--विजया पाठक (एडिटर, जगत विजन),
भोपाल - मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
●शिवराज मना रहे थे गौरव दिवस, बालासोर ट्रेन हादसे से गम में डूबा था देश
● पांच दिन के समारोह में फूंके 07 करोड़ से अधिक
मध्यप्रदेश में बीते दिनों गौरव दिवस के नाम एक नया समारोह शुरू हुआ। गौरव दिवस समारोह का मुख्य आयोजन 01 जून को राजधानी के लाल परेड मैदान पर हुआ। इस समारोह को प्रदेश सरकार ने भाजपा का चुनावी एजेंडा बनाकर जनता के सामने पेश किया। शासन द्वारा किसी पार्टी का प्रचार-प्रसार करने का यह तरीका संवैधानिक ढंग से अमान्य है। इसे समारोह कहें या फिर जनता के टैक्स के पैसे उड़ाने का माखौल कुछ समझ नहीं आ रहा। एक तरफ जहां प्रदेश कर्जा लेकर किसी तरह से अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गौरव दिवस के नाम पर करोड़ों रूपये फूंक देने का एक नई परंपरा शुरू कर दी है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर भोपाल के विलीनीकरण होने के 74 साल बाद क्यों मध्यप्रदेश सरकार को गौरव दिवस मनाने की सूझ पड़ी? क्यों इतने दिनों से अभी तक 01 जून को गौरव दिवस नहीं मनाते आये? अब जब विधानसभा चुनाव आने को हैं ऐसे में जनता को रिझाने के लिये सरकार ने गौरव दिवस मनाने का नया फैसला किया है। विशेषज्ञों की मानें तो नवंबर 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के समय आचार संहिता के कारण 01 नवंबर का राज्योत्सव समारोह इस वर्ष होना संभव नहीं है। इसलिये शिवराज सरकार ने उस पैसे को गौरव दिवस समारोह के नाम पर ठिकाने लगाने की योजना पर काम किया है।
• निष्ठुर हो गई शिवराज सरकार
जिस समय प्रदेश में गौरव दिवस समारोह की गूंज उठ रही थी। उसी समय उड़ीसा के बालासोर जिले में भीषण ट्रेन हादसा हुआ और उस हादसे में कई जिंदगियां समाप्त हो गई। एक तरफ जहां पूरे राज्य में शोक का दौर चल रहा था वहीं, मध्यप्रदेश में गौरव दिवस समारोह के नाम पर जश्न मनाया जा रहा था। ट्रेन हादसे में 275 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई और 800 से अधिक लोग घायल हो गये। बावजूद उसके प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने अपना चुनावी भाषण देने के लिये गौरव दिवस समारोह को स्थगित न करने का फैसला किया। कुल मिलाकर खुद को संवेदनशील कहने वाली भाजपा सरकार की संवेदनशीलता एक झटके में बाहर गई और पूरी सरकार और भाजपा की इज्जत धूमिल हो गई। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी सारी व्यवस्तताएं छोड़ घटना स्थल पर पहुंचे और लोगों से बात की, लेकिन शिवराज सिंह चौहान के कान में जूं तक नहीं रेंगी।
• पांच दिन में 07 करोड़ से ज्यादा फूंके
सूत्रों के अनुसार राज्य शासन ने गौरव दिवस समारोह के नाम पर पांच दिन का उत्सव किया। इस पूरे समारोह की कमान जिला प्रशासन के हाथ में थी। जिन्होंने लगभग सात करोड़ रुपये फूंक दिये। पहले मैराथन के नाम पर जबरदस्त ढंग से पैसे का बंदरबाट किया गया, उसके बाद सांस्कृतिक संध्या में श्रेया घोषाल की प्रस्तुति और मनोज मुंतशिर और कृष्णा-सुदेश को बुलाकर जनता के पैसों को हंसी और ठहाके के माध्यम से बहाने का यह कारनामा जिला प्रशासन के तथाकथित अफसरों ने किया। बताया जा रहा है कि इस पूरे समारोह की कमान जिला प्रशासन के अंतर्गत काम करने वाली ड्रिस्ट्रिक्ट टूरिज्म प्रमोशनल काउंसिल को दी गई थी। जिसके अध्यक्ष कलेक्टर और सचिव स्मार्ट सिटी में सब इंजीनियर स्तर के अफसर रितेश शर्मा के हाथ में थी। कलेक्टर के नाक के नीचे सब इंजीनियर स्तर के अधिकारी ने जो गंध मचाई है वह किसी से छुपी नहीं है। इससे पहले भी रितेश शर्मा ने भोज एडवेंचर फेस्ट के नाम पर ऐसा ही भ्रष्टाचार किया था जिसकी भनक तत्कालीन कलेक्टर को लग गई और उन्होंने इस पूरे इवेंट को बंद कर दिया था।
• गौरव दिवस बना भाजपा का चुनावी एजेंडा
बताया जा रहा है कि समारोह में पहले जहां लेजर शो के माध्यम से भाजपा शासन के कार्यकाल को बताया गया। वहीं, गीतकार मनोज मुंतशिर ने भोपाल की गंगा-जमुना तहजीब को छेड़ने की कोशिश की। यही कारण है कि कई लोग वहां से नाराज होकर निकले और इसे भाजपा चुनावी एजेंडा बताया।
• क्या गौरव दिवस समारोह जितायेगा चुनाव?
बड़ा सवाल यह है कि क्या गौरव दिवस समारोह का यह आयोजन शिवराज सरकार की विधानसभा चुनाव में वापसी करायेगी। क्योंकि प्रदेश सरकार के मंत्रियों औऱ विधायकों की आपसी रंजिशे अब धीरे-धीरे बाहर आने लगी है और अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब भाजपा के मंत्री और विधायक पार्टी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लेंगे। क्योंकि कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस प्रदेश में अधिक सक्रिय और मजबूत दिखाई जान पड़ती है। अगर कांग्रेस की यही मजबूती रही तो निश्चित ही विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
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