--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■ छत्तीसगड की राजनीति में हलचल पैदा करने वाला
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के दो मुख्य मालिकों में से एक रवि उप्पल को दुबई में हिरासत में लिया गया है। उप्पल की जांच छत्तीसगढ़ पुलिस और मुंबई पुलिस के अलावा कथित अवैध सट्टेबाजी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा की जा रही है।
रवि उपप्ल के अलावा 2 अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया गया है। रवि उप्पल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी था। भारतीय जांच एजेंसियां दुबई सुरक्षा एजेंसी के संपर्क में हैं। रवि उप्पल महादेव ऐप के मुख्य आरोपियों में से एक है। उसे गिरफ्तार कर जल्द ही डिपोर्ट किया जाएगा। आरोपी सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। वह महादेव ऐप का दूसरा प्रमोटर है। इन दोनों ने एक बयान में महादेव ऐप और सट्टेबाजी घोटाले में शामिल होने से इनकार किया है। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी शुभम सोनी पर डाल दी। ईडी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भारतीय दूतावास से शुभम सोनी का बयान रकार्जड किया है।
दुबई में बैठे प्रमोटर्स पर 60 से ज्यादा अवैध ऑनलाइन बेटिंग ऐप के जरिए घोटाले को अंजाम देने का आरोप है। ईडी को लगभग 6 हजार करोड़ का घोटाला का अनुमान है। इस मामले में ईडी ने 14 लोगों को आरोपी बनाया है, जिसमें सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, विकास छाबडि़या, चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर, अनिल दम्मानी, सुनिल दम्मानी, विशाल आहूजा, नीरज आहूजा, सृजन एसोसिएट के संचालक पूनाराम वर्मा और शिवकुमार वर्मा, यशोदा वर्मा, पवन नत्थानी है।
महादेव गेमिंग ऐप का मालिक रवि उप्पल दुबई में हिरासत में लिया गया है। उन्हें जल्द भारत लाया जा सकता है।
• छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बना था
कांग्रेस और बीजेपी इस पर आमने-सामने थीं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि इसकी जांच 2 साल से चल रही है। जब तक ऑनलाइन सट्टेबाजी पर रोक नहीं लगेगी, कुछ नहीं रुकेगा। ऑनलाइन सट्टेबाजी करने वालों के लाखों फर्जी अकाउंट हैं। एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कांग्रेस ने महादेव के नाम पर भी घोटाला किया है। बीते दिनों में मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। मामला आधिकारिक तौर पर सेंट्रल साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया। जांच के लिए 5 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है।
हाल ही में मामले के आरोपी असीम दास के पिता की मौत हो गई थी। सुशील दास नाम के व्यक्ति का शव दुर्ग में एक कुंए में मिला था। सुशील दास एक प्राइवेट कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे, लेकिन 4 दिसंबर से लापता थे। दरअसल ईडी ने 3 नवंबर को सुशील के बेटे असीम दास और कॉन्स्टेबल भीम सिंह यादव को गिरफ्तार किया था और जांच एजेंसी ने उसके पास से 5.39 करोड़ रुपये जब्त किए थे। बताया जा रहा है कि अपने बेटे के गिरफ्तार होने के बाद से काफी परेशान थे।
असीम दास मामले में मुख्य आरोपियों में से एक है। कथित तौर पर प्रतिदिन 200 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने वाले महादेव ऐप ने नवंबर में छत्तीसगढ़ में चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल भी पैदा कर दी थी। प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया था कि एक कैश कूरियर असीम दास ने आरोप लगाया था कि ऐप के प्रमोटरों ने छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। हालाँकि, जब उसे अदालत में पेश किया गया, तो कूरियर ने कहा कि उसे एक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और उसने कभी भी राजनेताओं को कोई नकदी नहीं दी है।
