--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
रायपुर - छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज।
● बघेल के इशारे पर प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने मरकाम के फैसले को दी चुनौती
● छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी अध्याक्ष के पॉवर को बौना साबित कर रहे बघेल
● भूपेश बघेल को भारी पड़ेगी आदिवासियों की अवहेलना
● भूपेश बघेल सरकार में बढ़ा आदिवासियों का पलायन
● प्रदेश की 55-60 सीटों पर निर्णायक आदिवासी वोटरों की मांग, आदिवासी समाज का हो मुख्यमंत्री
आज छत्तीसगढ़ प्रदेश में आदिवासियों की प्रमुख मांग है कि अब मुख्यमंत्री उनके समाज से बने। प्रदेश में अजीत जोगी के बाद आदिवासी समाज को हाशिए पर धकेल कर रखा गया है। आज हालात यह है कि छत्तीसगढ़ में 5% की आबादी वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर बैठा है। छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की रीति-रिवाज अलग है। इस सरकार में छत्तीसगढ़िया नरेशन की अनदेखी की जा रही है। नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेताओं में रार सामने आ गई है। इस बार यह रार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन सिंह मरकाम और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के बीच पड़ी है। राज्य में आदिवासी वन बंधुओं के बीच अच्छी पकड़ रखने वाले मोहन सिंह मरकाम की कार्यशैली से शैलजा नाखुश दिखाई दे रही हैं। यही कारण है कि राज्य में बीते दोनों पार्टी के पदाधिकारियों के कार्यों में हुए तबादले की बात से शैलजा आगबबूला हो गईं और उन्होंने मरकाम के फैसले को चुनौती देते हुए उनका फैसला निरस्त कर दिया। सूत्रों के मुताबिक शैलजा ने यह फैसला मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के इशारे पर लिया है। क्योंकि बीते कई समय से भूपेश बघेल, मोहन सिंह मरकाम के बढ़ते कद को देखते हुए अंदर ही अंदर नाखुश थे। प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के बीच चल रही इस खींचतान की जानकारी पार्टी के उच्च पदाधिकारियों को होने के बाद अब क्या फैसला लिया जाएगा। सभी जानते हैं कि मोहन मरकाम छत्तीसगढ़ के बड़े आदिवासी नेता हैं और उनकी छबि निर्दाग है। उनकी इस वर्ग पर काफी पकड़ है। यदि सत्ता और संगठन में उनकी पकड़ को जानबूझकर कमजोर किया गया तो कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित होगा।
गौरतलब है कि अध्यक्ष पार्टी का मुखिया होता है। पार्टी के सभी शीर्ष नेता उसको रिपोर्ट करते हैं। पार्टी की सभी गतिविधियां उसकी जानकारी और स्वीकृति से होती हैं। वह पार्टी की सभी समितियों में सदस्यों की नियुक्ति करता है। क्योंकि वह पार्टी की सभी योजनाओं और फैसलों के लिए जिम्मेदार होता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्य में पार्टी के अध्यक्ष के आदेशों को मानने को ही तैयार नहीं हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम एक आदिवासी हैं और भूपेश बघेल शुरू से ही आदिवासियों की अवहेलना करते आ रहे हैं। उन्हें आदिवासियों को पद देना या आदिवासियों के अंडर काम करना पसंद ही नहीं आता है। जबकि सब जानते हैं कि छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बाहुल्य प्रदेश है। यहां की राजनीति में आदिवासियों का बड़ा महत्व है। प्रदेश की सियासत में जिस ने भी आदिवासियों को साध लिया है उसकी सत्ता पक्की हो जाती है। लेकिन भूपेश बघेल प्रारंभ से ही इस वर्ग की अनदेखी करते आ रहे हैं। जबसे भूपेश बघेल प्रदेश के मुख्य मंत्री बने हैं तबसे प्रदेश में आदिवासियों की स्थिति दयनीय हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश से आदिवासियों का पलायन हुआ है। इतना पलायन तो बीजेपी के समय में भी नहीं हुआ था। निश्चित रूप से भूपेश का यह रवैया कांग्रेस को काफी नुकसान करने वाला है। हमने देखा है कि मुख्यमंत्री सिलसिलेवार हर एक वर्ग को टारगेट करके काम कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पत्रकारों को टारगेट किया है। पर उन्हें एक बात जरूर समझनी चाहिए कि पत्रकारों से ज्यादा प्रमुख यहां आदिवासी वर्ग है। यदि इस वर्ग को प्रताडि़त किया तो बघेल को सत्तान से बाहर करने से कोई नहीं रोक सकता।
• शैलजा को दिया दो टूक जवाब
कुमारी शैलजा ने रवि घोष को प्रशासन और संगठन का प्रभारी बनाने के लिए तुरंत आदेश जारी करने के लिए कहा है। वहीं मामले में मरकाम का कहना है कि नया आदेश जारी होते तक उनकी जारी लिस्ट के अनुसार ही पदाधिकारी काम करेंगे। समय-समय पर पदाधिकारियों के कार्य का बंटवारा होते रहते हैं। जो पूर्व में पदाधिकारियों के प्रभार बदले गए थे वो प्रभावशील रहेंगे। आगामी आदेश तक काम करते रहेंगे।
• पार्टी हित में है मरकाम का फैसला
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मोहन मरकाम ने दो दिन पहले प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों को नया प्रभार सौंपने का आदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने प्रभारी महामंत्री प्रशासन और संगठन की जिम्मेदारी अरूण सिसोदिया, महामंत्री रवि घोष को बस्तर संभाग प्रभारी, महामंत्री अमरजीत चावला को रायपुर, चंद्रशेखर शुक्ला को मोहला मानपुर प्रभारी, महामंत्री यशवर्धन राव को प्रशिक्षण प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी थी।
• उच्च स्तर से भी विरोध एआईसीसी को पत्र
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश महामंत्री अमरजीत चावला को हटाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एआईसीसी को चिट्ठी लिख चुके हैं। अमरजीत को मरकाम का करीबी माना जाता है, लेकिन मुख्यमंत्री की आपत्ति के बाद महामंत्री पद का पूरा कामकाज रवि घोष को सौंप दिया गया था। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष ने जारी लिस्ट में अमरजीत को और प्रभावशाली बना दिया। इसके बाद से कांग्रेस में मामला और गरमाया हुआ है।
• आदिवासी वर्ग को मरकाम ने दी मजबूती
कुछ वर्ष पहले बस्तर के आदिवासी नेता और विधायक मोहन मरकाम को प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया गया। उन्हें यह जिम्मेदारी राज्य में आदिवासी वर्ग के बीच कांग्रेस पार्टी की मजबूत पकड़ के लिए दी गई। इसमें कोई दो मत नहीं कि मरकाम ने राज्य में पार्टी को सक्रिय और जन-जन से जोड़ने का काम किया। मरकाम की बढ़ती लोकप्रियता और अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी खो देने के भय से बघेल लगातार मरकाम के खिलाफ साजिश रच रहे हैं।
• ऐसा है राज्य में आदिवासी सीटों का गणित
राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित विधानसभा की 29 सीटों के साथ ही अनारक्षित वर्ग की ऐसी सीटें, जहां आदिवासी आबादी 30 प्रतिशत से अधिक हैं, 30 फीसदी से अधिक आदिवासी आबादी वाली सीटों को मिलाकर लगभग 50 से 55 सीटों पर समाज की नजर है। बस्तर और सरगुजा संभाग में इस वर्ग की आबादी 65 फीसदी से अधिक है।
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