--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
भोपाल - मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
● शिवराज के राज में हुआ प्रदेश को शर्मसार कर देने वाला ''पेशाब कांड''
● पिछले एक साल में 59 आदिवासियों की हत्या और 297 महिलाओं पर हमला: जिम्मेदार कौन?
● मुख्यमंत्री, गृहमंत्री प्रदेश की कानून व्यवस्था आदिवासियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को रोकने में नाकामयाब
● क्या कमल पटैल और केदारनाथ शुक्ल के महलों पर भी शिवराज चलायेंगे बुल्डोजर?
● शिवपुरी में दलित को मैला खिलाने की घटना आई सामने, क्या इन दलितों को भी मुख्यमंत्री निवास बुलाया जाएगा?
मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति (दलित वर्ग) और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) वर्ग पर अत्याचार होना मध्यप्रदेश में कोई नई बात नहीं है। देश में इन कमज़ोर वर्ग पर अत्याचार के मामले में मध्यप्रदेश पहले नंबर पर आता है। अभी हाल में सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला के विधायक प्रतिनिधि और भाजपा के कार्यकर्ता प्रवेश शुक्ला ने प्रदेश को पूरे देश के सामने शर्मसार कर दिया। भाजपा आदिवासी हितचिंतक की इमेज पिछले एक साल से गढ़ रही है उस पर पलीता लग गया है। उससे भी बड़ा तमाशा प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने किया है, पूरी मीडिया के सामने पीड़ित आदिवासी को मुख्यमंत्री निवास बुलाकर उसके पैर धोकर पानी माथे से लगाया। पर क्या इससे मुख्यमंत्री आदिवासी और दलित समाज के हित चिंतक बन गए? क्या आप वास्तव में इन समाज का सम्मान करते हैं? अगर आप वास्तव में हित चिन्तक हैं तो मैं आपके सामने चर्चित कुछ मामले और लाना चाहती हूं। क्या इन काण्डों के अपराधियों पर भी आप बुल्डोजर चलवायेंगे? पहला, सीधी के विधायक केदारनाथ शुक्ला और इनके परिवार पर हरभरो गांव स्थित आदिवासी महकाम सिंह की 17.41 एकड़ जमीन हड़पने का आरोप है। महकाम सिंह के पुत्र ने आरोप लगाया कि विधायक और इनके परिवार वालों ने पीडि़त के पिताजी जो नंगा करके गांव में परेड करवाही थी। इस त्रासदी के बाद यह गौंड आदिवासी परिवार सब कुछ छोड़कर गांव से ही भाग गया। दूसरा, कैबिनेट के साथी कमल पटेल के क्रिमिनल पुत्र सुदीप पटेल जो कि स्वयं भी भाजपा नेता है। उन्होंने 2019 में हरदा जिले के समाजसेवी एवं अधिवक्ता सुखराम बामने को गंदी-गंदी गालियां देकर धमकाया। पूर्व के 14 से ज्यादा आपराधिक मामले मंत्री पुत्र सुदीप पटेल पर दर्ज हैं। तीसरा, शिवपुरी के गांव नरवर बरखाडी में दो दलित युवकों को पिटाई के बाद मैला खिलाया गया। चौथा, मध्यप्रदेश के गुना में सहरिया आदिवासी महिला रामप्यारी बाई बमोरी के धनोरिया गाँव की है। रामप्यारी बाई उनके पति अर्जुन सहरिया को खेत में जली हुई अवस्था में मिली थीं। बताया जा रहा है कि महिला को एक ज़मीन विवाद में जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी। 2021 में नेमावर में आदिवासी परिवार के पांच सदस्यों की हत्या की गई थी। अब सवाल है कि क्या सचमुच आपके राज में हमारा प्रदेश इतना खराब हो गया है?
