चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मामला: पूर्व नौकरशाह अरुण गोयल की नियुक्त पर सख्त हुआ शीर्ष अदालत



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से उनकी नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं। संवैधानिक बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान केंद्र ने गोयल की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज दिखाने पर आपत्ति जताई। केंद्र का कहना था कि इसकी कोई जरूरत नहीं है, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि आप दस्तावेज पेश कीजिए। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हम देखेंगे कि नियुक्ति में कहीं कुछ गलत तो नहीं हुआ। वहीं इस मामसे की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट आज यानि गुरुवार को करेगा।

दरअसल, याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने संविधान पीठ को बताया था कि गुरुवार को उन्होंने ये मुद्दा उठाया था। इसके बाद सरकार ने एक सरकारी अफसर को वीआरएस देकर चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिया। जबकि हमने इसे लेकर अर्जी दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस अधिकारी की नियुक्ति से संबंधित फाइलें पेश करें ताकि हम यह सुनिश्चित कर सकें कि कोई हंकी पैंकी नहीं हुआ। अगर ये नियुक्ति कानूनी है तो फिर घबराने की क्या जरूरत है।

उचित होता चुनाव आयोग की शक्तियों की बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक जिरह के दौरान मंगलवार को कहा था कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर टीएन शेषन की तरह के सुदृढ़ चरित्र वाले व्यक्ति को चाहता है। कोर्ट ने कहा कि संविधान ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्तों के नाजुक कंधों पर बहुत जिम्मेदारियां सौंपी हैं। सुप्रीम कोर्ट की राय है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाए। इससे नियुक्ति प्रक्रिया में तटस्थता आएगी।

गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सेवानिवृत्त नौकरशाह अरुण गोयल को शनिवार को चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था। गोयल पंजाब कैडर के पूर्व अधिकारी हैं। 37 से अधिक वर्षों की सेवा के बाद केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए। फरवरी 2025 में राजीव कुमार के कार्यालय छोड़ने के बाद अब वह मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की कतार में हैं।

नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के एक दिन बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया था। चुनाव आयोग ने कहा कि गोयल ने सोमवार को पदभार ग्रहण किया। जिसके बाद 1985 बैच के पंजाब कैडर के अधिकारी अरुण गोयल मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे के साथ चुनाव आयोग में शामिल हो गए।

भूषण ने कहा, "अरुण गोयल गुरुवार तक सरकार में सचिव स्तर के अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे। अचानक उन्हें शुक्रवार को वीआरएस दिया गया और चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया।" अन्यथा उन्हें 31 दिसंबर को 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होना था। अदालत ने सरकारी वकील, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी की आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मामलों को उठाना सही नहीं है। "पहले सभी वरिष्ठ नौकरशाहों की एक सूची तैयार की जाती है। और फिर सूची कानून मंत्रालय को भेजी जाती है, जिसे बाद में पीएम को भेज दिया जाता है," वकील ने समझाया, और कहा, "मौजूदा प्रणाली ठीक काम कर रही है और कोई ट्रिगर बिंदु नहीं है अदालत के हस्तक्षेप के लिए।” अदालत ने जोर देकर कहा कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि व्यवस्था सही नहीं है। अदालत ने कहा "एक पारदर्शी तंत्र होना चाहिए।"

अदालत ने कहा, "हम देखना चाहते हैं कि तंत्र क्या है। हम इसे एक विरोधी के रूप में नहीं मानेंगे और इसे अपने रिकॉर्ड के लिए रखेंगे, लेकिन हम जानना चाहते हैं क्योंकि आप दावा करते हैं कि सब कुछ सही है... आपके पास कल तक का समय है।" सरकारी वकील से कहा अदालत पहले ही बता चुकी है कि कैसे संविधान का अनुच्छेद 324 - चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर - एक प्रक्रिया को निर्धारित नहीं करता है। यह प्रक्रिया को परिभाषित करने के लिए संसद द्वारा एक कानून की परिकल्पना करता है, लेकिन यह पिछले 72 वर्षों में नहीं बनाया गया है।

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