जोधपुर 26 नवबर। शहर के शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री बिना किसी रोकटोक के हो रही है। रंग बिरंगे पाउचों में बिकने वाले ये उत्पाद युवाओं के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहे है। वंही इसकी रोकथाम के लिए बने सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा 2003) का भी इन शिक्षण संस्थाओं के आसपास शत प्रतिशत उल्लंघन हो रहा है। यह जानकारी सितंबर 2017 में जोधपुर शहर के शैक्षणिक संस्थाओं पर कराए गए एक सर्वे में सामने आई है।
यह अध्ययन संबंध हेल्थ फाउंडेशन द्वारा जोधपुर के 20 शैक्षणिक संस्थानों के आसपास किस तरह से कोटपा का उल्लंघन हो रहा है इस पर कराया गया था। केाटपा की धारा 6 बी के तहत शैक्षणिक संस्थानों 100 गज की दूरी में तम्बाकू और तम्बाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। इसके साथ ही इस अधिनियम में तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक का साइन बोर्ड हर स्कूल के बाहर लगाना आवश्यक है लेकिन जोधपुर के शत प्रतिशत शैक्षणिक संस्थान के बाहर ऐसे बोर्ड नहीं पाए गए। शैक्षणिक संस्थानों द्वारा यह केाटपा का साफ तौर पर उल्लंघन है।
संबंध हेल्थ फाउंडेशन ने सीओटीपीए की धारा 6 बी के लागू करने के मूल्यांकन करने के लिए तस्वीरों वाला सर्वे इस साल के सिंतबर महीने में कराया था। सर्वे में जोधपुर के पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण क्षेत्रों के 20 संस्थानों को शामिल किया गया था।
इस सर्वे का निष्कर्ष बहुत ही चिंताजनक पाया गया है। सर्वे में पाया गया है कि जोधपुर के इन सभी 20 शैक्षिक संस्थानों के 100 गज की दूरी के भीतर तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पादों की बिक्री की दुकानें हैं। अर्थांत् 100 प्रतिशत संस्थान कोटपा का उल्लंघन कर रहे हैं। इनमें 45 प्रतशित स्कूल परिसरों से 0-35 गज की दूरी के भीतर ही ऐसी दुकानें हैं। बाकी 55 प्रतिशत तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पादों की दुकानें 100 गज की दूरी के भीतर है जिससे खतरनाक तम्बाकू और इसके उत्पाद विद्यार्थियेां को मिलने में आसानी होती है। ऐसे में इन जहरीले उत्पादों के खुल्लम-खुला प्रचार से उनमें इनके प्रति सहज तरीके से आकर्षण पैदा होने की बडी आशंका है।
सर्वे में यह भी पाया गया कि किसी भी संस्थान के मुख्य द्वार पर अधिनियम के प्रावधानों के तहत आवश्यक तम्बाकू निशेध साइनबोर्ड नहीं लगाए गए थे।
सर्वे में शामिल किए गए 20 में से 4 स्कूल परिसरों से केवल 20 गज की दूरी के भीतर ही तंबाकू विक्रय की दुकाने पाई गईं। इसके अलावा 5 ऐसे स्कूल पाए गए जिनके परिसर से 21-35 गज के भीतर तंबाकू विक्रय की दुकानें थीं जबकि 4 अन्य के परिसरों से ये ऐसी दुकानें 36-50 गज की दुरी के भीतर मिलीं।
इंडियन अस्थमा केयर सोसायटी के अध्यक्ष धर्मवीर कटेवा ने बताया कि राजस्थान में शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री चिंताजनक है। युवाअेां को इन जहरीले उत्पादों से बचाने के लिए कोटपा की पालना सुनिश्चिित करानी चाहिए, ताकि इनका भविष्य सुरक्षित बनाया जा सके।
उन्होने बताया कि सर्वे के निष्कर्षों से बच्चों को तम्बाकू के खतरनाक प्रभावों से रक्षा और राज्य के शैक्षणिक संस्थानों को तम्बाकू मुक्त करने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा तुरंत हस्तक्षेप करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा इस पर रोक लगाने के सक्रिय उपाए किए हैं और इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की गई है लेकिन सरकार के प्रयासों को सफल बनने के लिए सभी हितधारकों को एक साथ मिलकर काम करना हेागा।
अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (एम्स), जोधपुर के ईएनटी विभाग के प्रमुख डा• अमित गोयल ने बताया कि हर साल तम्बाकू सेवन से संबंधित 10 लाख रोगियों की मौत समय से पहले हो जाती है। जिसमें बीड़ी से 5 लाख 80 हजार, सिगरेट से 3.5 लाख और धूम्र रहित तम्बाकू पदार्थों के सेवन से 3.5 लाख लोग शामिल है। तम्बाकू सेवन करने वालों में 90 प्रतिशत लोग तम्बाकू सेवन की शुरुआत अपनी किशोरावस्था में करते हैं। तम्बाकू के सेवन करने वाले जब तक इसके दुष्परिणामों को महसूस करते हैं तब तक वे इसके आदी हो चुके होते हैं।
इतना ही नहीं रोजाना 5,500 बच्चे तम्बाकू निर्मित उत्पादों जैसे सिगरेट, बीडी, गुटका, पान मसाला आदि की गिरफ्त में आ रहे हैं। राजस्थान में प्रतिदिन लगभग 250 नए लोग तम्बाकू की लत का शिकार हो रहे हैं। बीड़ी इन सब उत्पादेां से हानिकारक साबित हो रही है।
वर्ष 2010 में वैश्विक वयस्क तम्बाकू सर्वेक्षण (गेट्स) के अनुसार राजस्थान में 32 प्रतिशत करीब 1.5 करोड़ लोग किसी ना किसी रूप में तम्बाकू का सेवन करते हैं और इनमें से 72 हजार लोगों की मृत्यु तम्बाकू जनित रोगों के कारण प्रतिवर्ष हो जाती है। राज्य में किशोरों में तम्बाकू का सेवन शुरू करने की औसत आयु 17 साल है जबकि किशोरियों में यह आयु 14 साल है।
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