यह आपके कुशासन का नमूना भर है कि आपके कार्यकर्ता किसी आदिवासी पर पेशाब करते हैं, आपके विधायक आदिवासी की जमीन हड़पते हैं और उनको निर्वस्त्र करके घुमाते हैं। आपके मंत्री पुत्र दलित को गंदी गाली और जान से मारने की धमकी देते हैं। आपके प्रदेश में दलित युवकों को मैला खिलाया जाता है।
देश में मध्यप्रदेश आदिवासी और दलितों की एट्रोसिटीज में पहले नंबर पर है। तो वास्तव में शिवराज सिंह जी आपने पूरे प्रदेश को ही मामा बना दिया है। और अगर आप सच में इस समाज के हितैषी हैं तो आपके विधायक केदारनाथ शुक्ला के आवासों पर बुल्डोजर चलवाएंगे, क्या एनएसए लगवाएंगे और कहने के लिए ही सही दस फीट जमीन में गाड़ेंगे?
मध्यप्रदेश मेरा मंदिर... इस प्रदेश की जनता मेरी भगवान... और मैं इस भगवान का पुजारी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह लाइन कहते हुए तो आपने कई बार सुना होगा। लेकिन अब प्रदेश की इसी भगवान के साथ दिन-प्रतिदिन अत्याचार के मामले सामने आ रहे हैं। खास बात यह है कि हर दिन प्रदेश में लोगों के साथ हो रही बर्बरता के मामले तो सामने आ रहे हैं लेकिन इस प्रदेश को अपना मंदिर और जनता को भगवान बताने वाले पुजारी शिवराज सिंह चौहान इस तरह की घटनाओं को रोकने में पूरी तरह से नाकामयाब हैं। हाल ही में सीधी जिले के आदिवासी दशमत के साथ हुई घटना ने प्रदेश को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार कर दिया है। प्रदेश भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा आदिवासी और दलित समाज के लोगों के साथ किये जाने वाले इस दुव्यर्वहार ने भाजपा का पूरा वोटबैंक का गणित ही बदल दिया। यही कारण है कि सत्ता के लोभ और लालच में पूरी तरह से डूब चुके प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासी दशमत को अपना दोस्त सुदामा और खुद को कृष्ण की संज्ञा दे डाली।
• मुख्यमंत्री ने की दिखावे की नौटंकी
मध्यप्रदेश की राजधानी से लगभग 600 किलोमीटर दूर हुई इस घटना का वीडियो जैसे ही सामने आया, शिवराज सरकार में हड़कंप मच गया। सरकार में बैठे लोग इस बात को अच्छी तरह से समझ चुके थे कि इस घटना को विपक्षी दल बड़ा इश्यू बना देगा। यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुकृत्य करने वाले आरोपी प्रवेश शुक्ला के खिलाफ एनएसए के तहत कार्यवाही करते हुए उसके घर में बुल्डोजर चलवाने का आदेश दिया। यही नहीं पहले भाजपा पार्टी और उसके नेताओं ने आरोपी प्रवेश शुक्ला को बचाने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन जब वे इस योजना पर नाकामयाब रहे तो उन्होंने आरोपी को पुलिस के हवाले करते हुए शुक्ला को भाजपा कार्यकर्ता बताने से इंकार किया। यही नहीं जब मामला और बढ़ा तो खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सामने आये और उन्होंने दशमत को मुख्यमंत्री निवास बुलाते हुए उसके पैर धुलाये और उसके पैर का पानी अपने माथे पर लगाते हुए शर्मिंदा हुए।
• पीड़ित की पत्नी को दिया पैसों का लालच
