--हरेंद्र शुक्ला,
वाराणसी-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।
भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ में गुरुवार को भारतीय संस्कृति से प्रभावित विदेशी जोड़े ने हिंदू रीति रिवाज से वैवाहिक सूत्र में बंधे। विदेशी जोड़े की पाणिग्रहण संस्कार अयोध्या निवासी आदित्य के द्वारा आयोजित किया गया था। जहां पर कोलंबिया की डेनियला के मांग में कोलंबिया के ही युवक ईवान ने सिंदूर भरकर उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
सारनाथ वैसे तो भगवान बुद्ध के लिए विश्व प्रसिद्ध है लेकिन यहां पर सारंगनाथ महादेव विराजमान हैं। जहां पर अक्सर शादी की परंपराएं संपन्न होती हैं। अब यह शिव मंदिर सात समंदर पार के जोड़ों का भी साक्षी बन रहा है। गुरुवार की दोपहर में कोलंबिया के एक जोड़े ने हिंदू रीति रिवाज से अग्नि कुंड के सात फेरे लिए और सात जन्मों के लिए एक दूजे के हो गए। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच पं. कृष्णकांत त्रिपाठी ने अग्निकुंड के सात फेरे दिलवाए।
इस बाबत नवविवाहित जोड़े ने बताया कि सही मायने में भारतीय संस्कृति का पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं है। हमारी हार्दिक इच्छा थी कि भारतीय संस्कृति के दायरे में हिन्दू रीति रिवाज से वैवाहिक जीवन की शुरुआत करें जो आज पौराणिक नगरी काशी में पूरी हुई। काफी दिनों से हम दोनों को भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव था। हमने तय किया कि पूरी विधि विधान से हम हिन्दू रीति रिवाज से वैवाहिक सूत्र में बंधकर अपने नए जीवन की शुरुआत करेंगे। ईवान ने बताया कि वह मध्य प्रदेश के पन्ना से 16 नवंबर को वाराणसी आए थे। मित्र आदित्य ने शादी का पूरा आयोजन किया था जहां पर कृष्ण कांत त्रिपाठी ने हमारी हिंदू विधि विधान से शादी संपन्न कराई। विदेशी जोड़े के हिन्दू रीति रिवाज से वैवाहिक विधान को उत्सुकता से देख रहे थे।
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