कहीं शिवराज सरकार की विदाई का संकेत तो नहीं है सतपुड़ा भवन में आग की घटना?



--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
भोपाल - मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।

● सतपुड़ा भवन में आग: हादसा सा साजिश!

● बड़ा सवाल: चुनावी साल में ही क्‍यों लगती हैं आग?

● चिकित्‍सा विभाग में हुए भ्रष्‍टाचार को दबाने की साजिश तो नहीं है घटना?

● सवालों के घेरे में मंत्री विश्‍वास सारंग

मध्यप्रदेश की सबसे पुरानी शासकीय इमारतों में शामिल सतपुड़ा भवन में बीते दिनों लगी आग की लपटे भले ही शांत हो गई हों, लेकिन इससे उठने वाला धुआं अब तक शांत नहीं हुआ है। शासकीय इमारत में आग लगना और प्रदेश के प्रमुख विभागों की फाइलों का धू-धू कर जल जाना कोई आम बात नहीं है। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार भले ही इस घटना को महज एक शॉर्ट सर्किट का नाम दे रही हो, लेकिन सियासी गलियारे में आग की लपटो को साजिश करार दिया जा रहा है। बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले इस तरह से शासकीय दफ्तर में आग लगना कोई सामान्य बात नहीं है। यह सरकार की एक सोची समझी चाल है। जाहिर है कि जिस दफ्तर में आग लगी है उसमें अधिकत्तर फाइलें चिकित्सा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग की है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार ने जानबूझकर कोरोनाकाल के दौरान हुए घोटालों की फाइलों को जलाने के लिये इस साजिश को अंजाम दिया है।

• इसी बिल्डिंग में क्यों लगती है आग?

सतपुड़ा भवन की इमारत में आग लगने की घटना के बाद कई प्रश्न उठने लगे हैं। देखा जाये तो यह पहली घटना नहीं है जब इस भवन में आग लगी हो। इससे पहले भी वर्ष 2006-07, 2012 और 2016-17 में आग की घटनाएं प्रदेश की शासकीय इमारतों में हो चुकी हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इन इमारतों में रखी फाइलों में वर्तमान सरकार का ऐसा कौन सा भ्रष्टाचार से जुड़ा पुलिंदा रखा है कि सरकार और उनके नुमाइंदे मिलकर इन फाइलों को कचरे के ढ़ेर में बदल देते हैं। यही नहीं हर बार इसी बिल्डिंग में आग लगना अपने आप में एक बड़ा जांच का केन्द्र है।

• विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही लगती हैं आग

अगर भाजपा सरकार के इतिहास पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि बीते 18 साल के कार्यकाल में भाजपा की सरकार के दौरान अलग-अलग शासकीय बिल्डिंगों में आग की घटनाएं हुई हैं। यह महज संयोग है कि यह सभी घटनाएं ठीक विधानसभा चुनावों के पहले होती हैं। आने वाले कुछ महीने में भी विधानसभा चुनाव प्रदेश में प्रस्तावित हैं, ऐसे में चिकित्सा विभाग, जनजातीय कार्य विभाग सहित सीएम हेल्पलाइन से जुड़ी महत्वपूर्ण 12 हजार से अधिक फाइलों का इस तरह से जल जाना कोई सामान्य घटना नहीं है।

• कहीं कोरोना भ्रष्टाचार को तो नहीं छुपाया

बताया जा रहा है कि सतपुड़ा भवन के जिस फ्लोर पर आगजनी हुई है उस फ्लोर पर सबसे ज्यादा क्षति चिकित्सा विभाग को पहुंची हैं। यहां प्रदेश सरकार के चिकित्सा के क्षेत्र में किये गये कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज थे, जिसमें कई ऐसी फाइलें थी, जो महत्वपूर्ण जांच से जुड़ी हुई थी। वे सभी फाइलें इस आगजनी में जलकर खाक हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार कोरोना काल के दौरान अस्पतालों के बीच की गई बंदरबाट, उपकरणों की खरीदी, वैक्सीन आदि से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज इसी बिल्डिंग में सुरक्षित रखे गये थे। लेकिन प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मंत्री विश्वास सारंग और डॉ. प्रभुराम चौधरी ने अपनी करतूतों को छुपाने के लिये पूरी बिल्डिंग को ही आग के हवाले कर दिया है। गौरतलब है कि कोरोनाकाल के दौरान अरबों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था जिसकी जांच लगातार विपक्षी पार्टी कर रही थी लेकिन शिवराज सरकार के कान में जू तक नहीं रेंगी।

• कमलनाथ ने बोला सरकार पर हमला

सतपुड़ा भवन में लगी आग को कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार की सोची समझी चाल बताया है। उन्होंने कहा कि यह आग लगी नहीं है लगाई गई है। कमलनाथ ने यह भी कहा कि जिस समय जबलपुर में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भाजपा सरकार के भ्रष्टाचारों की बखिया उधेड़ रही थीं और सरकार बनने पर भ्रष्टाचारियों पर कार्य़वाही की बात कह रही थी उसी समय शिवराज सरकार ने सोचे समझे तरीके से शासकीय भवन को आग के हवाले करने की योजना पर काम किया और उसे अंजाम दे दिया। कमलनाथ ने इस पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराये जाने की मांग की है, लेकिन शिवराज सरकार ने चार अपने ही नुमाइंदों की एक कमेटी बनाकर जांच के नाम पर खानापूर्ति करने का काम किया है।

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