जांच के दौरान, एजेंसी ने पाया कि उप्पल के पास प्रशांत महासागर के एक देश वानुअतु का पासपोर्ट है और वह उसका इस्तेमाल कर "स्वतंत्र रूप से घूम रहा था", लेकिन उसने अपनी भारतीय नागरिकता नहीं छोड़ी थी। ईडी ने कहा कि ऐप के अन्य प्रमोटर, सौरभ चंद्राकर, जिनकी फरवरी में दुबई में 200 करोड़ रुपये की लागत से दुबई में शादी हुई, शादी में कई बॉलीवुड हस्तियों ने भाग लिया था। वह अभी तक फरार है। उनका पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
• ऐप कैसे काम करता है
ईडी की अब तक की जांच के अनुसार, ऐप के पीछे छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले मुख्य संचालक चंद्राकर और उप्पल थे लेकिन दुबई से काम करते थे। दोनों व्यक्तियों और कई अन्य लोगों द्वारा कई सहायक सट्टेबाजी ऐप चलाए गए थे। भारत, मलेशिया, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात के विभिन्न शहरों में कॉल सेंटर संचालित थे। छत्तीसगढ़ सहित पूरे भारत में कम से कम 30 कॉल सेंटर चलाए गए। इस संगठन के ऐप्स में हजारों करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ और उनका दैनिक मुनाफा लगभग 200 करोड़ रुपये प्रतिदिन था। ईडी के अधिकारियों ने कहा कि चंद्राकर और उप्पल के पुलिस, नौकरशाहों और राजनेताओं से भी संबंध थे और यह सुनिश्चित करने के लिए नियमित भुगतान किया गया था कि ऐप जांच एजेंसियों के रडार से दूर रहे।
ईडी ने मामले में अब तक जिन 6 लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें सुनील दमानी, अनिल दमानी, छत्तीसगढ़ पुलिस के सहायक उप-निरीक्षक चंद्रभूषण वर्मा, एक कांस्टेबल और सतीश चंद्राकर शामिल है। ईडी ने कहा कि दमानी बंधुओं ने कई बेनामी बैंक खाते खोले, जिनका इस्तेमाल पैसे लाने-ले जाने के लिए किया गया। अधिकारियों ने कहा कि प्रमोटर हवाला चैनलों का उपयोग करके छत्तीसगढ़ में दमानी बंधुओं को नकदी भेजते थे और सहायक उप-निरीक्षक चंद्रभूषण वर्मा इसका कुछ हिस्सा पुलिस अधिकारियों, नौकरशाहों और राजनेताओं को रिश्वत के रूप में पहुंचाते थे।
पूछताछ के दौरान अनिल दमानी ने पुलिस को बताया कि उप्पल के कहने पर उसने और उसके भाई ने पिछले दो-तीन सालों में हवाला के जरिए 60 से 65 करोड़ रुपये का लेनदेन किया है। एक अधिकारी ने कहा, "अनिल दमानी ने यह भी कहा कि दोनों भाई रायपुर में अपनी आभूषण की दुकान के माध्यम से हवाला चैनल चलाते थे। उनके कॉल विवरण से पता चला है कि वे उप्पल के साथ लगातार संपर्क में थे।" सतीश चंद्राकर संगठन के लिए चार कॉल सेंटर चलाते थे और उनमें उनकी पांच फीसदी हिस्सेदारी थी।
रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर ने महादेव ऐप या सट्टेबाजी सिंडिकेट में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। उसने कहा है कि इन्हें दुबई में रहने वाले किसी शुभम सोनी द्वारा चलाया जाता था। छत्तीसगढ़ चुनाव से पहले 5 करोड़ रुपये से अधिक के साथ पकड़े गए कूरियर ने दावा किया था कि उसे सोनी ने पैसे दिए थे।सोनी ने एक वीडियो भी जारी किया था जिसमें दावा किया गया था कि महादेव ऐप प्रमोटरों द्वारा भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपये दिए गए थे।
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