--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन की अनुमति के बिना उनके नाम, छवि या आवाज का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज अभिनेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने फ़्लैग की गई सामग्री को हटाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को भी निर्देश दिया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक अंतरिम आदेश जारी किया, जिसके अनुसार अब कोई भी बॉलीवुड के शहंशाह यानी अमिताभ बच्चन की आवाज, नाम और चेहरे से जुड़े किसी भी चीज (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) का इस्तेमाल, बिना महानायक की अनुमति के उपयोग नहीं किया जा सकेगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को टेलीकॉम मिनिस्ट्री समेत सम्बधित विभाग को अमिताभ बच्चन से सम्बंधित चीजो को हटाने के लिए कहा जो बिना उनकी अनुमति के इस्तेमाल किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स के संरक्षण पर मुहर लगा दी है। कोर्ट के अनुसार, अमिताभ बच्चन देश के सबसे प्रसिद्ध व्यक्तियों में से हैं और विभिन्न विज्ञापनों में उनके नाम और चेहरे का इस्तेमाल होता रहता है। कई बार लोगों द्वारा उनकी अनुमति के बिना अपने सामान और व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए उनकी आवाज, चेहरे का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे बिग बी परेशान हैं। ऐसे में उन्होंने अदालत के समक्ष अपनी समस्या रखी।
अदालत का कहना है कि अमिताभ बच्चन ने क्योंकि अपने नाम, तस्वीरों और आवाज के उनकी परमिशन के बिना इस्तेमाल पर ऐतराज जाहिर किया है, इसलिए कोर्ट भी उनसे सहमत है। क्योंकि, ऐसी स्थिति में उन्हें और उनकी छवि को नुकसान हो सकता है। अभिनेता की अनुमति के बिना उनके नाम, चेहरे या आवाज का इस्तेमाल किया गया तो मामले में पृथ्म दृष्टया केस तो बनता है। इसके साथ ही कोर्ट ने बिग बी के पक्ष में अपना फैसला दिया यानी अब बिना अमिताभ बच्चन की मंजूरी के उनकी फोटो, आवाज या नाम इस्तेमाल किया तो ऐसा करने वाला कानूनी पचड़े में फंस सकता है। बिग बी ने पर्सनैलिटी राइट्स का हवाला देते हुए कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। पर्सनैलिटी राइट्स को राइट ऑफ पब्लिसिटी भी कहा जाता है। यह एक ऐसा लॉ है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति को अधिकार होता है कि वह अपनी अनुमति के बिना अपने नाम, आवाज और चेहरे का वित्तीय मामलों में इस्तेमाल होने दे या नहीं। मेगास्टार ने पुस्तक प्रकाशकों, टी-शर्ट विक्रेताओं और विभिन्न अन्य व्यवसायों के खिलाफ निरोधक आदेश भी मांगा है।
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