--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
आक्रामक अभियान चलाने के बावजूद कांग्रेस राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में हार गई और इसके साथ ही 2024 के महत्वपूर्ण लोकसभा चुनावों से हिमाचल प्रदेश को छोड़कर पार्टी का मुख्य हिंदी बेल्ट में लगभग सफाया हो गया है। इस बड़े झटके ने लोकसभा चुनाव के लिए अधिक सीटों की सौदेबाजी के लिए भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया) में भी कांग्रेस को झटका दिया है।
पार्टी के एक नेता ने, जो अभी तक तीन राज्यों में हार के सदमे से उबर नहीं पाए हैं, नाम न छापने की शर्त पर कहा कि नतीजे हमारे लिए "बहुत बड़ा झटका" हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को उम्मीद थी कि वह छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार बनाएगी, जहां उसे पिछले पांच वर्षों में कोई समस्या नहीं हुई और न ही कोई सत्ता विरोधी लहर दिखी और न ही पार्टी नेतृत्व के पास कोई रिपोर्ट आई।
मध्य प्रदेश के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए पार्टी नेता ने कहा कि राहुल गांधी ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि राज्य की रिपोर्ट के आधार पर हमें राज्य में 150 सीटें मिलेंगी। "हालांकि, चीजें हमारे अनुरूप नहीं रहीं और हम इस चुनाव में बहुत कम सीटों पर सिमट गए, जो काफी आश्चर्यजनक है।" मध्य प्रदेश और राजस्थान में सफलता का स्वाद न चख पाने का मुख्य कारण यह था कि पार्टी के रणनीतिकार सुनील कनुगोलू और उनकी टीम को कमल नाथ और अशोक गहलोत जैसे नेताओं द्वारा खुली छूट नहीं दी गई थी।
पार्टी नेता ने कहा, "हालांकि, उन्हें तेलंगाना में पार्टी को उचित रिपोर्ट देने और अभियानों के लिए तरीके सुझाने की पूरी आजादी थी और राज्य नेतृत्व उनसे सहमत था और उन्हें आवश्यक सभी मदद दी।" राज्य नेतृत्व ने कनुगोलू की टीम द्वारा किए गए आंतरिक सर्वेक्षणों पर कार्रवाई की, जो कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में नहीं था, जहां वरिष्ठ कांग्रेस नेता उनके साथ नहीं आए, जिसके कारण मूड अनुकूल होने के बावजूद इतनी बड़ी हार हुई।
पार्टी नेता ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि राजस्थान में कनुगोलू की टीम के बीच मतभेद तब सामने आए जब उन्होंने पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण में सुझाव दिया कि कई मौजूदा विधायक और मंत्री रेगिस्तानी राज्य में जीत नहीं पाएंगे। हालांकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी रणनीति टीम डिजाइनबॉक्स्ड द्वारा किए गए सर्वेक्षणों के आधार पर अपने विधायकों और मंत्रियों के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर से इनकार किया है। एक बड़े नेता ने कहा-“यही वह जगह है जहां अंतर है। कनुगोलू की टीम द्वारा तैयार किया गया सर्वेक्षण एक ईमानदार सर्वेक्षण था जिसने समस्याओं को उजागर किया था, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।” हिंदी पट्टी में पूरी तरह से सफाये के बाद 2024 के महत्वपूर्ण लोकसभा चुनाव से पहले की राह आसान नहीं होगी। कांग्रेस पिछले साल पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में हार गई थी। बिहार में कांग्रेस राजद और जदयू के महागठबंधन का हिस्सा है और झारखंड में कांग्रेस झामुमो के साथ गठबंधन सरकार का हिस्सा है।
विधानसभा चुनावों के मद्देनजर रोकी गई 'इंडिया' गठबंधन के सीट बंटवारे की बातचीत का असर उसी पर पड़ेगा क्योंकि हिंदी भाषी क्षेत्र में कोई उपस्थिति नहीं होने या बहुत कम उपस्थिति का हवाला देकर अन्य दलों से कड़ी सौदेबाजी करने की स्थिति में वह नहीं होगी। कांग्रेस को छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सत्ता में वापसी की उम्मीद थी और मध्य प्रदेश में भी भाजपा से सत्ता छीनने की उम्मीद थी। "लेकिन नतीजे उम्मीद से बिल्कुल अलग आए हैं। यह कांग्रेस के लिए कठिन समय है, उन्होंने कहा- "लेकिन हम 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा से मुकाबला करने के लिए कुछ तरीके ढूंढेंगे।"
कांग्रेस को लगा यह बड़ा झटका आने वाले चुनावों पर, खासकर लोकसभा चुनाव पर क्या असर होगा, इसके कयास लगाये जाने शुरू हो गए हैं। इंडिया गठबंधन का भविष्य क्या होगा, इसे लेकर भी बातें तेज हो गई है। चुनावी नतीजों के बीच शरद पवार ने आने वाले चुनावों को लेकर कहा- कि चार राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजों का विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ‘इंडिया’ गठबंधन में कांग्रेस के नेतृत्व में 25 से अधिक विपक्षी दल शामिल हैं।
