कानूनी घेरे में आयेंगे छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग के आला अधिकारी



--विजया पाठक (संपादक - जगत विज़न),
रायपुर - छत्तीसगढ, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ सियासत के चक्‍कर में छत्‍तीसगढ़ के पुलिस अफसरों को मिलेंगी सलाखें?

■ चांडाल चौकड़ियों की कारगुजारियों में छत्तीसगढ़ पुलिस का साथ

■ 05-10 पुलिस अधिकारियों ने सत्ता के साथ साझा की मलाई

दिसंबर 2018 में जबसे भूपेश सरकार अस्तित्व में आईं हैं, तबसे वसूली और अन्य तंत्र में पुलिस विभाग का बेवजह इस्तेमाल किया। दरअसल इस पुलिस तंत्र का इस्तेमाल अपने खिलाफ उठती आवाज को दबाने के लिए किया गया। बड़े पैमाने पर जूनियर अधिकारी को सीनियर पदों पर बिठाया गया। एलिजिबिल्टी ना होते हुए ही ऐसे अधिकारियों को इन पदों पर बिठाया गया, जिससे इन लोगों ने छत्तीसगढ़ में खौफ का माहौल खड़ा किया। एक तरफ भूपेश की चांडाल चौकड़ी प्रदेश में भयंकर लूट मचाने में मस्त थी, वहीं रायपुर और अन्य जिलों में अपने हिसाब से पुलिस की तैनाती की गई। ईओडब्ल्यू, इंटेलिजेंस, जनसंपर्क में पुलिस अधिकारी बिठाए गए। जैसे आरिफ शेख, अभिषेक माहेश्वरी, आनंद छाबरा, अभिषेक पल्लव, पारुल माथुर, प्रशांत अग्रवाल, भोजराम पटेल और दीपांशु काबरा जैसे पुलिस महकमे का उपयोग प्रदेश मीडिया समेत कई सिविल सोसाइटी को कंट्रोल के लिए किया गया। जिसने भी भूपेश और उनकी चांडाल चौकड़ी के खिलाफ लिखा उसे ठिकाने लगाने का पूरा बंदोबस्त किया गया। हालात यह है कि अभी ईडी की चार्टशीट में पारुल माथुर का नाम है, जिन्हें पुलिस अधीक्षक बिलासपुर से उप पुलिस महानिरीक्षक ACB रायपुर बनाया गया है। इसके पूर्व ED ने 27 नबंवर 2022 को समन जारी कर 30 नबंवर 2022 को उनके बयान दर्ज किए थे। चांडाल चौकड़ी की सदस्य सौम्या चौरसिया के खिलाफ पेश ED की चार्जशीट में पारुल माथुर समेत अन्य दो IPS अधिकारियों प्रशांत अग्रवाल, जो कि SSP रायपुर के पद पर तैनात हैं और भोजराम पटेल का नाम शामिल है। पहले भी ईओडब्‍ल्‍यू, एंटी करप्शन ब्यूरो में कैसे खत्म करवाने और चालू करने में लाखों करोड़ों रुपए का चलन इसी सरकार में चालू किया। इन अधिकारियों ने अपने सीनियर आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ भी झूठा प्रकरण दर्ज करने से गुरेज नहीं किया। जिसका एक उदहारण जी. पी. सिंह है।

आज छत्तीसगढ़ में यह किसी न किसी मामले में शक के दायरे में है। कोई जमीन खरीदी को लेकर तो कोई अवैध उगाही को लेकर। अपने आका के एक इशारे पर यह किसी पत्रकार को सैनिटाइजर पिला देते हैं या मेरे घर पर पुलिस भेजकर मेरे अवैध डिटेंशन की कोशिश करते हैं। इन अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ में जंगल राज स्थापित कर दिया है। अपने आपको ईडी से बचाने के लिए यही अधिकारी अब वहां सरकार की गोपनीय खबर भी देते हैं। जैसे जब सरकार चुपचाप से ईडी के अधिकारियों पर किडनैपिंग का केस लगाने जा रही थी तो उपरोक्त में से एक अधिकारी ने ही ईडी को इस बावत खबर दी। चाहे कोल घोटाला हो, शराब घोटाला या महादेव ऐप घोटाला सबमें पुलिस की मिलीभगत है। ऐसे में अगर भ्रष्टाचार में लिप्त IPS अधिकारी को एंटी करप्शन ब्यूरो की कमान मिले तो उसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए। जैसे कि मैंने पहले भी लिखा था कि प्रदेश के कुछ आईएएस अधिकारियों पर सत्ता के गलत कामों में साथ देने के कारण नतीजे भुगतने होंगे। ठीक वैसी ही कार्यवाही प्रदेश के कुछ पुलिस अधिकारियों पर भी होने की तैयारी है। खासतौर पर उन पर जो शायद सबको यह कहते घूमते हैं कि "इन लोगों" को भूपेश बघेल (साहब) के वापस चुनाव जीतने पर घसीट के लाएंगे। निश्चित तौर पर छत्तीसगढ़ में भय-अत्याचार-दमन का इस चक्र का भी अंत जल्द होगा।

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