामिल कर लिया।

• 14वें वित्त आयोग द्वारा केवल ग्राम पंचायतों के लिए अनुदानों की सिफारिश किये जाने के मद्देनजर 15वें वित्त आयोग को इस बारे में फैसला करना होगा कि क्या वह अनुदानों की सिफारिश राज्य की तीन स्तरीय पीआरआई में से केवल ग्राम पंचायतों के लिए करे।

बैठक में मौजूद पीआरआई के प्रतिनिधियों में सी• नारायणस्वामी, सदस्य, पंचायत राज परिषद, वी• वाई• घोरपडे, उपाध्यक्ष, कर्नाटक राज्य विकेंद्रीकृत योजना और विकास समिति, मंजूनाथ, अध्यक्ष चिक्कबल्लपुरा जिला पंचायत, जयम्मा, अध्यक्ष, बेंगलुरु ग्रामीण जिला पंचायत, नीलकांतप्पा एम• कुसागुरा, अध्यक्ष, रानीबेनुरु तालुक पंचायत, पुष्पा राजेश, अध्यक्ष, सोमावरपेट तालुक पंचायत, सतीश के• एस, सदस्य कदबा, ग्राम पंचायत, गुब्बी तालुक और अध्यक्ष, कर्नाटक स्टेट ग्राम पंचायत मैम्बर फैडरेशन, पी• पी• बोपन्ना, अध्यक्ष, पालीबेटा ग्राम पंचायत विराजपेट तालुक और महेश कुमार एस• के•, अध्यक्ष, डोड्डाजला ग्राम पंचायत, बेंगलुरु (उत्तर) शामिल थे।

आयोग ने पीआरआई के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत की गई सभी चिंताओं का संज्ञान लिया और उन्हें केंद्र सरकार को की जाने वाली अपनी सिफारिशों में हल करने का वादा किया।


● 15वें वित्‍त आयोग ने कर्नाटक शहरी स्‍थानीय निकाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की

15वें वित्‍त आयोग के अध्‍यक्ष एन• के• सिंह ने आयोग के सदस्‍यों और वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ कर्नाटक शहरी स्‍थानीय निकायों के प्रतिनिधियों से भेंट की।

आयोग को जानकारी दी गई कि :

· कर्नाटक में संविधान की 12वीं अनुसूची में उल्लिखित 18 में से सभी 17 कार्यों को शहरी स्‍थानीय निकायों को हस्‍तांतरित कर दिया गया है। अग्निशमन का केवल एक कार्य वृहद बेंगलुरू महानगर पालिका (बीबीएमपी) को दिया गया है।

· राज्‍य इस समय चौथे राज्‍य वित्‍त आयोग (2018-19 से 2022-23) की सिफारिशों के अनुसार धनराशि जारी कर रहा है।

· कर्नाटक में कुल 280 शहरी स्‍थानीय निकाय हैं, जिनमें से 115 शहरी नगर पालिका परिषदें, 92 शहर पंचायतें, 58 शहर नगर परिषदें, 11 नगर निगम और 4 अधिसूचित क्षेत्र परिषदें हैं।

चौथे राज्‍य वित्‍तीय आयोग की सिफारिशों के अनुसार, (2018-19 से 2022-23)

· राज्‍य के गैर ऋण शुद्ध राजस्‍व (एनएलएनओआरआर) का 48 प्रतिशत स्‍थानीय निकायों को आवंटित किया जाएगा।

· एनएलएनओआरआर का 1 प्रतिशत वृहद बेंगलुरू नगर निगम के लिए निर्धारित किया जा सकता है, 47 प्रतिशत पीआरआई को और 75:25 के अनुपात में यूएलबी को (यानी पीआरआई और यूएलबी की हिस्‍सेदारी क्रमश: 35 प्रतिशत और 12 प्रतिशत होगी)।

· केन्‍द्रीय वित्‍त आयोग के अनुदानों को राज्‍य हस्‍तांतरण के भाग के रूप में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

