--आचार्य विष्णु हरि,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■ मेनका गांधी से पहले सुब्रहण्यम स्वामी ने इस्कॉन को लताड़ा था
मेनका गांधी का एक आरोप इस्कॉन के लिए भारी पड रहा है, इस्कॉन का गौ हत्यारों यानी कसाइयों के साथ कथित दोस्ती का आरोप मेनका गांधी ने लगाया है। उन्होंने कहा है कि इस्कॉन को गाय माता से कुछ भी नहीं लेना-देना है और गाय माता के प्रति उनकी भावना और समर्पण फर्जी है, दिखावा है। इस्कॉन संचालित गौशालाओं के भ्रमण और निरक्षण के दौरान यह पाया गया कि बूढी गायें नदारत हैं, बछड़े नदारत हैं, सिर्फ दूध देने में सक्षम गायें ही हैं। इस्कॉन पर यह आरोप है कि बूढी गायों और बछड़ों को इस्कॉन वाले कसाइयों के हाथों बेच देते हैं, कसाई गाय की हत्या कर उसका मांस भक्षण करते हैं, मांस बेचते हैं।
मेनका गांधी के आरोपों में दम है। इस्कॉन का कोई ऐसा काम नहीं है जिससे हिन्दुत्व की सुरक्षा और हिन्दुत्व के प्रतीक चिन्हों के प्रति उसका समर्पण हो। दुधारू गायें इस्कॉन को दान में आती हैं और जब ये बच्चे व दूध देने में अक्षम हो जाती हैं, तो इनके लिए गायें बेकार हो जाती हैं। बछड़े दूध नहीं दे सकते हैं, इसलिए बछड़े भी इनके लिए बेकार होते हैं। इस्कॉन वाले घाटे का कोई सौदा नहीं करते हैं। हिन्दुओं के पैसे पर अंग्रेजियत राज करती हैं।
इस्कॉन सिर्फ भाइचारे का और सेक्युलरवाद का सहचर है। दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित इस्कॉन के एक कार्यक्रम में एक जिहादी को सरेआम सम्मानित किया गया था। फैसल खान नाम का वह जिहादी मथुरा के एक मंदिर में जबरदस्ती नमाज पढ़ा था। यूपी पुलिस ने उसे जेल की हवा भी खिलायी थी। इस्कॉन का एक संत प्रति साल अपने मंदिर में गौ भक्षकों को रोजा खोलवाता था और अपने हाथों से भोजन कराता था तथा भाईचारा का संदेश देता था। एक दिन गौ भक्षकों ने मिल कर इस्कॉन के उस संत की हत्या कर डाली।
पांच साल पहले सुब्रहण्यम स्वामी ने मुझसे इस्कॉन के संबंध में ऐसी बातें बतायी थी कि उसे सुनकर मैं दंग तो नहीं हुआ था पर इस्कॉन के प्रति मेरी सोच को बल जरूर मिला था। सुब्रहण्यम स्वामी ने कहा था कि हिन्दुओं के पैसे इस्कॉन कहां भेजता है और उस पर राज कौन लोग करते हैं, इसकी जांच होने की जरूरत है।
मेरी अपनी रॉय है कि इस्कॉन को सनातन संस्कृति से कोई लेना देना नही है, इस्कॉन एक व्यापारी है जो हिन्दुओं को मूर्ख बनाता है। राधे-राधे कह कर वह हिन्दुओं को भटका रहा है। इस्कॉन को भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र के प्रति कोई समर्पण व भावना है? इस्कॉन ने भगवान श्रीकृष्ण जन्भभूमि मुक्त कराने के प्रति कोई पहल और संज्ञान तक लिया है?
फिर भी इस्कॉन के प्रति दिवानगी समझ में नहीं आती है। इस्कॉन की संपूर्ण गतिविधियां की जांच जरूरी है। सुब्रहण्यम स्वामी और मेनका गांधी को इस्कॉन के प्रति और भी सक्रिय होने की जरूरत है। साथ ही साथ हिन्दुत्व के प्रति संघर्षरत लोगों को भी इस्कॉन के खिलाफ सजग होने की जरूरत है।
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