विश्व गुरु बनाने के लिए देश को उन्नत सूचना तंत्र की आवश्यकता



वाराणसी - उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ देश के विकास के लिए पुस्तकालयों को डिजिटल माध्यमों से लैस करने की आवश्यकता है

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित नॉलेज ट्रांसक्शन इन डिजिटल स्कालरशिप विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन सोमवार 10 अप्रैल 2023 को प्रातः 9:30 बजे विज्ञान संकाय के महामना हॉल में किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वी.के. शुक्ला, संगोष्ठी निदेशक के रूप में उत्कल विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त आचार्य प्रो. पीताम्बर पाढ़ी, विशिष्ठ अतिथि के रूप में डॉक्यूमेंटेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेन्टर, बैंगलोर के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ए.आर.डी. प्रसाद उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ द्वीप प्रज्वलन कर किया गया एवं महामना मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात कला संकाय के दिवंगत संकाय प्रमुख प्रो. विजय बहादुर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। इसके पश्चात समस्त अतिथियों को स्मारिका दे कर उनका स्वागत किया गया। विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं आचार्य प्रो. एच. एन. प्रसाद के सेवनिवृति के अवसर पर उनके सम्मान में प्रकाशित अभिनदंन ग्रंथ एवं संगोष्ठि की स्मारिका का विमोचन किया गया।

उद्बोधन के आरंभ में विभाग के विभागाध्यक्ष एवं आयोजन सचिव प्रो. आदित्य त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्यों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान इंटरनेट के युग मे लाइब्रेरी प्रोफेशन के बदलते स्वरूप पर चर्चा करने के लिए इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।

मुख्य अतिथि प्रो.वी.के. शुक्ला ने पुस्तकालयों के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए कहा कि पुस्तकालयों का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है साथ ही लोगो का सूचना को खोजने एवं प्राप्त करने का माध्यम भी बदल रहा है। पुस्तकों का स्थान डिजिटल मीडिया ने ले लिया है इसलिए पुस्तकालय प्रोफेशनल्स को भी अपने कौशल एवं दक्षताओं को बदलना पड़ेगा तभी पुस्तकालयों की प्रासंगिकता बनी रहेगी। उन्होंने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा कि शोध के दौरान हमलोग घण्टो पुस्तकालय में बैठ कर अपने लिए साहित्य की खोज करते थे, जोकि आज के दौर में अत्यधिक आसान हो गया है।

संगोष्ठी निदेशक प्रो. पाढ़ी ने अपने उद्बोधन में वर्तमान डिजिटल युग मे ज्ञान के आदान प्रदान के विकास पर चर्चा करते हुए कहा कि डिजिटल मीडिया ने ज्ञान के भंडारण एवं पुनर्प्राप्ति के स्वरूप को बदल दिया है। हमलोग ज्ञान के समाज मे जी रहे हैं जहां सूचना का अत्यधिक महत्व है, जिस देश के पास जितना उन्नत सूचना तंत्र होगा वह उतना ही विकसित होगा। उन्होंने डिजिटल स्कालरशिप के बारे में बोलते हुए कहा कि ये डिजिटल साक्ष्य, अनुसंधान के तरीके, प्रकाशन एवं संरक्षण इत्यादि तरीकों का उपयोग कर शोध लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए है। डिजिटल स्कालरशिप में डिजिटल मीडिया और डिजिटल मीडिया पर शोध का उपयोग सम्मिलित है जो कि विद्वानों के संचार हेतु उपयोग किया जाता है। डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया को अनुसंधान और संचार के विश्वसनीय, पेशेवर और वैध साधन के रूप में स्थापित करने का प्रयास भी डिजिटल स्कालरशिप का एक महत्वपूर्ण पहलू है। उन्होंने इसके लिए पुस्तकालय प्रोफेशनल को तैयार रहने की आवश्यकता पर बल देते हुए आवश्यक कौशल को अर्जित करने को कहा।

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