आयोग को जानकारी दी गई :

i. जीआईएस आधारित संपत्ति कर प्रणाली के लिए एएएसटीएचआई परियोजना : इस परियोजना के अंतर्गत संपत्ति कर मूल्‍य, वार्षिक किराया मूल्‍य आकलन से पूंजी मूल्‍य विधि में परिवर्तित हुआ है और जीआईएस आधारित संपत्ति कर सूचना प्रणाली को रखा गया है। इसके अलावा एक ‘स्‍व-आकलन’ प्रणाली लागू की गई है, जिसमें संपत्ति कर की गणना की जिम्‍मेदारी नगर के अधिकारियों से बदलकर संपत्ति मालिकों को दे दी गई है।

ii. कर्नाटक नगर आंकड़ा सोसाइटी (केएमडीएस): राज्‍य में कर्नाटक नगर आंकड़ा सोसाइटी का गठन किया गया, जिसने कनार्टक में शहरी स्‍थानीय निकायों में नागरिक सेवाओं और नगर निगम प्रशासन के लिए आईटी एप्लीकेशन्‍स की शुरुआत की, उनकी वेबसाइट का प्रबंधन किया और इससे नगर निगम के पास आंकड़ों का भंडार हो गया।

आयोग ने पाया कि :

· यूएलबी को 2017-18 और 2018-19 को कार्य निष्‍पादन अनुदान जारी नहीं किया गया।

· राज्‍य सरकार को आदर्श रूप में अब तक राज्‍य वित्‍त आयोग-5 का गठन कर लेना चाहिए था – साथ ही पिछले राज्‍य वित्‍त आयोग का समय पर गठन नहीं किया गया।

· राज्‍य सरकार ने राज्‍य अंतरण के तहत केन्‍द्रीय वित्‍त आयोग के अनुदान को शामिल किया (राज्‍य वित्‍त आयोग-4 की इसके खिलाफ सिफारिश के बावजूद)।

· वर्ष 2018-19 में शहरी स्‍थानीय निकायों के लिए विज्ञापन कर से 200 करोड़ रुपये की आमदनी का अनुमान लगाया गया था। तथापि जीएसटी ने इस कर को सम्मिलित कर लिया। इस संबंध में राज्‍य सरकार ने जवाब दिया कि राज्‍य वित्‍त आयोग-4 द्वारा शहरी स्‍थानीय निकायों को प्रतिवर्ष एनएलएनओआरआर का 0.5 प्रतिशत अतिरिक्‍त अंतरण प्रदान किया गया जिसमें इस कमी को ध्‍यान में रखा गया।

बैठक में शहरी स्‍थानीय निकायों के मौजूद प्रतिनिधियों में बीबीएमपी की मेयर गंगमबाईक मल्लिाकार्जुन, बीबीएमपी वार्ड संख्‍या 29 के पार्षद पद्मनाभ रेड्डी, बीबीएमपी में विपक्ष के नेता बी• एस• सत्‍यनारायण, बीबीएमपी वार्ड संख्‍या 145 के पार्षद बासवानाऊदी, तुमकुरु नगर निगम की उप महापौर रूपश्री बी• एस•, शिवमोगा नगर निगम के उप महापौर चन्‍नबासप्‍पा एस• एन•, शिवमोगा नगर निगम पार्षद बी• ए• रमेश हेगडे, कम्‍पली टीएमसी के अध्‍यक्ष एम• सुधीर, मरियममनहल्‍ली टभ्‍पी के अध्‍यक्ष एच• विशुनायक और खुदलागी टीपी के पार्षद और स्‍थायी समिति के अध्‍यक्ष जी• राघवेन्‍द्र शामिल हैं।

आयोग ने शहरी स्‍थानीय निकायों के प्रतिनिधियों द्वारा रखी गई सभी चिंताओं पर गौर किया और वायदा किया कि उन्‍हें केन्‍द्र सरकार को दी जाने वाली सिफारिशों में रखा जाएगा।

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