आदिवासी दशमत के साथ हुई इस घटना के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित की मदद करने का निर्णय लिया। लेकिन इस दौरान वे शायद यह भूल गये कि जल, जंगल, जमीन की रक्षा करने वाले यह आदिवासी किसी लोभ, लालच के आदि नहीं हैं बल्कि उन्हें अपना स्वाभिमान और सम्मान सबसे ज्यादा प्रिय है। लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासी की पत्नी को फोन पर इस घटना को ज्यादा बढ़ावा देने के लिये पैसों का लालच दिया। उन्होंने फोन पर यह तक कह दिया कि तुम चिंता मत करो और मैं दशमत के साथ कुछ पैसे भेज रहा हूं और तुम्हें प्रधानमंत्री आवास की राशि भी दे रहा हूं। इस बातचीत का वीडियो सामने आते ही शिवराज सिंह चौहान व उनकी औछी सोच दोनों ही शर्मसार हो गई।
• कमलनाथ ने कहा- सच्ची आत्मा होती तो कैमरा लगाकर नहीं दिखाते
पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि सीधी की घटना ने पूरे मध्यप्रदेश को देशभर में कलंकित किया है। मध्यप्रदेश में आदिवासी समाज सबसे अधिक है। पिछले कुछ महीनों से जिले-जिले से खबरें आ रही हैं। कहीं जिंदा गाढ़ दिया गया, कहीं गाड़ी से घसीटा गया। सिर्फ 10 प्रतिशत घटनाएं ही सामने आती हैं। शिवराज सिंह जी कितनी भी नाटक-नौटंकी कर लें और अपने 18 साल का पाप धोने का प्रयास कर लें, वह नहीं धुलेगा। उनकी सच्ची आत्मा होती तो कैमरा बुलाकर नहीं दिखाते। उनका मतलब कैमरे से था। कैमरे की नौटंकी उन्होंने 18 साल कर ली है। अब यह चलने वाली नहीं है। पत्नी को प्रलोभन दे रहे हैं। यह नाटक-नौटंकी है। यह सब अपना पाप साफ करने के लिए है। ये ही समिति बनाएंगे। कैमरे की नौटंकी करेंगे।
• पश्चाताप का घिनौना नाटक है यह -मायावती
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती का कहना है कि पेशाब कांड के पीड़ित आदिवासी युवक को लगभग 600 किलोमीटर दूर भोपाल बुलाकर सीएम हाउस में कैमरे के घेरे में उसके पैर धोना सरकारी पश्चाताप कम तथा इनकी नाटकबाजी व चुनावी स्वार्थ की राजनीति ज्यादा लगती है। ऐसा नुमाइशी कार्य क्या उचित?
• मध्यप्रदेश गवाह है आदिवासियों के साथ हो रहे जुल्म का
मध्यप्रदेश में आदिवासियों पर अत्याचार से शिवराज सरकार को बहुत फर्क नहीं पड़ता। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के उत्पीड़न के मामले में मध्यप्रदेश नंबर वन है। बीते 03 सालों से मध्यप्रदेश इन अपराधों में पहले नंबर पर बना हुआ है जबकि बीच के करीब 15 महीनों को छोड़कर बीते 15 सालों से यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन साल से इस वर्ग के खिलाफ अपराध या उन्हें प्रताड़ित करने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वर्ष 2020 में ऐसी 2,401 घटनाएं हुईं। जबकि 2019 में ऐसी 1,922 और 2018 में 1,868 घटनाएं ही हुई थीं। मतलब, एक साल के दौरान इस तरह की घटनाओं में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे 2,370 मामले हैं जिनकी जांच एक साल से अधिक समय से लटकी हुई है।
• 59 लोगों ही हुई हत्या
मध्यप्रदेश में पिछले साल इस वर्ग के 59 लोगों की हत्या हुई है और महिलाओं पर हमले के 297 प्रकरण दर्ज हुए हैं। देश के महानगरों में अनुसूचित जाति वर्ग के खिलाफ अपराध में इंदौर 40 मामलों के साथ देश में आठवें स्थान पर है।
• दलित समाज भी है पीड़ित
अनुसूचित जातियों के खिलाफ हो रहे अपराध के मामले में भी मध्यप्रदेश का यही हाल है। दलितों के खिलाफ अपराध या उन्हें प्रताड़ित करने की घटनाएं भी यहां बढ़ती ही जा रही हैं। वर्ष 2020 में ऐसी 6,899 घटनाएं हुईं, जबकि 2019 में ऐसी 5,300 और 2018 में 4,753 घटनाएं ही हुई थीं। इतनी दुखदायी हालत के बावजूद शिवराज अपनी पीठ ठोक सकते हैं।
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