--अभिजीत पाण्डेय,
पटना - बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज।
बिहार नकली सामानों का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश और तीसरे स्थान पर राजस्थान है। यह जानकारी आथेंटिकेशन साल्यूशन प्रोवाइडर एसोसिएशन (एएसपीए) और क्रिसिल द्वारा जारी ‘स्टेट आफ काउंटरफीटिंग इन इंडिया 2022’ की रिपोर्ट में दी गई है। जिसमें बताया गया है कि बिहार समेत देश के बाजारों में बिकने वाले ब्रांडेड कपड़े, एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल के पुर्जे, दवाएं, कृषि रसायन और उपभोक्ता सामानों में हर चौथा उत्पाद नकली है।
रिपोर्ट पटना समेत देशभर के 12 शहरों में उपभोक्ता व खुदरा दुकानदारों पर किए गए सर्वे के आधार पर तैयार हुई है। एएसपीए अध्यक्ष नकुल पसरीचा ने कहा कि नकली माल के बाजार में पहुंचने से लगभग सभी उद्योग प्रभावित हैं।
● ऐसे कर सकते हैं पहचान
सजगता से हम असली व नकली की पहचान कर सकते हैं। असली सामान पर कोड, सीरियल नंबर, मॉडल नंबर, ट्रेडमार्क और पेटेंट संबंधी कई सूचनाएं रहती हैं।
नकली सामान के नाम की स्पेलिंग में फर्क होता है। सामान की फोटो खींचकर ओरिजिनल वेबसाइट पर तुलना की जा सकती है।
● नकली आटोमेटिव पार्ट में पटना दूसरे स्थान पर
पटना में नकली आटोमेटिव पार्ट की बिक्री के मामले में दूसरे स्थान पर है। पटना में यह 34 प्रतिशत, चेन्नई में 38 प्रतिशत, इंदौर में 26 प्रतिशत है। आटो क्षेत्र में सबसे ज्यादा नकली ब्रेक पैड उपलब्ध हैं।
कपड़े के ब्रांड में - इंदौर में सबसे अधिक 89 प्रतिशत, अहमदाबाद 50, कोलकाता 47, चेन्नई में 47 प्रतिशत एवं पटना में 29 प्रतिशत कपड़े के ब्रांड नकली हैं।
खाने-पीने के उत्पाद में - इंदौर में 60, अहमदाबाद में 41 एवं कोलकाता में 42 प्रतिशत एवं पटना में 29 प्रतिशत नकली ब्रांड के सामान उपलब्ध हैं।
इसी तरह पटना में इलेक्ट्रानिक्स समानों में ब्रांडेंड कंपनियों के नकली सामानों के अलावा एलईडी टीवी व एयरकूलर आदि के ब्रांडेंड कंपनियों के सही समान में से कुछ महंगे आरिजनल पार्ट निकालकर लोकल सस्ते पार्ट लगाकर बेचने के भी मामले पकड़ में आए हैं।
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