--हरेंद्र शुक्ला,
वाराणसी - उत्तर प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ सनातनी ब्राह्मण, शुद्र, वैश्य और क्षत्रिय वर्ण के बच्चों का जगद् गुरु कुलम में होगी निःशुल्क शिक्षा, विद्यार्थियों को बनाया जायेगा भारत का स्वाभिमान
भारत में विलुप्त हो रही गुरुकुल परंपरा को जीवंत करने के लिए ब्रह्मलीन ज्योतिष पीठ एवं शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के जीवन के अंतिम संकल्प को पूरा करने के लिए वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर कृतसंक्लप हैं। इस निमित्त वाराणसी में 10 हजार विद्यार्थियों के गुरुकुल परंपरा से पठन पाठन के लिए जगद्-गुरु-कुलम की स्थापना की जायेगी। जहां दस हजार विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा के साथ ही अन्न,जल, वस्त्र, चिकित्सा आदि की निःशुल्क सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। यह जानकारी सोमवार को वाराणसी स्थित श्रीद्यामठ में पत्रकारों से बातचीत में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि जिन गुरुकुलों के टूटने से भारत का गौरव खंडित हुआ है उन्हीं की पुनर्स्थापना से उसके परावर्तन की भी संभावना है। ऐसी स्थिति में गुरुकुलों का पुनर्जीवन आवश्यक है। स्वामीश्री ने कहा कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी ने इन गुरुकुलों को संचालित करते हुए यह अनुभव किया था कि भारत के प्राचीन गौरव को पुनः स्थापित करने के लिए गुरुकुल प्रणाली को बड़े पैमाने पर पुनर्जीवित करना होगा। शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने कहा कि शिक्षा सभी तरह की उन्नतियों का मूल है। शिक्षा की इस शक्ति को सबसे पहले भारतीयों ने पहचाना और एक प्रणाली स्थापित कर इसे सर्व सुलभ बनाया। शिक्षा को सर्व सुलभ बनाने और व्यवसाय से बचाने के लिए हमारे विद्वान दूरदर्शी पूर्वजों ने गुरुकुल शिक्षा प्रणाली स्थापित की जिसमें बिना किसी शुल्क के समाज के सभी वर्गो के बच्चे शिक्षित हो सके और अभिभावकों पर बच्चों की शिक्षा बोझ न बने इसी को लेकर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी ने इस दायित्व को अपने सुयोग्य शिष्य स्वामीश्री को दिया और अपने सामने ही परमहंसी गंगा आश्रम में पूर्व से चल रहे ऋषिकुल संस्कृत महाविद्यालय परिसर में 108 बच्चों का प्रारंभिक गुरुकुल निर्मित करवाया। उनके सामने ही दस हजार बच्चों में से 108 बच्चों का प्रवेश और अध्ययन आरंभ हो गया था जिसे अब क्रमशः बढ़ाया जा रहा है।
एक सवाल के जबाव में स्वामी श्री ने कहा कि इस गुरुकुल में ब्राह्मण, शुद्र, वैश्य सभी के बच्चे समान रूप से गुरुकुल परंपरा के तहत शिक्षा ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर एडवोकेट रमेश उपाध्याय द्वारा लिखित भोजपुरी लिपि का ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने विमोचन किया। भोजपुरी लिपि की तुलना हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी से की गई है।
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