--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
भोपाल - मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
● भाजपा के चुनावी एजेंडे को जनता तक पहुंचाने के लिये शासकीय पैसों का किया जा रहा दुरूपयोग
● चुनावी साल: पैसों की बर्बादी में लगी शिवराज सरकार
● सरकार के प्रचार-प्रसार में पार्टी के सिंबल कमल का प्रयोग कितना जायज
मध्यप्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं वैसे-वैसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बौखलाहाट सामने आ रही है। महिला बाल विकास विभाग, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और जनसंपर्क विभाग सहित तमाम विभागों के माध्यम से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार के खजाने को खाली करने में जुटे हुए हैं। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने जनसंपर्क के आला अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे दिये हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के पहले शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में करोड़ों रुपये फूंक दिये जाये। यही नहीं अफसरों को इस बात के भी निर्देश दिये हैं कि प्रचार-प्रसार में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। यही वजह है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। विभिन्न विभागों के माध्यम से आयोजित इन कार्यक्रमों के साथ-साथ विज्ञापनों में भी करोड़ों रूपये खर्च किये जा रहे हैं।
• विकास पर्व के माध्यम से घोटाले की साजिश
प्रदेश में 30 दिन चलने वाले विकास पर्व यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई को बड़वानी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। यात्रा के दौरान 14 अगस्त तक पूरे प्रदेश में विकास पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन होगा। साथ ही जन-सेवा यात्राएं, जन-संवाद, हितग्राही सम्मेलन होंगे।
एक तरफ जहां प्रदेश का राजस्व दिन प्रतिदिन घटता जा रहा है, राज्य तीन लाख करोड़ के कर्ज में डूबा हुआ है वहीं, प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकास पर्व के नाम पर अंधी लूट मचाने का नया तंत्र शुरू कर दिया है। जबकि विकास पर्व एक तरह की चुनावी रैली है जिसके आयोजन के खर्च की जिम्मेदारी भाजपा पार्टी की होनी चाहिए। लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस पूरे खर्चे को जनसंपर्क और सरकार के विभिन्न विभागों से करवाने में जुटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि विकास पर्व के नाम पर शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर प्रदेश में नये घोटाले की साजिश रच रहे हैं।
• अखबार में जारी विज्ञापन चर्चा में
पिछली दिनों 16 जुलाई को विकास पर्व के शुभारंभ अवसर को लेकर देशभर के राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन में साफतौर पर दिख रहा है कि यह विज्ञापन भाजपा का है। लेकिन इस विज्ञापन के ऊपर खर्च होने वाली करोड़ रुपये की राशि को शिवराज सिंह चौहान के इशारे पर मध्यप्रदेश के राजकोष से खर्च करने की योजना है। सूत्रों के अनुसार विकास पर्व के शुभारंभ अवसर पर जारी किये गये विज्ञापन की राशि लगभग 10 करोड़ से अधिक की है। यह विज्ञापन देश की राजधानी के प्रमुख अखबारों से लेकर हर राज्य व मध्यप्रदेश के प्रमुख अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया।
• आखिर कहां सोया हुआ है कानून तंत्र
किसी भी राज्य में पार्टी और सरकार के दो अलग-अलग फंड होते हैं। जहां पार्टी के कार्यक्रमों में होने वाले खर्च की राशि पार्टी फंड से दी जाती है। फिर चाहे वो अखबार में जारी विज्ञापन ही क्यों न हो। लेकिन शिवराज सरकार में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। पार्टी के आयोजन से लेकर पार्टी के विज्ञापन तक पूरा खर्चा सरकार के खाते से दिया जा रहा है। गौरतलब है कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भोपाल दौरे के दौरान भाजपा ने मेरा बूथ सबसे मजबूत कार्यक्रम रखा। यह मूलरूप से भाजपा का आयोजन था। लेकिन इस आयोजन का खर्चा भी शिवराज सिंह चौहान के इशारे पर मध्यप्रदेश सरकार ने वहन किया। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर शिवराज सरकार का कानूनी तंत्र कहां सोया हुआ है, क्यों बार-बार वे शासकीय पैसों का इस्तेमाल भाजपा के आयोजनों में कर रहे हैं।
• जनसेवा यात्रा थी शासकीय आयोजन
बीते दिनों मध्यप्रदेश सरकार ने जनसेवा यात्रा निकाली। दो अलग-अलग चरणों में निकाली गई यह यात्रा सही मायनों में मध्यप्रदेश सरकार की यात्रा थी। इस यात्रा के निकालने का जो खर्च आया वह मध्यप्रदेश सरकार वहन करे तो समझ आता है, लेकिन विकास पर्व का खर्च भी यदि मध्यप्रदेश सरकार वहन कर रही है तो यह सीधे तौर पर प्रदेश के टैक्स देने वाली जनता की ईमानदारी पर करारा तमाचा और उनकी जेब पर सेंध लगाने जैसा है। अगर शिवराज सिंह चौहान की सरकार का यही रवैया रहा तो निश्चित ही आगामी विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश की जनता शिवराज सरकार को जड़ से उखाड़ फेकेंगी।
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