इन चुनावों में कांग्रेस के लिए राहत सिर्फ तेलंगाना में सरकार बनाने से मिली है। इस नए राज्य में कांग्रेस को पहली बार भारी बहुमत मिली है। पवार ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि इससे ‘इंडिया’ गठबंधन पर कोई असर पड़ेगा। हम दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर बैठक करेंगे। हम उन लोगों से बात करेंगे जो जमीनी हकीकत जानते हैं। हम बैठक के बाद ही इस पर टिप्पणी कर पाएंगे।’
पवार ने कहा कि ‘‘पहले, यह माना गया था कि बीआरएस तेलंगाना में सत्ता बरकरार रखेगी। हालांकि, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैली के बाद, जिन्हें भारी समर्थन मिला था, हमें एहसास हुआ कि राज्य में बदलाव होगा।’’ शरद पवार की पार्टी राकांपा ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा है। ‘इंडिया’ गठबंधन का गठन 2024 के लोकसभा चुनावों के वास्ते केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा से मुकाबला करने के लिए किया गया है। शिव सेना सांसद अरविंद सांवत ने कहा कि, इन 4 राज्यों के परिणाम से 2024 के इडिया गठबंधन पर कोई असर नहीं होने वाला है। हमारा मकसद 2024 में देश को बचाना है। हम एक बार फिर से मिलेंगे और नए सिरे से 2024 के चुनावों की तैयारी करेंगे।
6 दिसम्बर को दिल्ली इंडिया गठबंधने की होने वाली बैठक में शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इस बैठक में तीनों शीर्ष नेता महाराष्ट्र के लोकसभा सीटों के बटवारे को लेकर चर्चा करेंगे।
हालांकि कांग्रेस अब अपने दम पर तीन राज्यों - कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में सत्ता में होगी। तेलंगाना में कांग्रेस अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को हराकर जीत हासिल की है। कांग्रेस बिहार और झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन का भी हिस्सा है और तमिलनाडु में शासन करने वाली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की सहयोगी है। हालांकि, वह राज्य सरकार का हिस्सा नहीं है।
• 'आप' बनी दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी
नतीजों ने एक प्रमुख विपक्षी दल के रूप में “आप” की स्थिति को मजबूत किया। वह दो राज्यों में सरकार के साथ दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बन गई है, क्योंकि कांग्रेस की हिस्सेदारी में गिरावट आई है। आप नेता जैस्मीन शाह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आज के परिणामों के बाद, आम आदमी पार्टी दो राज्य सरकारों - पंजाब और दिल्ली के साथ उत्तर भारत में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी है।
तेलंगाना के गठन मं भारी भूमिका निभाने वाले के चंद्रशेखर राव (केसीआर) के खिलाफ इस नये राज्य में खासा गुस्सा देखा गया। भाजपा के कटिपल्ली वेंकट रमना ने कामारेड्डी से तेलंगाना के मौजूदा मुख्यमंत्री केसीआर और कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रेवंत रेड्डी दोनों को हराया।
विधानसभा चुनावों के इस दौर में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन से भारत गठबंधन के हाशिए पर उसकी स्थिति मजबूत होने की ही उम्मीद है। उधर, आए दिन सुर्खियां बटोरने वाले इंडिया गठबंधन में छींटाकशी शुरू हो गई है। बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस पर हठधर्मी रवैया अपनाने का आरोप लगाया और उसे आत्मनिरीक्षण करने की सलाह दी है। तृणमूल प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, "यह बीजेपी की सफलता नहीं है, यह कांग्रेस की पूरी विफलता है।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस को अपनी 'जमींदारी मानसिकता' से बाहर आना चाहिए।"
हिंदी पट्टी में कांग्रेस की हार यह भी संकेत दे सकती है कि उसकी जाति जनगणना का मुद्दा हिंदी पट्टी के मतदाताओं को पसंद नहीं आया। जाति जनगणना कराने का दबाव भाजपा के खिलाफ विपक्षी शस्त्रागार का एक बड़ा हिस्सा रहा है, जिसने पार्टी पर दलित और आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाया है।
नतीजे बताते हैं कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों में, कांग्रेस अनुसूचित जाति और जनजाति बहुल क्षेत्रों में भाजपा कांग्रेस को पीछे धकेल दिया। जैसे-जैसे भाजपा ने अपनी सीटें बढ़ाईं, उसकी एससी/एसटी सीटों की संख्या भी घट गई है।
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